SER : चक्रधरपुर मंडल के वाणिज्य विभाग में ट्रांसफर/पोस्टिंग बना “कमाऊ उधोग”! नियमों की बलि देकर ठेकेदारों के हवाले सिस्टम!

SER : चक्रधरपुर मंडल के वाणिज्य विभाग में ट्रांसफर/पोस्टिंग बना “कमाऊ उधोग”! नियमों की बलि देकर ठेकेदारों के हवाले सिस्टम!
सीनियर डीसीएम/सीकेपी और सीपीएस/टाटा (फाइल फोटो)
  • सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने निहितार्थ को चरितार्थ करने हेतु रेलवे बोर्ड के रोटेशन पॉलिसी की सुचिता का भी नहीं रखा ध्यान
  • चक्रधरपुर डिवीजन में अपने कार्यकाल में कंट्रोल आर्डर से धड़ल्ले से जारी किये स्थानांतरण-पदस्थापना के कई आदेश, गंभीर सवाल 
  • टाटानगर से हटाये गये अमित चौधरी को वापस स्थापित करने के लिए Sr DCM आदित्य चौधरी ने तमाम मापदंडों को ताक पर रखा 

पटना/चक्रधरपुर. दक्षिण पूर्व रेलवे का चक्रधरपुर मंडल इन दिनों रेल पटल पर चर्चा के केंद्र में नंबर वन पर हैं और चर्चा में नंबर वन होने का कारण कोई विशेष उपलब्धि नहीं है बल्कि चक्रधरपुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी के कारनामों ने चक्रधरपुर मंडल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

एसीएम एके सिंह ” सुपर पावर” की भूमिका में!

चक्रधरपुर मंडल के सहायक वाणिज्य प्रबंधक (एसीएम) (गुड्स) पूर्व में टाटानगर स्टेशन पर वाणिज्य निरीक्षक के पद पर आसीन थे और तब टाटानगर स्टेशन के माल पर्यवेक्षक श्रीमान अमित चौधरी थे और इन दोनों की यारी सिस्टम पर भारी थी और इन दोनों की जुगलबंदी ने लूट का ऐसा ग़दर मचाया था कि आज़ भी चर्चा में हैं, और उसका जीता जागता प्रमाण है अमित चौधरी का “शीशमहल”!

वाणिज्य कर्मी ही कहते हैं कि टाटानगर में किसी भी रेल कर्मचारी या अधिकारी का ऐसा मकान नहीं होगा जैसा अमित चौधरी का शीशमहल है, खैर यह तो सतर्कता विभाग के लिए जांच का विषय है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर क्या कारण है कि श्रीमान अमित चौधरी अपने सेवाकाल के 28 साल में से 26 साल टाटानगर स्टेशन पर ही बिताया है.

यह भी पढ़ें : SER: “दैत्य” की भूमिका में हैं CKP के Sr.DCM आदित्य चौधरी !

सवाल गंभीर है क्योंकि जब लीज पार्सल भान में ओवरलोडिंग का मामला हो या लोडिंग/अनलोडिंग के निविदा में वर्णित शर्तों का उल्लंघन का मामला उजागर होने के बाद श्रीमान अमित चौधरी को टाटानगर मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक से हटाकर मुख्य गुड्स पर्यवेक्षक बना देना कहां तक तर्कसंगत एवं न्यायसंगत है? और इसका स्पष्टीकरण तो चक्रधरपुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी को देना ही होगा जिन्होंने रोटेशन पॉलिसी की व्यवस्था को ध्वस्त कर ट्रांसफर/पोस्टिंग को एक “कमाऊ उधोग ” बना दिया है।

यह भी पढ़ें : SER: रेलवे नियमों का “मर्डर”, ठेकेदार का “आदर”, TATANAGAR पार्सल में ‘चौधरी बंधु’ का एक और कारनामा उजागर !

