हाजीपुर: राजनीति क्या है राज करने की नीति, और जब राज करने वाले नीति को प्रभावित करने लगे तो व्यवस्था कैसे प्रभावित होता है इसका दर्शन भारतीय रेल के पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर में मुफ्त में कराया जा रहा है। जब 03 और 04 मार्च को सीबीआई लखनऊ की टीम ने पूर्व मध्य रेलवे के दीनदयाल उपाध्याय मंडल में दो अधिकारियों समेत 26 आरोपियों को जेल भेजकर अपनी धमक से धमाका किया था तो पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाप्रबंधक महोदय ने 07 मार्च को एकमुश्त 120 अधिकारियों को इधर-उधर तबादला करके प्रशासन को प्रभावी दिखाने का प्रयास किया था।

120 अधिकारियों का एकमुश्त स्थानांतरण चर्चा का विषय तो अवश्य ही बन गया लेकिन व्यवस्था के प्रति आशंकाएं बरकरार रही और आशंकाओं के पीछे पूर्व मध्य रेलवे का इतिहास रहा है जहां अधिकांश अधिकारी अपने राजनैतिक संरक्षकों के भरोसे भारत सरकार के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेल मंत्री के महात्वाकांक्षी योजना “लूट सको तो लूट, काहे कि लूटने की है छूट”को अंजाम देने में दिन रात एक किए हुए है।
जहां 07 मार्च 2025 को 120 अधिकारियों के एकमुश्त स्थानांतरण से व्यवस्था से एक उम्मीद की किरण दिखाई पड़ी थी, वहीं 13 मार्च को रेलवे बोर्ड के एक आदेश ने शासन एवं प्रशासन की मंशा को स्पष्ट कर दिया है कि लूट जारी रहनी चाहिये।13 मार्च के रेलवे बोर्ड आदेश संख्या E/ O/3.2022/ TR/16 के आदेश संख्या के तहत दानापुर मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) आधार राज़ को एक वर्ष का एक्सटेंशन देकर शासन एवं प्रशासन ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है।
ठीक है मान लिया जाए कि एक्सटेंशन देने का प्रावधान है और मिलना भी चाहिए लेकिन इसके पीछे की मंशा भी स्पष्ट होना चाहिए। आखिर क्या कारण है कि जो अधिकारी अभी तक के सेवाकाल में सिर्फ पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर, दीनदयाल उपाध्याय मंडल, धनबाद मंडल और हाजीपुर मुख्यालय में ही पदस्थापित रहा हो, भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS)की व्यवस्था पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है, ऐसा प्रतीत होता है कि दानापुर मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) पूर्व मध्य रेलवे यातायात सेवा (ECRTS) कैडर के अधिकारी है।
खैर यह तो शासन एवं प्रशासन के लिए सोचने का विषय है कि वो पूर्व मध्य रेलवे को किस दिशा में ले जाना चाहते है क्योंकि पूर्व मध्य रेलवे की वर्तमान दिशा और दशा दुर्दशा का ही दर्शन करा रहा है।
विदित है कि दानापुर मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) आधार राज़, दानापुर मंडल में वरीय मंडल परिचालन प्रबंधक एवं वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक के पदों पर आसीन रहते हुए अपने उद्देश्यों की पूर्ति में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है और अपने उद्देश्यों की पूर्ति में नीतियों को ताक पर रखकर अपने प्रभाव का दर्शन कराया है जो कि रेलवे की व्यवस्था के लिए सुखद तो नहीं ही है स्वीकार्य भी नहीं है।

दानापुर मंडल में वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक रहते हुए दानापुर रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर में ऑटो स्टैंड से बिना किसी निविदा के पार्किंग चार्ज की वसूली इनकी उपलब्धियों में से एक है। विदित है कि दानापुर रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर में बने ऑटो स्टैंड से पार्किंग चार्ज की वसूली की शुरुआत 06.02.2021 से हुई है और 06.02.2021 से लेकर 26.012023 तक 18 लाख 55 हजार,002 रूपए का राजस्व रेलवे को प्राप्त हुआ है , वहीं 27.012023 से लेकर 26.01.2026 तक 2364.00sqm के ऑटो पार्किंग से 63 लाख 22 हजार 436 रुपए की राजस्व प्राप्ति हुई है,तब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि 26.01.2021 से पूर्व ऑटो स्टैंड से पार्किंग चार्ज की वसूली किसके मर्जी से हुआ और वसूली गई रकम में कौन कौन भागीदार रहे जांच का विषय है।
31 जनवरी 2025 को दानापुर मंडल के शताब्दी वर्ष समारोह जो कि जगजीवन स्टेडियम में आयोजित किया गया था और पानी के तरह पैसा बहाया गया था और इस कार्यक्रम में अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) आधार राज़ का ही जलवा का दर्शन कराया गया था लेकिन इस कार्यक्रम में हुआ खर्च जांच का विषय है और सोचने का विषय है क्योंकि आज़ भी दानापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म को छोड़कर बाकी पांचों प्लेटफार्म पर महिलाओं के लिए यूरिनल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होना और शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया जाना किस उद्देश्य की पूर्ति करता है समझा जा सकता है।
बात यहीं समाप्त नहीं होता है, सोचने का विषय है कि दानापुर मंडल में अपर मंडल रेल प्रबंधक का दो पद है एक परिचालन और एक इन्फ्रा का, भारतीय रेल के सभी मंडलों में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित है कि अपर मंडल रेल प्रबंधक (इन्फ्रा) अभियंत्रण विभाग का नियंत्रण करते है और अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) परिचालन एवं वाणिज्य विभाग का नियंत्रण करते है लेकिन भारतीय रेल का दानापुर मंडल एक ऐसा अनोखा और अनुपम मंडल है जहां अपर रेल प्रबंधक (परिचालन) अभियंत्रण का नियंत्रण करते है और अपर मंडल रेल प्रबंधक ( इन्फ्रा) वाणिज्य विभाग का नियंत्रण करते है तब तो आसानी से समझा जा सकता है कि इसके पीछे कारण क्या है! कारण बताने की जरूरत क्या है यह तो सभी जानते है कि अभियंत्रण विभाग का वजट हर विभाग से ज्यादा है और जब वजट सभी विभागों से ज्यादा है तभी तो जलवा है लेकिन कर्मियों का कहना है कि भले ही जलवा हो लेकिन कार्यशैली ऐसा कि सिस्टम को मार गया लकवा!
खैर यह तो टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेल मंत्री महोदय को सोचना है कि लकवाग्रस्त सिस्टम को कैसे ठीक करते है!





