Patna. पूर्व मध्य रेलवे का “रेलवे सुरक्षा बल” विभाग जिस पर भारतीय रेल के सम्पत्ति एवं यात्रियों की सुरक्षा की महती जिम्मेदारी है लेकिन रेलवे सुरक्षा बल विभाग की वर्तमान दशा एवं दिशा ऐसा दर्शाता है कि रेलवे सुरक्षा बल विभाग “महतो जी का दुकान”बन कर रह गया है!
“महतो जी का दुकान” इसलिए क्योंकि जिस विभाग का मूल मंत्र है “यशो लभस्व” कर्म ही पूजा है लेकिन खेल दूजा है क्योंकि मार्च महीने में हुए एकमुश्त तबादला में रेलवे बोर्ड के आदेशों को दरकिनार करते हुए ऐसा स्थानांतरण आदेश जारी किया गया जिसे प्रथमदृष्टया देखते ही सभी को समझ आ गया कि जिसने जैसा दिया दाम वैसा ही पोस्ट का मिला ईनाम!
स्थानांतरण आदेश तो ऐसा जारी किया गया जिसमें विभागीय आदेशों की तो अनदेखी हुई ही लोक लाज लज्जा का ख्याल नहीं रखा गया, अजय शंकर पटेल की लगातार पांचवीं पदस्थापना आरपीएफ पोस्ट पटना में हुई तो दानापुर में पी के वर्णवाल की पदस्थापना एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर हो गई।
ऐसे में सोचा जा सकता है कि जब पदस्थापना में ही अनियमितता होगी तो अराजकता का दर्शन स्वाभाविक है और इसी अराजकता का दर्शन दानापुर मंडल के महत्वपूर्ण स्टेशनों यथा पटना जंक्शन, दानापुर जंक्शन, पाटलिपुत्र स्टेशन आरा जंक्शन, बक्सर स्टेशन समेत अन्य स्टेशनों पर देखने को मिल रहा है,यह सभी को दिख रहा है लेकिन उनको नहीं दिख रहा है जिन्हें दिखना चाहिए क्योंकि लगभग सभी महत्वपूर्ण स्टेशन सीसीटीवी के निगरानी में है।
पटना जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या 02 से लेकर प्लेटफार्म संख्या 10 तक अवैध वेंडरों का कब्जा है 14 तारीख दिन शनिवार को दो महिला वेंडरों में लडाई इतनी बढ़ गई कि चाकूबाजी तक बात पहुंच गई और आरपीएफ का सिपाही वीडियो बनाता रहा और कर भी क्या सकता है क्योंकि आदेश का पालन ही तो करना हैं क्योंकि नौकरी करना है।
दानापुर स्टेशन के बाहरी परिसर उत्तर एवं दक्षिण तरफ अवैध दुकानों का संचालन ऐसा अहसास कराता है कि यहां उनका ही शासन है और आरपीएफ प्रशासन तो सिर्फ वसूली के लिए ही है।आरा स्टेशन के उत्तर तरफ बाहरी परिसर में रात के आठ बजते ही ठेला एवं खोमचे वालों की ऐसी भीड़भाड़ होती है कि नया आदमी कन्फ्यूजन का शिकार हो जाए ।
रेल सूत्रों से जानकारी मिली है कि एक आरपीएफ निरीक्षक ने दानापुर मंडल के नेऊरा स्टेशन के आस पास बोतल बंद पानी का एक प्लांट लगा रखा है और अवैध वेंडरों से बोतल बंद पानी बेचवा रहे है।
सोचने वाली बात तो यह है कि पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमरेश कुमार को वर्ष 2024 में राष्ट्रपति पुलिस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और जब Railwellwishers ने प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त के कार्यशैली पर सवाल उठाया तो Railwellwishers के दोनों मोबाइल नंबर को ब्लॉक कर दिया गया तो सवाल यह उठता है कि जो व्यक्ति सत्य से अपनी रक्षा नहीं कर सकता क्या वो रेल की रक्षा करने में सक्षम है।
विषय चिंता एवं चिंतन का है क्योंकि मामला रेलवे की सुरक्षा का है और आरपीएफ विभाग लूट का “अमृत काल “पर्व मनाने में मस्त हैं।





