हाजीपुर: भारतीय रेल का शायद ही कोई ऐसा ज़ोन होगा, जहां एक महाप्रबंधक के कार्यकाल में सीबीआई की दस दस रेड पड़ी हों , और यही कारण है कि पूर्व मध्य रेलवे “अभूतपूर्व ज़ोन” के रूप में विख्यात है और विख्यात इसलिए हैं क्योंकि यहां का “एसडीजीएम” श्रीमान पंकज कुमार सिन्हा अपने निहितार्थ कारनामों के लिए कुख्यात है।
पूर्व मध्य रेलवे के एसडीजीएम श्रीमान पंकज कुमार सिन्हा में ऐसा क्या सुरखाब का पंख लगा हुआ है कि उनको ईसीआर के एसडीजीएम पद से हटाया नहीं जा सकता । छत्रसाल सिंह और पी के सिन्हा की जोड़ी चोर चोर मौसेरे भाई वाली थी । दोनों ने एक दूसरे के भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला और ईसीआर को लूटगाह बना दिया। बटोरन उर्फ लूटन की बिदाई हो चुकी है और उसने ईसीआर को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी । उसके पाप का भागीदार एसडीजीएम को प्रमोशन के बाद भी पोस्ट को अपग्रेड करके बिठा दिया । जबकि बहुत सारे रेलवे में स्टोर्स डिपार्टमेंट के एच ए जी के पद खाली थे और अभी भी खाली है ।
7-8 सीबीआई रेड के बाद भी रेलवे बोर्ड का पी के सिन्हा को एसडीजीएम बनाये रखने के पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही कारण हो सकता है वो है रेलवे बोर्ड में बैठे हुक्मरानों को सेवा और मेवा का उपाय । पी के सिन्हा ने तबके अपने स्वजातीय चक्का कारखाना के CAO के साथ मिलकर लूट के नए कीर्तिमान स्थापित किये थे । बाद में एसडीजीएम पद भी उसी लूट को दबाने के लिए लिया गया नहीं तो पूरे जीवन ईसीआर में लूट पाट मचाने के बाद वैसे भ्रष्ट अधिकारी को उसी रेलवे का एसडीजीएम बनाने के पीछे और क्या मंशा हो सकती है । सीवीसी और रेलवे बोर्ड में बैठे सीआरबी को इसका संज्ञान लेना चाहिए था । इसके ईसीआर में एसडीजीएम पोस्टिंग में भी मैकेनिकल विभाग के उसी स्वजातीय CAO की अहम भूमिका की बात भी कही जा रही है । CAO ने भी अपने कार्यकाल में बहुत गंदगी मचा रखी थी । पद का धौंस दिखाकर उसने कई काले कारनामों को अंजाम दिया है ।
यह भी बताना जरूरी हो जाता है कि बेला चक्का कारखाना भी ईसीआर के विजिलेंस के कार्यक्षेत्र में आता है । इस पूरे प्रकरण की सीबीआई से जाँच करानी चाहिए । ईसीआर में रेलवे की बर्बादी का खेल पुराने जीएम के लड़के के शादी के समय खेला गया । सरकारी धन का वैसा दुरुपयोग इससे पहले कभी भी ना हुआ होगा और ना होगा । उस दौरान एसडीजीएम भी जीएम के कंधे से कंधा मिलाकर रेलवे की खुली लूट में शामिल था । जीएम के बंगले में लाखों के काम कराए गए , उसके कई काम के भुगतान अभी तक बाकी हैं , उस वक़्त के काम को नए कांट्रैक्ट्स में एडजस्ट करने की तैयारी है ।
क्या एसडीजीएम को इस बात की जानकारी नहीं है ? रेलवे में सबसे बड़ा रेस्ट हाउस घोटाला जीएम के लड़के के शादी के समय हुआ चारों तरफ़ लूट का आलम था अफ़रा तफ़री मची हुई थी और सब कुछ जानते हुए एसडीजीएम सिर्फ़ हाथ पर हाथ धरे बैठा ही ना रहा बल्कि बहती गंगा में उसने भी जम कर स्नान किया साबुन शैम्पू लगाकर स्नान किया । दानापुर में रेस्ट हाउस के रेनोवेशन के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए फर्नीचर मंगाए गए । वो फर्नीचर कैसे आए कहाँ गए इसका कोई हिसाब किताब नहीं है क्या एसडीजीएम के विजिलेंस डिपार्टमेंट को ये नहीं देखना चाहिए ?
एसडीजीएम का काम सिर्फ भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना रह गया है विजिलेंस डिपार्टमेंट को करप्ट अधिकारियों का रखैल बना रखा है । भ्रष्टाचारी परस्त एसडीजीएम को ईसीआर में बनाए रखने का क्या औचित्य है ये समझ से परे है । रेलवे बोर्ड भी इस महाभ्रष्ट एसडीजीएम को प्रश्रय दे रहा है । इसका स्पष्ट संकेत है कि लूट की कमाई का हिस्सा रेलवे बोर्ड भी पहुंच रहा है । ऐसे भ्रष्ट एसडीजीएम को तत्काल प्रभाव से हटा देना चाहिए ।
अब देखने वाली बात यह होगी कि माननीय रेल मंत्री महोदय पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एसडीजीएम पर क्या कार्रवाई करते हैं!




