पटना: ऐसा तो सभी कहते हैं “स्वास्थ्य ही धन है”, इसका मतलब है अच्छा स्वास्थ्य जीवन का सबसे बड़ा खजाना है जो पैसे से नहीं खरीदा जा सकता, स्वस्थ्य शरीर और मन के बिना धन का कोई मतलब नहीं, क्योंकि आप न तो ठीक से भोग सकते हैं और न ही जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
भारतीय रेल एवं रेलकर्मियों के स्वास्थ्य की देखभाल की जिम्मेदारी भारतीय रेल स्वास्थ्य सेवा की है जो भारतीय रेल के कर्मचारियों, सेवानिवृत्तो और उनके परिवारों को रेलवे अस्पतालों, स्वास्थ्य इकाइयों और अनुमोदित निजी/सरकारी अस्पतालों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं, जो व्यापक रेलवे नेटवर्क में कर्तव्य के लिए फिटनेस और स्वास्थ्य सुनिश्चित करती है ।

भले ही भारतीय रेल का स्वास्थ्य सेवा आकर्षित करता हो लेकिन पास जाने पर अचंभित भी करता है क्योंकि भारतीय रेल का स्वास्थ्य सेवा का मन धन के पीछे भटक चुका है और जब मन धन के पीछे भटक चुका है तब स्वास्थ्य सेवा की दशा और दिशा क्या होगी कल्पना की जा सकती है!
ठीक ऐसे ही दृश्य का दर्शन कराया है मंडल रेल अस्पताल, पूर्व मध्य रेलवे, दानापुर ने,जब कोविड 19 के समय देशवासी थाली और ताली बजाकर जीवन की सांसें गिन रहे थे, पूर्व मध्य रेलवे का मंडल रेल अस्पताल ने आपदा की इस दुखद घड़ी में भी आपदा को अवसर में बदलने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी!
आरटीआई से मिली जानकारी अनुसार कोविड 19 के समय 01.04.2020 से लेकर 22.09.2020 तक ₹ 1,30,64,360.53 (एक करोड़ तीस लाख चौसठ हजार तीन सौ साठ रूपए)की खरीदारी की गई। कार्यालय महानिदेशक लेखा परीक्षा, पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर द्वारा 20.06.2022 से लेकर 13.07.2022 तक कराए गए आडिट जांच में ₹20,80,652 का गड़बड़ी पाया गया है । विभाग ने अपने जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि रैपिड एंटिजेन टेस्ट किट्स, हैंड सेनेटाइजर,पीपीई कीट,एन 95 मास्क इत्यादि की खरीदारी में भारी अनियमितता बरती गई है, जबकि वही समान दूसरे जगह 02.04.2020 से लेकर 19.05.2021 तक कम दर पर खरीदारी हुई है। कार्यालय महानिदेशक लेखा परीक्षा ने अपने रिपोर्ट में खरीदारी में हुई गड़बड़ी से अवगत तो करा दिया है और हुई कार्रवाई से अवगत कराने की बात कही है लेकिन क्या कोई कारवाई हुई भी होगा ऐसा लगता है!
पूर्व मध्य रेलवे की स्वास्थ्य सेवा विभाग की दशा और दिशा को देखते हुए कहा जा सकता है कि उपरोक्त मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई होगी और न ही होगी क्योंकि जब मन ही धन के लिए बीमार है तो भारतीय रेल और रेल सेवा कैसे स्वस्थ्य रह सकता है! लेकिन भारतीय रेल और रेल सेवा को स्वस्थ्य रखने हेतु भारतीय रेल स्वास्थ्य सेवा का पोस्टमार्टम आवश्यक प्रतीत होता है और पोस्टमार्टम जारी रहेगा..





कोविड जैसी आपदा में करोड़ों की खरीद और फिर ऑडिट में गड़बड़ी—यह बेहद गंभीर मामला है। रिपोर्ट आने के बाद भी अगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो सिस्टम पर सवाल उठना लाज़मी है।
सुधार सिर्फ कागज़ों से नहीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई से होगा। जनता जवाब चाहती है।
ऑडिट में भ्रष्टाचार सामने आने के बाद भी चुप्पी शर्मनाक है।
अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो यह साफ है कि सिस्टम खुद बीमारी बन चुका है।