पटना: पूर्व मध्य रेलवे का “कार्मिक”विभाग जिसका मूल उद्देश्य है रेलकर्मियों का कल्याण करना, लेकिन भारतीय रेल में चल रहा “लूट चले हम” अभियान ने कार्मिक विभाग की दशा और दिशा ऐसी कर दी है कि कार्मिक विभाग कर्मियों के कल्याण करने के बदले परेशान कर रहा है और परेशान इसलिए कर रहा है क्योंकि कार्मिक विभाग का मूल मंत्र हो गया पहले भुगतान तब होगा निदान चाहें आप होते रहे परेशान। कहते हैं ना PAY &USE, ठीक वही हाल हो गया है पूर्व मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग का जहां बिना भुगतान किए बिना आपके किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है।
कार्मिक विभाग के इस “अकर्मण्यता” के आसान शिकार बनें है GDCE के माध्यम से चयनित 79 JE (TMC) के लिए चयनित 79 अभ्यर्थी जो अभी प्रयागराज में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
IREC Volume 02 Rule 1685 के अनुसार GDCE प्रशिक्षण के संबंध में उपलब्ध नियमों एवं रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या 48/06 में यह उल्लेखित है कि प्रशिक्षण हेतु भेजे गए रेलवे कर्मचारी मूल प्रशिक्षण स्थल की यात्रा तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वापसी यात्रा के लिए TA/DA के पात्र होते हैं।GDCE से चयनित कर्मचारियों की प्रारंभिक प्रशिक्षण अवधि (ZRTI Training एवं IRTMTC Training दोनों सत्रों सहित) प्रथम 180 दिनों की प्रशिक्षण अवधि का हिस्सा है। अतः उक्त दोनों प्रशिक्षण सत्रों के लिए TA का भुगतान नियमानुसार देय है। इसलिए सभी पात्र कर्मचारियों को प्रशिक्षण अवधि के लिए TA/DA का भुगतान किया जाना चाहिए।
इसके बावजूद प्लांट डिपो, दीनदयाल उपाध्याय (मुगलसराय) में संबंधित अधिकारियों द्वारा विभिन्न नियमों, पत्रों एवं प्रस्तुत प्रमाणों को अनदेखी करते हुए TA (यात्रा भत्ता विपत्र) के भुगतान में अनावश्यक विलम्ब एवं आना-कानी की जा रही है। पीड़ित कर्मचारियों द्वारा नियमों एवं दस्तावेजों को प्रस्तुत किए जाने के बाद भी कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाना कार्मिक विभाग की कुत्सित मंशा को परिलक्षित करता है जो कि व्यवस्था के लिए शर्मशार करने वाली है लेकिन कहते हैं ना कि निर्लज्जों को शर्म नहीं आती और आएगी भी कैसे?
सोचने वाली बात यह है कि जब GDCE के माध्यम से चयनित प्रशिक्षुओं का चयन रेलवे की नियमित प्रकिया एवं प्रावधिक परीक्षाओं के आधार पर हुआ है और उनके नियुक्ति पत्र में रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या 48/06 का स्पष्ट उल्लेख है,तब प्रशिक्षण अवधि के दौरान देय टी ए का भुगतान नहीं करना उचित प्रतीत नहीं होता। नियुक्ति पत्र में उल्लिखित शर्तें एवं रेलवे बोर्ड के निर्देश संबंधित कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। यदि रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या 48/06 तथा IREC Volume 02 के नियम 1685 के अनुसार प्रथम 180 दिनों के प्रशिक्षण हेतु टीए देय है, तो उसका भुगतान किया जाना न्यायसंगत एवं नियम सम्मत होगा। किसी स्थानीय स्तर की व्याख्या के आधार पर वैध दावे को अस्वीकार करना उचित नहीं माना जा सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि कार्मिक विभाग के महान् प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी जो स्वस्थ व्यवस्था के लिए अभी तक बीमारी साबित हुए हैं,79 प्रशिक्षु कर्मचारियों को उनका वाजिब हक कब तक सुनिश्चित कराने की पहल करते हैं क्योंकि देरी से असंतोष बढ़ता है।
सभी प्रशिक्षुओं को शीघ्र ही यात्रा भत्ता विपत्र का भुगतान सुनिश्चित हो,इसी शुभकामनाओं के साथ..
सफ़र जारी है.





