
पटना: भारतीय रेल का दक्षिण पूर्व रेलवे जो पैसेंजर ट्रेनों के लेट लतीफी के लिए विख्यात है क्योंकि यहां यात्रियों से ज्यादा “माल” की अहमियत है! “माल” से होता है “आय” और “अन्य आय”! दक्षिण पूर्व रेलवे का वाणिज्य विभाग, जिसके “अन्य आय” के लिए “अन्याय”नियति बन चुकी है भले ही इसके लिए यात्री, कर्मचारी और रेलवे के राजस्व को ही “चंपत राय” जैसा चपत ही क्यूं न लगाना पड़े, लेकिन चक्रधरपुर मंडल का ट्राफिक विभाग भी वाणिज्य विभाग से दो क़दम आगे है क्योंकि “अन्य आय” के लिए आय भी जरूरी है और आय तो “माल” से ही आता है! भले ही माल से होता है “आय”, लेकिन साधारण यात्रियों के साथ हो रहा है अन्याय!


