ECR: “कार्मिक विभाग” का तुगलकी फरमान! जर्जर आवास लेने के लिए किया जा रहा मजबूर!

ECR: “कार्मिक विभाग” का तुगलकी फरमान! जर्जर आवास लेने के लिए किया जा रहा मजबूर!
  • जर्जर रेलवे आवासों के बीच HRA रोकने का आदेश कर्मचारियों के हितों के विपरीत!

सोनपुर : पूर्व मध्य रेलवे का सोनपुर मंडल अपने अजीबोगरीब कारनामों के लिए कुख्यात और विख्यात है और ऐसा ही एक आदेश सोनपुर मंडल के कार्मिक विभाग द्वारा जारी किया गया है, जिससे कर्मचारी जर्जर आवास लेने को मजबूर हो रहे हैं।कार्मिक पूर्व मध्य रेलवे, सोनपुर द्वारा पत्र संख्या का/34/बिल/विविध/सोन/2026 दिनांक 30.03.2026 के माध्यम से यह निर्देश जारी किया गया है कि यदि रेलवे आवास उपलब्ध है तो कर्मचारियों के मकान किराया भत्ता (HRA) पर रोक लगाई जा सकती है। साथ ही विभागीय कोटा के बाद सामान्य पूल (General Pool) में भी आवास उपलब्धता पर विचार करने का प्रावधान किया गया है।

किन्तु जमीनी स्थिति इस आदेश से बिल्कुल भिन्न दिखाई देती है। मंडल के अनेक रेलवे आवास वर्षों पुराने, जर्जर एवं असुरक्षित अवस्था में हैं। इसका ताजा उदाहरण थाना बिहपुर में देखने को मिला, जहां एक रेलवे क्वार्टर का हिस्सा गिर जाने से एक परिवार के सदस्य तथा दो बच्चे घायल हो गए। यह घटना स्पष्ट करती है कि केवल कागजों पर आवास उपलब्ध होना और वास्तविक रूप से सुरक्षित एवं रहने योग्य आवास उपलब्ध होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे आवास, जिनकी छत, दीवार या संरचना कमजोर हो चुकी हो, उनमें परिवार सहित रहना जीवन को जोखिम में डालने के समान है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को अप्रत्यक्ष रूप से जर्जर रेलवे आवास ग्रहण करने के लिए बाध्य करना तथा दूसरी ओर HRA रोकने की नीति अपनाना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

यदि कोई कर्मचारी असुरक्षित क्वार्टर में रहने से इंकार करता है तो उसे HRA से वंचित करने की बजाय पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसे जो आवास दिया जा रहा है वह पूरी तरह सुरक्षित, रहने योग्य और संरचनात्मक रूप से मजबूत है। कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा किसी भी प्रशासनिक आदेश से अधिक महत्वपूर्ण है।

इसलिए कर्मचारियों के हित एवं उनके परिवारजनों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए Railwellwishers मंडल रेल प्रबंधक महोदय से विनम्र निवेदन करता है कि..
मंडल के सभी रेलवे आवासों का तत्काल सुरक्षा एवं संरचनात्मक ऑडिट कराया जाए।

जर्जर एवं खतरनाक घोषित आवासों को आवंटन सूची से हटाया जाए।

जब तक सुरक्षित एवं रहने योग्य आवास उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक HRA रोकने की कार्रवाई स्थगित की जाए।

कर्मचारियों को किसी भी प्रकार के जबरन आवंटन (Forceful Allotment) के लिए बाध्य न किया जाए।

बिहपुर जैसी घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

रेल कर्मचारियों का मानना है कि यदि समय रहते इस विषय पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी। रेलवे आवास योजना का उद्देश्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित आवास प्रदान करना है, न कि उन्हें असुरक्षित भवनों में रहने के लिए विवश करना।

जनहित एवं रेलकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सोनपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्रीमान अमित सरण कर्मचारी हित को कहां तक और कब तक पूरा करते हैं।
सफ़र जारी है..

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