- जातिगत गठजोड़ से व्यवस्था हुई कमजोर!
पटना: भारतीय रेल का वाणिज्य विभाग जिसका महती कार्य है रेलवे के आय का प्रबंधन करना, लेकिन “आय” के साथ “अन्य आय”की मंशा ने वाणिज्य विभाग की व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है! “अन्य आय” के लिए “अन्याय” वाणिज्य विभाग की नियति बन चुकी है!
पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर ज़ोन के अन्तर्गत पांच मंडल है और पांचों मंडलों में सबसे महत्वपूर्ण है दानापुर मंडल, और महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि इसके अंतर्गत पटना जंक्शन जैसा महत्वपूर्ण स्टेशन है।
“अन्य आय” की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहें, इसके लिए रेलवे बोर्ड के नियमों को भी दरकिनार कर दिया गया है और वाणिज्य विभाग के कर्ता-धर्ता के मनमानी का कोई सानी नहीं है और इसका दर्शन पटना जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर देखने को मिल रहा है।
पटना जंक्शन पर पदस्थापित मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज श्रीमान ए पी सिंह 13.04.2017 को मुख्य टिकट निरीक्षक बने और मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज बनने से वंचित श्रीमान के एन शाह 21.08.2015 को मुख्य टिकट निरीक्षक बने, स्पष्ट है कि श्रीमान के एन शाह ए पी सिंह से लगभग दो साल वरीय है तो आखिर क्या कारण है कि श्रीमान के एन शाह के जगह ए पी सिंह को पटना जंक्शन का मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज बनाया गया?
Railwellwishers को जो जानकारी मिली है वो चौंकाने वाली तो है ही व्यवस्था को शर्मशार करने वाली है क्योंकि श्रीमान के एन शाह को दानापुर मंडल के एक सहायक वाणिज्य प्रबंधक द्वारा हड़काया गया,डराया गया और धमकाया भी गया कि पटना जंक्शन पर बहुत ज्यादा लफड़ा है आप फंस जाइएगा और आपसे पटना जंक्शन नहीं चल पाएगा खैर सहायक वाणिज्य प्रबंधक की हुडकी और धुडकी के आगे श्रीमान के एन शाह विवशता में पटना जंक्शन का मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज बनने का सपना साकार न हो सका!

खैर पटना जंक्शन पर मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज के नियुक्ति में रेलवे बोर्ड के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं हुआ और ऐसा सिर्फ पटना जंक्शन पर ही नहीं हुआ है!
पाटलिपुत्र जंक्शन पर भी एक जुनियर को मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज बनाया गया है जो कि समझ से परे है कि आखिर क्या कारण है कि श्रीमान मंगल भूषण ओझा जो 13.01.2023 को मुख्य टिकट निरीक्षक बने हैं और उन्हें पाटलिपुत्र जंक्शन का मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज बना दिया गया है जबकि श्रीमान उमेश प्रसाद गोंड 21.08.2015 को मुख्य टिकट निरीक्षक बने तो आखिर क्या कारण है कि लगभग आठ साल जुनियर को मुख्य टिकट निरीक्षक इंचार्ज बनाया गया, सवाल तो गंभीर है! आखिर यह किसकी जिम्मेदारी है??
जब सवाल गंभीर है तो पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान अमिताभ प्रभाकर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यवस्था के संचालन में रेलवे बोर्ड के नियमों का शत् प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें और काश ऐसा हो पाता क्योंकि पटना जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन की स्थिति ऐसी है कि कुछ कहना बेकार है क्योंकि “अन्य आय” के लिए सरेआम अत्याचार हैं और यह अत्याचार सिर्फ रेलवे, रेल यात्रियों के साथ ही नहीं रेलवे कर्मचारियों के साथ भी हो रहा है!
ज्यादा दिन पहले की बात नहीं है, पटना जंक्शन पर पदस्थापित अंकित कुमार सिंह ने “अन्य आय” के लिए फर्जी इएफटी का कारोबार किया और रेलवे के राजस्व को राम मंदिर के ट्रस्टी “चंपत राय” जैसा चपत लगाया लेकिन कहते हैं ना कि जब पाप का घड़ा भर जाता है तो फूटता ज़रूर है और वही हुआ भी, रेलवे बोर्ड के सतर्कता विभाग ने अंकित कुमार सिंह के इस फर्जीवाड़ा को पकड़ा और जब मामला पकड़ में आ गया तो अंकित कुमार सिंह को निलंबित कर कागजी कार्रवाई की खानापूर्ति की गई क्योंकि अंकित कुमार सिंह को दंडित करने के बजाय निलंबन मुक्त कर दिया गया है और ऐसा कैसे हुआ है इसका जबाब भी प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक महोदय को देना ही होगा!
पूर्व मध्य रेलवे के वाणिज्य विभाग में अनियमितताओं की फेहरिस्त लंबी है और लंबी इसलिए हैं क्योंकि यहां “आय” की नहीं सिर्फ “अन्य आय”की चिंता है। प्रत्येक मंडल मुख्यालय में एक मंडल मुख्य टिकट निरीक्षक (Divisional CIT)होते हैं, जो सबसे वरीय होते हैं उन्हें ही यह पदभार मिलता है और उनके जिम्मे ही टिकट चेकिंग जैसा महत्वपूर्ण कार्य होता है लेकिन दानापुर मंडल के वाणिज्य विभाग की दशा दिशा और दुर्दशा का आलम यह है कि एक वाणिज्य लिपिक सोनु कुमार मंडल मुख्य टिकट निरीक्षक (Divisional CIT)का कार्य देख रहा है!सोनु कुमार के बारे में वाणिज्य विभाग के कर्मियों का ही कहना है कि सोनु कुमार दानापुर मंडल के वाणिज्य विभाग का “राजकुमार” है!
वाणिज्य विभाग का कहना भी सही प्रतीत होता है कि आखिर क्या कारण है नियुक्ति काल से ही मंडल मुख्यालय में ही पदस्थापित है, वाणिज्य लिपिक होने के बाबजूद मुख्यालय स्थित पीआरएस में कार्यरत था और वर्तमान में दानापुर मंडल के 23 टिकट चेकिंग दस्ता का सर्वेसर्वा बन चेकिंग दस्ता पर “अन्य आय” के लिए कहर ढा रहा है! जो जानकारी मिली है प्रत्येक टिकट चेकिंग दस्ता में आठ से दस टिकट चेकिंग स्टाफ है और प्रत्येक चेकिंग दस्ता के स्टाफ से अन्य सेवा सत्कार के अलावा प्रति माह ₹500 रुपए की रकम तय है जो कि एक निर्धारित तिथि तक भुगतान सुनिश्चित करना है वरना परेशान करने के अनेक बहाने है।
उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट प्रतीत होता है कि वाणिज्य विभाग की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है और इस ध्वस्त व्यवस्था के सरदार है प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान अमिताभ प्रभाकर जो बिल्कुल “बापू के बंदर”की भूमिका में हैं क्योंकि महात्मा गांधी के तीन बंदर सत्य, अहिंसा और सदाचार के प्रतीक हैं,वे हमें एक अनमोल जीवन दर्शन देते हैं,”बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो”! और ठीक यही काम तो प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कर रहे हैं!
खैर वाणिज्य विभाग की दशा, और दिशा जो दुर्दशा में तब्दील हो चुकी है, कहानी अभी शेष है और जो शेष है वो विशेष है!
अगले अंक में..
सफ़र जारी है..
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