पटना: 31 अगस्त 2026 को भारतीय रेल श्रीमान छत्रसाल सिंह के भार से मुक्त हो गया लेकिन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाप्रबंधक के पद पर आसीन रहते हुए इन्होंने जो लूट की ग़दर मचाई है, वो इतिहास में दर्ज हों गया है । श्रीमान छत्रसाल सिंह ने “धृतराष्ट्र” की भूमिका का बखुबी निर्वहन किया और अपने चार यार के साथ मिलकर पूर्व मध्य रेलवे की प्रशासनिक व्यवस्था को ध्वस्त ही नहीं किया, बल्कि व्यवस्था का अंतिम संस्कार कर दिया और जब व्यवस्था का अंतिम संस्कार कर दिया तो श्राद्ध कार्यक्रम भी आवश्यक ही था और श्राद्ध कार्यक्रम को “फेयरवेल पखवाड़ा” का नाम दिया गया।

“फेयरवेल पखवाड़ा” का आयोजन 14 अगस्त से 31 अगस्त तक पूर्व मध्य रेलवे के पांचों मंडल मुख्यालय सहित पाटलिपुत्र रेल परिसर में मनाया गया जहां आठो विभागों ने बढ़-चढ़कर अपर्ण एवं समर्पण कर वाहवाही लूटी, होड़ इस बात की थी कि “हम किसी से कम नहीं” और “हमसे बढ़कर कौन”!
“फेयरवेल पखवाड़ा” कार्यक्रम की मुख्य झलकियों में श्रीमान छत्रसाल सिंह के चार यार का नृत्य एवं गायन तो सुर्खियों में रहा ही लेकिन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक (सतर्कता) श्रीमान पंकज कुमार सिन्हा का “मुजरा” सब पर भारी पड़ गया!
“फेयरवेल पखवाड़ा” के समापन से सबसे ज्यादा राहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, निजी चालकों एवं आरपीएफ के जवानों को मिली है जो सुबह के पांच बजे से लेकर रात के एक दो बजे तक अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे थे। फेयरवेल पखवाड़ा का सबसे बड़ा दुखद पहलू यह रहा कि महाप्रबंधक सेल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से भी उपहार के नाम पर पांच-पांच सौ रुपए की वसूली की गई, और यह शत् प्रतिशत सच है।
पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो अपने कृत्यों के कारण “लूटन सिंह” एवं बटोरन सिंह ” के रूप में विख्यात हुए क्योंकि इन्होंने 06 दिसम्बर 2025 को अपने बेटे के शादी समारोह के नाम पर जो लूट की ग़दर मचाई थी, कर्मियों एवं अधिकारियों के लिए अविस्मरणीय है।
“फेयरवेल पखवाड़ा” के तहत”पगड़ी एवं चुमावन” कार्यक्रम में जो भी उपहार मिला हो लेकिन जो अनुपम उपहार निर्माण संगठन ने दिया है, चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि निर्माण संगठन ने दिल्ली के वसंतकुंज में एक आलीशान फ्लैट एवं गुलाबी नगरी जयपुर में पुराने मकान का नवीनीकरण एवं रेल मीनार का अनोखा उपहार दिया है और इस उपहार को साकार किया है Aadya Raj Developers Pvt Ltd ने,जिसे नियमों को दरकिनार करते हुए 213 करोड़ का निविदा दिया गया है। उपरोक्त फर्म को निविदा आवंटित करने के लिए ही पीएफए वंदना शर्मा को असमय ही हटाया गया और अपने खास यार नीरज वर्मा को निर्माण संगठन का दोहरा प्रभार दिया गया।
श्रीमान छत्रसाल सिंह को निर्माण संगठन से उपहार स्वरूप दिल्ली के वसंतकुंज में आलीशान फ्लैट एवं जयपुर में रेल मीनार तो मिल गया तो अब फर्नीचर की दरकार थी, तो इसकी कहानी भी बड़ी ही दिलचस्प है।
जब श्रीमान छत्रसाल सिंह के बेटे की शादी थी, तो दानापुर में रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा बनाए जा रहे अधिकारी आवास को “गेस्ट हाउस” में तब्दील कर दिया गया और साथ ही साथ पाटलिपुत्र रेल परिसर में भी एक गेस्ट हाउस बनाया गया और स्टोर विभाग ने करोड़ों की फर्नीचर एवं अन्य सामग्री की स्पाट खरीददारी की और शादी का कार्यक्रम समाप्त होने पर योजनानुसार गेस्ट हाउस को अधिकारी आवास में तब्दील कर दिया गया और करोड़ों का फर्नीचर एवं अन्य सामग्री तथा टीवी, एयरकंडीशन इत्यादि को जयपुर भेज दिया गया।
कहते हैं ना खाना उतना ही खाना चाहिए जितना हजम हो सकें लेकिन “लूट चले हम” अभियान का ऐसा नशा सवार था कि “हर घर तिरंगा अभियान” को भी नहीं बख्शा गया, खैर जो होना था हो गया और अब जो होगा वो भी देखने वाला होगा, क्योंकि Railwellwishers ने संकल्प किया है कि इनके भ्रष्ट कारनामों एवं कारनामों में शामिल अधिकारियों का कुकृत्यों को रेल पटल पर लाने का प्रयास जारी रहेगा।
सफ़र जारी है…