अमित चौधरी को टाटानगर स्टेशन का मुख्य गुड्स पर्यवेक्षक नियुक्त करना तो वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी के कारनामों की सिर्फ एक बानगी है इन्होंने अपनी निहितार्थ को चरितार्थ करने हेतु रेलवे बोर्ड के रोटेशन पॉलिसी की सुचिता का भी ध्यान रखना उचित नहीं समझा है तभी तो इनके कार्यकाल में हुए स्थानांतरण एवं पदस्थापना आदेश पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानांतरण सूचियों में रोटेशन नीति का उल्लंघन अनवरत जारी

चक्रधरपुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी द्वारा जारी दो तबादला आदेश गंभीर सवाल खड़े करता है।
07 फरवरी 2025 का आदेश संख्या: SER)P – CKP/COMML./Trf./Posting/Staff/150/2025, इस आदेश के माध्यम से 37 कर्मचारियों का सामुहिक स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था, विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस सूची में कुछ ऐसे कर्मियों के नाम भी शामिल थे, जिनका हाल ही स्थानांतरण हुआ था और रोटेशन अवधि पूरी नहीं हुई थी ।

तबादला आदेश .. 1

तबादला आदेश ..2

तबादला आदेश ..3 

16 अप्रैल 2025 का आदेश संख्या: SER/P- CKP/Comml./Trf.& Posting/168/2025 भी सवालों के घेरे में है क्योंकि दक्षिण पूर्व रेलवे के सतर्कता विभाग के इनपुट्स और प्रशासनिक समीक्षा उपरांत 30 वाणिज्य कर्मियों के स्थानांतरण की सूची जारी हुई थी लेकिन इस आदेश के क्रियान्वयन के मात्र तीन महीने बाद 11 अगस्त 2025 को जारी नए आदेश में कुछ निर्णयों को बदल दिया गया, इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? श्रीमान आदित्य चौधरी के कारनामों को देखते हुए कहा जा सकता है कि इन्होंने स्थानांतरण एवं पदस्थापना को “अन्य आय” का एक प्रमुख जरिया बना लिया है।

यह भी पढ़ें :  SER : चक्रधरपुर मंडल के वाणिज्य विभाग में ‘चौधरीराज’, रेलवे बोर्ड के नियम ठेंगे पर, ट्रांसफर-पोस्टिंग बना ‘उद्योग’!

लोडिंग/अनलोडिंग निविदा शर्तों का नहीं हो रहा अनुपालन!

आपने देखा और जाना है कि चक्रधरपुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी एवं टाटानगर स्टेशन के पूर्व मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक की जुगलजोडी ने लोडिंग/अनलोडिंग के लिए हुई निविदा में निविदा में वर्णित शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया और निविदा में वर्णित शर्तों के उल्लंघन के बाबजूद संवेदक को भुगतान कर रेलवे राजस्व को चपत लगाया गया है।

यह भी पढ़ें : SER : प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक की “अंधेरगर्दी”! चक्रधरपुर मंडल में चौधरी बंधु की “चौधराहट” अनवरत जारी! अमित चौधरी को दिया इनाम!

टाटानगर स्टेशन पर पार्सल में न ही बायोमेट्रिक मशीन लगाई गई और न ही हाइड्रोलिक सिस्टम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई फिर भी यदि संवेदक को भुगतान किया जा रहा है तो श्रीमान आदित्य चौधरी की रेलवे के प्रति निष्ठा पर सवाल उठना स्वाभाविक है और ऐसा सिर्फ टाटानगर स्टेशन पर ही नहीं हुआ है बल्कि चक्रधरपुर स्टेशन एवं राउरकेला स्टेशन के लिए हुए निविदा में भी वर्णित शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं हुआ है, टाटानगर स्टेशन की ही तरह न तो बायोमेट्रिक मशीन की व्यवस्था की गई है और ना ही हाइड्रोलिक सिस्टम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है तब फिर क्या कारण है कि संवेदक को भुगतान किया जा रहा है।

सवाल गंभीर है क्योंकि समस्या गंभीर है लेकिन इन सवालों से चक्रधरपुर मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी को कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक आदित्य चौधरी के “सेवा” से प्रसन्न प्रतीत होते हैं तभी तो अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।

भले ही दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी द्वारा प्रदत सेवा से मस्त हो लेकिन चक्रधरपुर मंडल के वाणिज्य विभाग की व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है जो कि व्यवस्था के लिए शर्मशार करने वाली है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक महोदय कब और क्या कार्रवाई करते हैं क्योंकि वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान आदित्य चौधरी अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा कर चुके हैं फिर भी स्थानांतरण आदेश जारी नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

सफ़र जारी है…

Leave a Comment

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *