ECR: “महाभ्रष्ट” एवं “मति भ्रष्ट”,”धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक के सानिध्य में दागी एवं निष्कासित “IRAS” अधिकारी का उद्वोधन!

ECR: “महाभ्रष्ट” एवं “मति भ्रष्ट”,”धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक के सानिध्य में दागी एवं निष्कासित “IRAS” अधिकारी का उद्वोधन!

पटना: अधिकारियों का सम्मेलन एक सामान्य घटना है जहां पर देश दुनिया के बदलते परिदृश्य में अधिकारियों को अद्यतन करने हेतु समय समय पर सम्मेलनों का आयोजन किया जाता रहा है,पर, यही सामान्य घटना पूर्व मध्य रेल में विशिष्ट हो जाती है और यह भी तब, जबकि विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता के रूप में किसी दागदार भूतपूर्व IRAS अधिकारी को मंच दिया जाता है और अधिकारी के इस दागी पक्ष को गौण कर महाप्रबंधक, पूर्व मध्य रेल द्वारा इस सम्मेलन की अध्यक्षता की जाती है।

आज दिनांक 20.05.2026 को पूर्व मध्य रेल के वित्त प्रमुख के द्वारा वरीय मंडल वित्त प्रबंधकों का एक सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता इसके महाप्रबंधक महोदय के द्वारा किया गया है एवं इसके विशिष्ट अतिथि वही दागदार IRAS अधिकारी हैं जिसे CVC ने वर्ष 2018 में IRFC के MD के पद से उनपर लगे गंभीर वित्तीय अनियमितता के ठोस आरोपों के कारण Removal का आदेश दिया था।
इसका विवरण नीचे दिए लिंक में है.

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अब प्रश्न यह उठता है कि माननीय विशिष्ट अतिथि के दागदार इतिहास की जानकारी क्या महाप्रबंधक महोदय को नहीं थी या उन्हें इस बात की जानकारी प्रमुख वित्त अधिकारी के द्वारा छुपाई गई है या यह सब जानते हुए भी महाप्रबंधक एवं प्रमुख वित्त अधिकारी दोनों की इच्छा से उन निष्कासित अधिकारी को विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मानित किया जा रहा है!

इसमे पहले और दूसरे सम्भावना की प्रबलता नगण्य हो सकती है क्योंकि माननीय महाप्रबंधक महोदय भी लगभग इसी वर्ष के आसपास के अधिकारी है और विशिष्ट अतिथि के दागदार इतिहास के जानकारी न होना सम्भावना से परे है!

पर ECR में कुछ भी सम्भव है क्योंकि भ्रष्टाचार ही ECR का संस्कार है!

इस सम्मेलन में भ्रष्टाचार के एक दो कोण परिलक्षित होने की संभावना प्रबल होते दिखती है। माननीय विशिष्ट अतिथि Green Financing पर व्याख्यान देने को आए है या बुलाया गया है या स्वयं अपने प्रयास से अपनी संस्था के व्यापारिक प्रमोशन हेतु ECR के महाप्रबंधक के मिलीभगत से वित्त प्रमुख के ऊपर दबाब देकर करवायें हैं- यह शोध का विषय हो सकता है क्योंकि यह सार्वजनिक है कि हाल फ़िलहाल तक महाप्रबंधक एवं वित्त प्रमुख के बीच 36 का आंकड़ा रहा है जबकि वित्त प्रमुख के अनिच्छा के विरुद्ध जाकर महाप्रबंधक ने निर्माण विभाग में स्थानांतरण का शतक लगाया था।
पाठकों को ज्ञात हो कि विशिष्ट अतिथि “Green Financing” के ऊपर एक वित्त सलाहकार कंपनी चलाते हैं जैसा कि LinkedIn के उनके प्रोफाइल में वर्णित है और इसी विषय पर आज का सम्मेलन बुलाया गया है।

अब इस आयोजन से कुछ प्रश्नों का जन्म होता है..

1.क्या इसका आयोजन रेलवे के द्वारा किया जा रहा है क्योंकि,आमंत्रण पत्र में भारतीय रेल के प्रतीक चिन्ह का प्रयोग किया है तथा इसे प्रधान वित्त सलाहकार, पूर्व मध्य रेल, हाजीपुर द्वारा प्रकाशित कराया गया है।
2 ऐसी स्थिति में विशिष्ट अतिथि को बुलाने का खर्च क्या रेलवे के द्वारा वहन किया जा रहा है तो किसके के वित्तीय शक्ति के अन्तर्गत उनका भुगतान किया जा रहा है?
3. या, फिर वित्त विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अनैतिक चंदा की उगाही की गई है? जैसी कि ECR की परम्परा है जिसमें बेटे बेटियों के विवाह के लिए अधिकारियों , पर्यवेक्षको से चंदा लिया जाता रहा है।
4.क्या किसी दागदार निष्कासित अधिकारी को विशिष्ट अतिथि के रूप में बुलाया जा सकता है?
5. क्या विशिष्ट अतिथि के द्वारा अपने व्यवसायिक हित ( अपनी संस्था के प्रमोशन) हेतु रेलवे प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकता है?6. यदि यह कार्यक्रम रेलवे के द्वारा आयोजित है तो विशिष्ट अतिथि को इस कार्यक्रम हेतु रेलवे के द्वारा भुगतान की स्थिति में क्या इसे प्रशासनिक स्वीकृती प्रदान की गई है ?

कहते हैं कि बिना Eating कोई meeting संपन्न नहीं होती है। अतः इस एक दिवसीय आयोजन के उपरांत राजधानी पटना के प्रमुख पाँच सितारा होटल में रात्री भोज का आयोजन किया गया है जिसका आमंत्रण पत्र लेखा विभाग , पूर्व मध्य रेल के द्वारा जारी किया गया है।
इस निमंत्रण पत्र में पूर्व मध्य रेल और Indian Railway Accounts Services के Emblems का प्रयोग किया है।
इन आधिकारिक Emblem का प्रयोग यह दर्शाता है कि इस रात्रिभोज का आयोजन पूर्व मध्य रैल और Indian Railway Accounts Services के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है।

अब प्रश्न यह है कि क्या रेलवे ऐसे भोज का आयोजन कर सकती है या नहीं? यदि हाँ, किस योजना शीर्ष मद से इसका भुगतान किया जाएगा?
और यदि इसका खर्च Indian Railway Accounts Services के द्वारा किया जा रहा है तो फिर पूर्व मध्य रेल के Emblem का निमंत्रण पत्र में औचित्य क्या है?

क्या, रेलवे के Emblem का उपयोग कोई संगठन अपने संस्थान के निजी कार्यक्रम के लिए किया जा सकता है?
उसका उत्तर तो रेलवे का सामन्य प्रशासन विभाग ही दे सकता है!

यदि नहीं तो रेलवे का धृतराष्ट्र सतर्कता विभाग दिन के उजाले में भी इसके तकनीकी एवं वैधानिक पक्ष की जाँच कर संबधित संगठन के कर्ता- धर्ता के ऊपर कारवाई करेगा?
अब एक अंतिम प्रश्न- इस पाँच सितारा भोज के लिए किससे कितना चंदा की उगाही की गई है क्योंकि चंदा उगाही से मरा होगा ठेकेदार या कर्मचारी और स्वाद लेंगे भ्रष्ट अधिकारी..

स्वादिष्ट भोजन छाजन हेतु Railwellwishers की ओर से विशिष्ट शुभकामना ज्ञापन..
सफ़र जारी है…

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