पटना: भारतीय रेलवे का पूर्व मध्य रेलवे को वैसे ही “अभूतपूर्व” ज़ोन नहीं कहा जाता, क्योंकि यहां के महान महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह जो “धृतराष्ट्र” के रूप में कुख्यात और विख्यात है, कुख्यात और विख्यात इसलिए हैं क्योंकि इनके कार्यकाल में पूर्व मध्य रेलवे में सीबीआई की आठ आठ रेड पड़ी है और बहुत सारे अधिकारियों एवं कर्मचारियों का भविष्य अधर में है लेकिन फिर भी व्यवस्था में बदलाव के कोई आसार दिख नहीं रहा। जिस तरह से महाभारत में “धृतराष्ट्र” ने अपनी जिद में हस्तिनापुर को तहस-नहस कर दिया था ठीक उसी तरह पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने हाजीपुर की प्रशासनिक व्यवस्था को तहस नहस करने का संकल्प लिया हुआ है और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।

पूर्व में आपने देखा और जाना है कि जब सीबीआई द्वारा निर्माण संगठन पटना में छापेमारी की गई और कुछेक अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया तो दामन पर लगे दाग़ को मिटाने के लिए स्थानांतरण का शतक लगाकर वाहवाही लूटने की कोशिश की गई, लेकिन स्थानांतरण की कार्रवाई छद्म प्रयास निकला, क्योंकि सभी दागियों को पुनः फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनके मनमाफिक स्थान पर पदस्थापित कर दिया गया ।
पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महान महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह एवं प्रमुख वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी श्रीमान नीरज वर्मा ने अपने निहितार्थ 20 मई 2026 को “ग्रीन फाइनेंसिंग” पर रेल सेवा से गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त अधिकारी संतोष कुमार पटनायक का व्याख्यान कराकर अपनी “धृष्टता” का परिचय दिया था।
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पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महान महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह के कारनामों की फेहरिस्त लंबी है और प्रमुख वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी श्रीमान नीरज वर्मा से उनकी सांठ-गांठ से “लूट चले हम” अनवरत गतिमान है और उसकी एक बानगी पुनः देखने को मिल रहा है। निर्माण संगठन में पदस्थापित श्रीमती वन्दना शर्मा पीएफए (निर्माण) का स्थानांतरण आदेश रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या E(O)III-2026/PM/53, New Delhi dated 03.06.2026 के माध्यम से पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर कर दिया गया और इसी आदेश के माध्यम से श्रीमान प्रणव कुमार मल्लिक का पीएफए (निर्माण) के लिए आदेश जारी किया गया । रेलवे बोर्ड के नियमानुसार अधिकारियों का स्थानांतरण एक महीने में सुनिश्चित हो जाना चाहिए लेकिन सुनियोजित योजना के तहत श्रीमती वन्दना शर्मा को पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के लिए लेखा विभाग के आदेश संख्या O.O No: 714/Gaz dated 07.07.2026 के माध्यम से विरमित कर दिया गया, और महाप्रबंधक के आदेश से प्रमुख वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी श्रीमान नीरज वर्मा को एक महीने या जब तक नियुक्त अधिकारी रिपोर्ट नहीं करते हैं तब तक के लिए पीएफए का दोहरा प्रभार का आदेश निर्गत किया गया ।

प्रमुख वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी को दोहरा प्रभार दिए जाने पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं, सबसे पहले यह सवाल उठता है कि जब प्रणव कुमार मल्लिक ने योगदान नहीं दिया तो आखिर क्या हड़बड़ी थी कि श्रीमती वन्दना शर्मा को आनन फानन में पूर्वोत्तर रेलवे के लिए विरमित कर दिया गया क्योंकि आज़ भी कुछ अधिकारी पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय से विरमित नहीं किए गए हैं जिनका आदेश रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किया गया था और सबसे गंभीर सवाल तो रेलवे बोर्ड की व्यवस्था पर उठता है कि स्थानांतरण आदेश जारी हुए लगभग 45 दिन हो गए तो फिर श्रीमान प्रणव कुमार मल्लिक को पूर्व मध्य रेलवे के लिए विरमित क्यों नहीं किया गया??
यह तो सर्वविदित है कि पूर्व मध्य रेलवे का निर्माण संगठन लूटेरे अधिकारियों का सुरक्षित चारागाह है और पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक श्रीमान छत्रसाल सिंह जो अवकाश प्राप्त करने के कगार पर है और व्यवस्था को कंगाल करने का कोई भी अवसर छोड़ना नहीं चाहते हैं अपने निहितार्थ को चरितार्थ करने हेतु ही नीरज वर्मा को दोहरा प्रभार सौंपा है क्योंकि यह भी सर्वविदित है कि श्रीमती वन्दना शर्मा साफ सुथरी और ईमानदार छवि की थी और निर्माण संगठन में हो रही विसंगतियों को दूर करने का प्रयास कर रही थी और महाप्रबंधक की मंशा में वाधा थी।
खैर जो होना है वो तो होकर ही रहेगा लेकिन यह शासन एवं प्रशासन के लिए शर्मशार करने वाली है।अब देखने वाली बात यह भी होगी कि दोहरे प्रभार में पीएफए नीरज वर्मा किस किस भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं और Railwellwishers की नज़र उनके कारनामों पर बनी रहेगी।
सफ़र जारी है…





