हाजीपुर: यहां के वित्तीय प्रबंधन छोड़कर सारे ग़लत कार्य लेखा विभाग के जिम्मे है । ईसीआर के पुराने खिलाड़ी यहां के वित्त प्रमुख है और दशकों से यहीं है बीच बीच में कहीं कहीं घूम आते हैं । लेखा विभाग का मुख्य कार्य ट्रांसफर पोस्टिंग और उसमें पैसा वसूली करना है । रूटीन कार्य नीचे के लोगों को टीका कर अपने ख़ुद राजशाही के मजे ले रहे हैं और साथ साथ एक दो पुराने शागिर्दों को भी मजे करवा रहे हैं ।जूनियर स्केल के अधिकारियों की अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद भी उन्होंने अपने राजदार सिपाहसालार राजीव रंजन को दो दो महत्वपूर्ण प्रभार दे रखें हैं ।
वह लेखा मुख्यालय के प्रशासन का सर्वेसर्वा होने के साथ साथ व्यव अनुभाग का कमान भी अपने हाथों में रखा है । मुख्यालय हाजीपुर में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि कई वरीय अधिकारी SAG स्तर तक के अधिकारी भी राजीव रंजन के अधीन कार्य करते हैं । वह उनको वित्त प्रमुख का संदेशा देता है और वैसे कमजोर अधिकारी अगले ही पल वो काम करके राजीव रंजन को रिपोर्ट कर देते हैं । राजीव रंजन सुपर पीएफए की भूमिका में है । इसकी बानगी अभी हाल में हुए एक ट्रांसफर ऑर्डर में साफ़ दिखाई दिया । इसी वर्ष जनवरी 2026 में महेंद्रू अवस्थित रेलवे निर्माण कार्यालय में सीबीआई की छापामारी में लेखा विभाग में बिल भुगतान के नाम पर रिश्वत लेने की बात आई थी उसको बाकायदे FIR में भी दर्ज किया गया था , उस वक्त निर्माण कार्यालय के लेखा विभाग के व्यय अनुभाग में तीन वरीय अनुभाग अधिकारी पोस्टेड थे उन तीनों को सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया था और उस मामले में केस दर्ज है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है ।
बाकी और कर्मचारियों के साथ साथ इन तीनों का ट्रांसफर मार्च 2026 में महाप्रबंधक के सीधे हस्तक्षेप के बाद दूर दराज के मंडलों में हुआ था फिर भी 25 मई 2026 के कार्यालय आदेश में इन तीनों का ट्रांसफर वापस हाजीपुर और सोनपुर कर दिया जाता है वो भी मेडिकल ग्राउंड्स पर । ये तीनों अचानक बीमार भी हो जाते हैं और इनको मात्र दो महीने में ही महाप्रबंधक के आदेश को धत्ता बताते हुए वापस कर लिया जाता है वो भी मेडिकल ग्राउंड पर । क्या किसी मेडिकल बोर्ड का गठन हुआ था ? अगर मेडिकल इमरजेंसी थी तो फिर पटना या दानापुर में पोस्ट क्यों नहीं किया गया ? पता चला है कि ये तीनों वर्तमान पीएफए के सप्लाई चेन का अहम हिस्सा थे और पूर्व में किए गए सेवा का मेवा मिला है । ये भी बताया गया है कि महाचोर चौपट राजा के सिपहसालार ने इसमें पैसों की भी लेन देन की है ।
पैसा ऊपर संबंधित JAG और SAG अधिकारी को मिला की नहीं इसकी जानकारी आने पर साझा किया जाएगा । एक साजिश के तहत अंधेर लेखा के चौपट राजा ने दो ऐसे अधिकारियों को सामान्य प्रशासन की ज़िम्मेदारी सौंपी जिन दोनों को कभी इसी महाचोर वित्त प्रमुख ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप में उनको समय से काफ़ी पहले ( मात्र 8-9 महीने में ही) हटाकर HQ में non sensitive post पर बिठा दिया था । सात -आठ महीनों ना जाने ऐसा क्या हुआ कि दोनों चोरी और भ्रष्टाचार के आरोप में हटाये गए अधिकारी चौपट राजा के खासम खास बन गए और उनको अपने सिपहसालार राजीव रंजन के मातहत सामान्य प्रशासन का JAG और SAG अधिकारी बना दिया । इस तरह राजीव रंजन सामान्य प्रशासन का सुप्रीमो बन गया । राजीव रंजन ने अपने कुछ लोगों को पटना में सेंट्रल हॉस्पिटल में पोस्ट कर दिया है जहाँ कोई काम नहीं है ।
अब वहाँ बिल अनुभाग खोलने की तैयारी है ताकि एक सप्लाई का केंद्र और बन सके । पूर्व मध्य रेल का लेखा विभाग इस महाचोर चौपट राजा के कार्यकाल में अपने सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहा है । रेलवे बोर्ड और जीएम ने यहां के कर्मचारियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है । महाप्रबंधक के लिए शर्म से डूब मरने की बात है जिस जीएम के हस्तक्षेप से तीनों दोषी SSOs को दूर दराज के मंडलों के भेजा गया था उसी जीएम के नाक के नीचे से महाचोर चौपट राजा ने उनको एक फ़र्ज़ी आधार पर उनके मनचाहे स्थान पर बिठा दिया । एक और मामले में महाचोर चौपट राजा के हमनाम है जो जब मुख्यालय लेखा व्यय अनुभाग में बने रहने के लिए SSO का प्रमोशन ठुकरा कर मलाई खाते रहे । तीन साल का कार्यकाल पूरा करके अपनी इच्छा से SSO का पद लिए और फिर तीन चार महीने आराम के बाद वापस व्यय अनुभाग में SSO के अवतार में आए । चर्चा है कि सुपर पीएफए राजीव रंजन पैसा लेकर उसकी पोस्टिंग व्यय अनुभाग में कराया है ।
रेलवे बोर्ड को इस निकम्मे, महाचोर , भ्रष्टाचार के संरक्षक पीएफए को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए ।





