पटना: पूर्व मध्य रेल में दागी कर्मचारियों को पुरस्कृत करने का पुराना प्रचलन है। पिछले ही वर्ष एक दागी आरपीएफ इंस्पेक्टर को डीजी पुरस्कार से नवाजा गया था और निर्माण विभाग (उत्तर) के उप मुख्य अभियंता को भी ऐसे ही उच्चतम पुरस्कार से शोभित किया गया था। रेलवे मे दक्ष एवं कर्तव्य निष्ठ कर्मचारियों, अधिकारीयों को सम्मानित करने की पूरानी परम्परा है तथा इसके माध्यम से कार्यबल को प्रोत्साहित करना ही मुख्य उद्देश्य है।
परन्तु, आज के लेन देन के माहौल में केवल दक्षता ही नहीं बल्कि दान शीलता भी इसका बहुत बड़ा ही माप दण्ड है। आप अपनी आमदनी से अपने अधिकारियों को कितना दान देते हैं, इस पर भी पुरस्कार का निर्णय होता है। पुरस्कार, सम्मान के रूप में भी होता है और पदस्थापना के रूप में भी।
यदि कर्मचारी किसी अधिकारी का रिश्तेदार है तो पाँचों अँगुली घी में और सिर कड़ाही में। एक मालदार पोस्टिंग से दूसरा मालदार पोस्टिंग और वह भी घर के समीप। यदि चन्दा नहीं दिया तो घर से दूर, उत्तर से दक्षिण या पूर्व से पश्चिम। जैसा चन्दा- वैसी ही पोस्टिंग।

हाल ही में उत्तर बिहार के उप मुख्य निर्माण अभियंता के ऑफिस से लगभग 1.5 करोड़ रुपये के साथ एक अधिकारी और ठेकेदार को पकड़ा गया था.
उस ठेकेदार का अन्य उप मुख्य अभियन्ता के यहां भी दो काम है और उसी ठेकेदार के उस काम को देखने वाले वाले वरीय प्रशाखा अभियंता (कार्य) उसी परियोजना के मुख्य अभियन्ता के निकटस्थ संबंधी है।
ज्ञात हुआ है कि उस काम से संबंधित फ़ाइल को जाँच एजेंसी ने मँगवा लिया है एवं जाँच के आँच से बचाने के लिए मुख्य अभियंता ने उसे स्थानांतरण कराने के ऐड़ी चोटी का जोड़ लगा दिया है।
मालूम हो कि मुख्य अभियंता इसी महीने रिटायर हो रहे हैं और अपने जाने के पहले अपने उस संबंधी को मालदार पोस्टिंग देकर विदा होना चाहते हैं.
उनके इस कदम से कर्मचारियों को मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण)(उत्तर)के ऊपर काफ़ी क्षोभ है जो दक्षता को दरकिनार कर मुख्य अभियंता के रिश्तेदार की पोस्टिंग एक महत्वपूर्ण परियोजना में कर रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि महाप्रबंधक, पूर्व मध्य रेलवे, इस पर भी मौन धारण करते हैं या उस दागी वरीय प्रशाखा अभियंता (कार्य) को उत्तर से दक्षिण भेजते हैं। वैसे होगा वहीं जो राम चाहेंगे काहे कि निर्माण संगठन राम भरोसे ही तो चल रहा है!





