दानापुर: आज भी मिर्ज़ा साहेब के सरकारी आवास पर रेलवे के कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर जारी है बस तरीका बदल गया है सावधानी बरती जा रही है । लोग शिफ्ट में काम कर रहे हैं, फ़ोन ले जाने की मनाही है, आवास में लगे सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया जाता है। मामले के प्रकाशित होने के बाद मिर्ज़ा साहेब ने अपने मज़हब के शागिर्दों को इस काम पर लगा दिया है ताकि कोई भी बात बाहर ना आ सके । इसके एवज़ में अपने मज़हब के लोगों को मनचाहे जगहों पर बिठाने का खेल भी शुरू हो चुका है । राजेन्द्र नगर कोचिंग कॉम्प्लेक्स में लगभग एक साल पहले पदस्थापित एक एसएसई को हटाकर अपने आदमी को सेट कर रहा है । अशर्फ़ी के चक्कर में एक दागी को स्टोर का अनाधिकृत मालिक बनाया हुआ है।
पता चला है पूर्व मध्य रेल के PCEE महोदय भी मिर्ज़ा साहेब के लूट की कला के मुरीद हो गए हैं इसकी बानगी देखने को मिल रही है मिर्ज़ा साहेब को प्रमोशन के बाद दानापुर मंडल का सुल्तान मिर्ज़ा बनाया जा रहा है , इलेक्ट्रिकल सामान्य का सरदार ख़ान बनाया जा रहा है।
कुछ विश्वस्त सूत्रों के हवाले से यह ख़बर भी आ रही है मिर्ज़ा साहेब सुल्तान मिर्ज़ा बनने की जल्दी में थे और दौलत जमा करने का कोई भी मौक़ा छोड़ना नहीं चाहते हैं ।
इम्प्रेस्ट के माध्यम से की जा रही ख़रीददारी में रेलवे को चूना लगाया जा रहा है और अपनी ज़ेब गर्म की जा रही है । सबस्टैंडर्ड मटेरियल और फ़र्ज़ी बिल की बातें भी सामने आ रही हैं । इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पर अंकुश कौन लगाएगा क्यूंकि इस हमाम में सब नंगे हैं ।
railwellwishers के द्वारा कर्मचारियों के शोषण और दुरुपयोग की ख़बर प्रकाशित किए जाने के बाद भी कोई भी वरीय अधिकारी चाहे वो मंडल का हो या मुख्यालय का किसी को भी मिर्ज़ा साहेब होने वाले सुल्तान से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं हुई । एहसान के बोझ के तले दबी हुई इस व्यवस्था से किसी भी प्रकार की उम्मीद बेमानी है । खाओ और खिलाओ और साथ में हाथों हाथ इनाम पाओ स्कीम जारी है।
आए दिन अख़बारों में लिफ्ट और एस्केलेटर्स के ख़राब होने की बात सामने आती है लेकिन कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जाता और लीपापोती कर आगे के लूट का कार्यक्रम चालू कर दिया जाता है । अगस्त 2023 में चालू हुए PPP मोड के सोलर पैनल के काम में प्रगति नाम मात्र की है । 3.2 MW में से सिर्फ और सिर्फ 350 kw का काम मधु विहार कॉलोनी की रूफ टॉप पर हुआ है । करार स्टेशन बिल्डिंग के रूफ टॉप पर सोलर पैनल लगाने का था । इससे बिजली के खर्च में काफ़ी कमी आ सकती थी लेकिन जानबूझ कर किसी ना किसी बहाने से इस कार्य को उलझाया जा रहा है इसमें भी कहीं मज़हब तो आड़े नहीं आ रहा है क्यूंकि संवेदक के प्रति संवेदना का वही आधार है।
लखीसराय में अमृत भारत योजना के तहत लिफ्ट का काम मुख्य करार में था लेकिन उद्घाटन के जल्दी के नाम पर दानापुर स्टेशन के लिफ्ट निर्माण के काम को लखीसराय में करा दिया गया। संवेदक के प्रति मज़हब आधारित संवेदना के कारण नियम क़ानून को दर किनार किया जा रहा है। जाति के अलावा मज़हब भी पक्षपात का आधार बन रहा है । जहां रेलवे को वित्तीय लाभ की संभावना है वो कार्य की गति एकदम धीमी है और जहां रेलवे के राजस्व से काम होना है वहां तत्परता दिखाया जा रहा है क्यूंकि कमीशन की संभावना बनी रहती है । कोटेशन के कार्यों में रेट निर्धारित है 10 टका । इस मामले में मिर्ज़ा साहेब के कार्यकाल के दौरान एक नया सिस्टम आया है जिसमें कोटेशन को एक निर्धारित दर आगे बेचा जा रहा है । काम कम माल भरदम के सिद्धांत पर कोटेशन के कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यालय के SAG स्तर के अधिकारियों के कोटेशन के अधिकार को मंडल के फ़र्ज़ी कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या ऐसे ही चलता रहेगा पूर्व मध्य रेलवे का विधुत विभाग जो प्रकाश के बदले विनाश के मार्ग पर रफ्तार के साथ गतिमान है!
सुधार तो संभव है,बस सुधारने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
सफ़र जारी है…





