ECR: “अमरेंद्र” के संरक्षण में भ्रष्टाचार की सुपरफास्ट रफ्तार, स्थानांतरण एवं पदस्थापना बना कमाऊ उद्योग!

ECR: “अमरेंद्र” के संरक्षण में भ्रष्टाचार की सुपरफास्ट रफ्तार, स्थानांतरण एवं पदस्थापना बना कमाऊ उद्योग!
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दानापुर: पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल का “टीआरएस विभाग” जिसके उपर ट्रेन परिचालन के रफ्तार की कमान है, लेकिन पूर्व मध्य रेलवे के अपर महाप्रबंधक(AGM) श्रीमान अमरेंद्र कुमार साहब और शागिर्द कौशलेंद्र कुमार के कारनामों से व्यवस्था परेशान हैं।

इस बात से सभी अवगत हैं कि पूर्व मध्य रेलवे के अपर महाप्रबंधक (AGM) श्रीमान अमरेंद्र कुमार साहब पूर्व में CELE के पद पर विराजमान थे, ने अपने निहितार्थ टीआरएस विभाग की व्यवस्था को ध्वस्त ही नहीं बल्कि तहस नहस कर भ्रष्टाचार की ऐसी गाथा लिखी ,जिसकी चर्चा आज़ भी होती है ।
अमरेंद्र और कौशलेंद्र की यारी ने टीआरएस विभाग का कोई कोना नहीं छोड़ा, जहां से धनादोहण नहीं किया जा सके और अपने निहितार्थ को चरितार्थ करने में स्थानांतरण एवं पदस्थापना को एक “कमाऊ उद्योग” बना दिया, जो आज भी अनवरत बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार से गतिमान है और कर्मयोगी कर्मचारी परेशान हैं।

कोई भी उद्योग तभी सफल हो सकता है जब सभी का सहयोग हो और अमरेंद्र कुमार साहब के सरंक्षण में चल रहे इस कमाऊ उद्योग में कार्मिक विभाग, एवं लेखा विभाग के साथ साथ कर्मचारी यूनियन की भूमिका भी शक के घेरे में है। स्थानांतरण एवं पदस्थापना किस तरह से एक कमाऊ उद्योग बन गया है इसकी पुष्टि के लिए दानापुर मंडल का आदेश संख्या Transfer/Posting Order: DNRD/11871/46988/31636/PO 11359 Dated 27.08.2026 का अवलोकन एवं विश्लेषण आवश्यक है।

उपरोक्त वर्णित स्थानांतरण एवं पदस्थापना आदेश में क्रम संख्या 14 पर अंकित संजीत कुमार का स्थानांतरण पिछले छः (06) साल में छः (06) बार हुआ, किऊल – राजगीर – किऊल – राजगीर – झाझा – तिलैया । क्रम संख्या सात (07) पर अंकित श्रीमान रंजीत कुमार भारती का स्थानांतरण छः (06) वर्ष में पांच बार हुआ,झाझा – तिलैया – राजगीर – झाझा – तिलैया। क्रम संख्या छः (06) पर अंकित श्रीमान सोहन लाल का स्थानांतरण छः (06) वर्ष में पांच (05) बार हुआ,झाझा – तिलैया – राजगीर – झाझा – तिलैया ‌किया गया है।

उपरोक्त वर्णित स्थानांतरण आदेश का अवलोकन एवं विश्लेषण परिलक्षित करता है कि टीआरएस विभाग में स्थानांतरण एवं पदस्थापना एक “कमाऊ उद्योग” बन गया है और सबसे बड़ी बात यह है कि रेलवे के राजस्व को भी चपत लगाया जा रहा है।

दानापुर मंडल में टीआरएस विभाग का “चर्चित चोर” और “कामचोर” , कामचोर इसलिए क्योंकि इसने आज़ तक कितना गाड़ी चलाया है, सब जानते हैं, श्रीमान कौशलेंद्र कुमार/ राजगीर, राजेश नंदन सहाय/दानापुर, राजेश प्रसाद/दानापुर, जयकांत कुमार/तिलैया,दीपक कुमार/किऊल,मतलब की टीआरएस विभाग के पांच कामचोर रत्न मिलकर टीआरएस विभाग के स्थानांतरण एवं पदस्थापना को एक कमाऊ उद्योग में तब्दील कर दिया है।

दानापुर मंडल के टीआरएस विभाग में ऐसे कम से कम पांच सौ (500) रेलकर्मी होंगे , जिन्हें नियुक्ति की तिथि या दानापुर मंडल में योगदान देने की तिथि से पंद्रह (15) से तीस (30) वर्ष हो गया है, लेकिन आज़ तक स्थानांतरण नहीं हुआ है और क्यूं नहीं हुआ है, और यही तो असली खेल है मनचाहा उगाही का। इनमें से कुछ तो ऐसे भी रेलकर्मी है, जिन्हें स्थानांतरण से पूर्व ही बता दिया जाता है कि तुम्हारा स्थानांतरण होने वाला है, संबंधित अधिकारी के पत्नी को या नामित कलेक्शन एजेंट (कामचोर लोको पायलट) को तय की गई रिश्वत/परितोष राशि…. लाख रुपए का भुगतान करें और वह स्थानांतरण होने के डर से तत्काल भुगतान कर एक ही स्थान पर विराजमान रहते हैं, तभी तो वह नियुक्ति के तिथि से सेवानिवृत्त के तिथि तक एक ही स्थान पर विराजमान रहते हैं,कभी स्थानांतरण नहीं होता है लेकिन इसके लिए नियमित भुगतान होते रहता है।

महाप्रबंधक महोदय से अपेक्षा ।

01 सितम्बर को पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के नवनियुक्त महाप्रबंधक महोदय श्रीमान डिंपी गर्ग ने अपना पदभार संभाल लिया है और सभी विभाग प्रमुखों एवं मंडल रेल प्रबंधकों के साथ पहली बैठक में ही पारदर्शिता के साथ कोई समझौता नहीं करने की बात कही है तो उम्मीद की जा सकती है कि टीआरएस की व्यवस्था जिसका बेड़ा ग़र्क हो चुका है, डिंपी गर्ग साहब स्वस्थ पहल से टीआरएस की ध्वस्त व्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे।
उम्मीदें हैं तो जिंदगी है!

सफ़र जारी है…

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