रेलवे दावा न्यायाधिकरण पटना का 2016 -2017 के बाद नहीं हुआ ऑडिट! आखिर क्या है माजरा?

रेलवे दावा न्यायाधिकरण पटना का 2016 -2017 के बाद नहीं हुआ ऑडिट! आखिर क्या है माजरा?

पटना: प्रत्येक रेल के जोन में रेल यात्रियों एवं रेल का उपयोग करने वाले व्यवसायियों के दावे के निपटारे के लिए स्थापित किया गया रेलवे दावा न्यायाधिकरण एक स्वतंत्र इकाई है । इसका अलग बजट होता है और इसकी लेखा परीक्षा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के स्थानीय कार्यालय द्वारा किया जाता है। रेलवे दावा न्यायाधिकरण में कार्य करने वाले अधिकतर रेल के कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर कार्य करते हैं।

रेलवे दावा न्यायाधिकरण, पटना, जिसका लेखा परीक्षा महानिदेशक लेखा परीक्षा पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर द्वारा किया जाता है। मंडल लेखा परीक्षा, दानापुर द्वारा वर्ष 2016 -2017 में लेखा परीक्षण के दौरान लाखों करोड़ों का लाश मुआवजा घोटाला उजागर हुआ।
रेड फ्लैग लगने के बाद भी रेलवे दावा न्यायाधिकरण पटना का लेखा परीक्षा नहीं कराया जाना महानिदेशक लेखा परीक्षा, पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
वर्ष 2016-2017 के बाद से रेलवे दावा न्यायाधिकरण, पटना का लेखा परीक्षा नहीं कराना महानिदेशक लेखा परीक्षा ,पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर, राजकुमार अग्रवाल पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है, क्योंकि जब 2016- 2017 में लेखा परीक्षा के दौरान लाखों करोड़ों का लाश मुआवजा घोटाला उजागर हुआ था तब राजकुमार अग्रवाल प्रधान निदेशक लेखा परीक्षा पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के पद पर कार्यरत थे और उनके नेतृत्व में ही मामला उजागर हुआ था और अब पदोन्नति पाकर महानिदेशक लेखा परीक्षा पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के पद पर आसीन है लेकिन रेलवे दावा न्यायाधिकरण पटना के ऑडिट के प्रति उदासीन है और आखिर इस उदासीनता के पीछे क्या कारण है क्योंकि बिना किसी कारण के तो ऐसा नहीं हो सकता है, क्योंकि लाश मुआवजा घोटाला उजागर होने के बाद भी कोई विभागीय कार्रवाई नहीं करना क्या परिलक्षित करता है, समझा जा सकता है।

रेलवे लेखा परीक्षण सामान्य विभागीय प्रकिया है, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक मुख्यालय के अधीन महानिदेशक लेखा परीक्षा के नेतृत्व में सभी ज़ोनल मुख्यालयों में अलग से कार्यालय रखा जाता है और यहीं की टीम अपने अधीनस्थ सभी मंडलों की लेखा जांच कर इसकी रिपोर्ट विभाग को सौंपती है तब वर्ष 2016-2017 के बाद रेलवे दावा न्यायाधिकरण, पटना का ऑडिट नहीं कराया जाना महानिदेशक लेखा परीक्षा राजकुमार अग्रवाल की निष्ठा पर सवाल तो उत्पन्न करता ही है, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा अभी तक संज्ञान नहीं लिया जाना व्यवस्था पर भी सवाल उठता है।
मामला तो गंभीर है और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को भी गंभीरता का दर्शन कराना आवश्यक प्रतीत होता है।

Show 2 Comments

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *