ECR: “धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक की अंधेरगर्दी; “दागी” लेखा अधिकारी की “निर्माण संगठन” में पदस्थापना!

ECR: “धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक की अंधेरगर्दी; “दागी” लेखा अधिकारी की “निर्माण संगठन” में पदस्थापना!

पटना: भारतीय रेलवे के 18 ज़ोन में से एक महत्वपूर्ण ज़ोन जो “अभूतपूर्व ज़ोन” के रूप में विख्यात है और विख्यात इसलिए हैं क्योंकि यहां के अधिकारियों के कारनामे कुख्यात है! यहां रेलवे बोर्ड के आदेशों का कोई मायने नहीं है!

जब पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के वर्तमान महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो अपने कारनामों के कारण “धृतराष्ट्र” के रूप में विख्यात है और विख्यात इसलिए हैं क्योंकि इनके कार्यकाल में सीबीआई की सात सात रेड़ पड़ी है और बहुत सारे अधिकारियों को काल कोठरी का आनंद लेना पड़ा है लेकिन फिर भी कोई सुधार की संभावना नहीं दिख रही है और दिखें भी तो कैसे!

एक कहावत है ना कि लत,लक्षण और बाईं मरले पर जाई! ठीक उसी कहावत को चरितार्थ करने में पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं है।

जब सीबीआई की सात सात रेड़ से दामन पर दाग़ लगा तो दाग़ मिटाने के प्रयास में लेखा विभाग के 110 कर्मियों का एकमुश्त स्थानांतरण आदेश जारी कर अपने आप को पाक साफ दिखाने का प्रयास किया लेकिन यहां भी उन्हें निराश होना पड़ा क्योंकि बिना किसी समुचित व्यवस्था के 110 कर्मियों के स्थानांतरण से निर्माण संगठन की व्यवस्था दुरुस्त होने के बजाय ध्वस्त हो गई और संवेदकों का भुगतान लंबित और विलम्बित हो गया, जिसके कारण कार्यरत संवेदकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और महाप्रबंधक महोदय के निर्णय की किरकिरी हुई सो अलग।

खैर इन दिनों लेखा विभाग का एक स्थानांतरण आदेश बहुत ही चर्चा में हैं और चर्चा में इसलिए हैं क्योंकि अपने “विशिष्ट भ्रष्टाचार” के लिए चर्चित लेखा विभाग के वरीय अधिकारी एम एम हसन की पदस्थापना निर्माण संगठन में हो गई है।

लेखा विभाग के स्थानांतरण आदेश संख्या O.O.No 704/GAZ dated 29.04.2026 के माध्यम से पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर मुख्यालय में FA &CAO/F&G के पद पर आसीन एम एम हसन अब निर्माण संगठन में FS&CAO/Con/MHX के पद पर आसीन हो गए हैं।

आपका सवाल हो सकता है कि कि आप इन्हें “दागी”कैसे कह सकते हैं? सवाल भी जायज है लेकिन Railwellwishers बिना किसी तथ्य और प्रमाण के सत्य की बात नहीं करता है और ना ही करेगा।

आपको अवगत करा दें वर्ष 2017 में श्रीमान एम एम हसन दानापुर मंडल में वरीय मंडल वित्त प्रबंधक के पद पर आसीन थे और संयोगवश मंडल क्रीड़ा संध (Divisional Sport’s Associations) के सचिव भी थे,उस समय दानापुर मंडल में श्रीमान रंजन प्रकाश ठाकुर डीआरएम के पद पर आसीन थे और उनके कारनामों की चर्चा फिर कभी आगे के अंकों में।

एम एम हसन ने मंडल क्रीड़ा संध, दानापुर का सचिव रहते हुए रेलवे के जगजीवन स्टेडियम को नीलाम कर दिया, यदि नियमानुसार किया होता तो कोई बात नहीं होती लेकिन इन्होंने जगजीवन स्टेडियम को नीलाम करने में मनमानी दिखाई और मनमानी भी ऐसी कि पूरा लेखा विभाग शर्मशार हो जाए!
रेलवे से जुड़े हुए सभी लोग अवगत हैं कि रेलवे का कोई भी पैसा FA&CAO के खाते में जमा होता है,पांच रूपए हो या पांच करोड़,सभी FA&CAO के खाते में जमा होता है लेकिन एक वित्त अधिकारी होने के बाबजूद जगजीवन स्टेडियम के टेंडर का Earnest money जो ₹ 5000 था, Divisional Sport’s Associations, Danapur के पक्ष में लिया जबकि Performance guarantee का भुगतान FA&CAO/ECR/HJP के पक्ष में लिया, आपकों अवगत कराना आवश्यक समझते हैं कि Performance guarantee का पैसा निविदा के सम्पादन पश्चात वापस हो जाता है तो आप सोच और समझ सकते हैं कि जगजीवन स्टेडियम के निविदा में इन्होंने कितना बड़ा खेल कर दिया।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पांच साल के लिए इन्होंने जगजीवन स्टेडियम को Neokite Sport’s Pvt Ltd को सौंप दिया लेकिन रेलवे को एक पैसे का भी राजस्व प्राप्त नहीं हुआ, एक कहावत है ना कि “माल महाराज के और मिर्जा खेले होली”, ठीक वही हाल हुआ है जगजीवन स्टेडियम का, आपको जानकर और भी आश्चर्य होगा कि आज़ भी जगजीवन स्टेडियम से रेलवे को जगजीवन स्टेडियम से एक पैसे का राजस्व नहीं मिल रहा है और ऐसा नहीं है कि जगजीवन स्टेडियम से राजस्व नहीं आ रहा है, जगजीवन स्टेडियम से राजस्व प्रतिदिन आ रहा है और अच्छी मात्रा में आ रहा है लेकिन कहां जा रहा है उसका विश्लेषण आगे के अंकों में, अब विषय पर लौटते हैं, प्रमाणों को देखने से स्पष्ट प्रतीत होता है कि एम एम हसन ने रेलवे बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर मनमानी की है और वैसे लेखा अधिकारी की निर्माण संगठन में पदस्थापना क्या दर्शाता है? आप खुद सोच और समझ सकते हैं!

लेकिन एक बात तो तय है कि Railwellwishers ने पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह को “धृतराष्ट्र” से सम्मानित किया है,एम एम हसन के पदस्थापना आदेश जारी करने में इसे उन्होंने परिलक्षित भी कर दिया है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री जो 52 सप्ताह 52 सुधार की बात कहकर अपना प्रचार करते हैं,इस अभियान की शुरुआत कब करते हैं, क्योंकि अभी तक लगभग 18 सप्ताह गुजर गया है लेकिन ऐसा एक भी सुधार नहीं दिखता है जिससे उनकी जयकार की जा सकें!

सफ़र जारी है…

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