पटना: इसी शीर्षक के पिछले आलेख में आपने पढ़ा है कि किस तरह से पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो धृतराष्ट्र की भूमिका में हैं और अपने कारनामों से पूर्व मध्य रेलवे की प्रशासनिक व्यवस्था को ध्वस्त करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है!
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश संख्या E(O)lll/2014/PL/05 New Delhi dated 31.08.2015 के अनुसार क्रम संख्या Xlll में अधिकारियों के स्थानांतरण के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया गया है कि
Transfers other than those caused due to Promotion, deputation/return from deputation, retirements etc.will be generally issued from January to March. However,in administrative exigencies transfer orders may be issued as and when required.
और इसी आदेश में क्रम संख्या XIV में स्पष्ट दिशा निर्देश दिया गया है कि The controlling officer will ensure that the officer transferred will be relieved within a maximum period of one month.
तब बात सोचने वाली है कि धनबाद मंडल के वरीय मंडल अभियंता ( समन्वय) प्रदीप कुमार जिनका प्रतिनियुक्ति आदेश रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश संख्या 2025/E(O)ll/7/95(e-office:3509291)New Delhi dated 31.10.2025 के माध्यम से IRCON पटना में किया गया तो आखिर क्या कारण है कि लगभग छः महीने बीत जाने पर भी उन्हें विरमित नहीं किया गया है !
पूर्व मध्य रेलवे: “अनियंत्रित”अभियंत्रण विभाग में महाजंगल राज!
बात सोचने वाली है कि जहां रेलवे बोर्ड का स्पष्ट दिशा निर्देश है कि अधिकारियों का स्थानांतरण/प्रतिनियुक्ति आदेश का क्रियान्वयन एक महीने के अंदर सुनिश्चित करना है लेकिन पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन कान में तेल डालकर सोया हुआ है,यह तो ध्वस्त प्रशासनिक व्यवस्था का ही परिचायक है।
Railwellwishers ने जब 14 अप्रैल 2026 को दानापुर मंडल के अभियंत्रण विभाग में “महाजंगल राज़” की व्यवस्था पर सवाल उठाया था तो दानापुर के वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) राकेश कुमार जिसका स्थानांतरण आदेश 11.12.2024 को किया गया था लेकिन दुर्भाग्यवश स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं हुआ था, स्थानांतरण आदेश भी Railwellwishers के प्रयास से ही जारी हुआ था!
लेकिन 17.04.2026 को उसने मुकेश कुमार को चार्ज सौंप दिया, भले ही राकेश कुमार ने वर्किंग चार्ज मुकेश कुमार को सौंप दिया लेकिन स्टोर का चार्ज आज़ भी उसी के पास है और ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने स्टोर में करोड़ों की हेराफेरी की हुई है !
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिस मुकेश कुमार को राकेश कुमार ने चार्ज सौंपा है, दोनों दानापुर में लगभग दो दशकों से पदस्थापित है और कर्मियों के बीच अभियंत्रण विभाग के रंगा- बिल्ला के रूप में विख्यात है!
आप यकीन नहीं करेंगे कि रंगा बिल्ला की इस जोड़ी ने अभियंत्रण विभाग को अपने कारनामों से शर्मशार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है, आश्चर्य की बात है कि 137 ट्रैकमैन लाईन में ड्यूटी नहीं कर रहे हैं, खुलेआम रेट तय ₹15000 प्रति माह भुगतान कीजिए और अपना कारोबार कीजिए,इन 137 ट्रैकमैन में से कुछ दानापुर मंडल कार्यालय में हैं तो कुछ हाजीपुर ज़ोनल मुख्यालय में, स्वास्थ्य विभाग के मुफ्त कंडोम के वितरण की तरह इसने ट्रैकमैन का वितरण कर इसने अपनी रक्षा की है और ऐसा इसने गणेश परिक्रमा और दिनेश कृपा से की है ऐसा अभियंत्रण के अभियंता कहते हैं!
अब चर्चा करते हैं चर्चित “दुर्घटना विशेषज्ञ” पीडब्लूआई प्रमोद कुमार का,जिसका स्थानांतरण आदेश 02.09.2025 को जारी किया गया था और स्थानांतरण आदेश इसलिए जारी किया गया था क्योंकि Railwellwishers ने प्रमाणों के साथ इसके कुकर्मों का पर्दाफाश किया था और महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने गंभीरता से इस मामले में संज्ञान लिया था, इसके स्थान पर नियुक्त चन्दन कुमार ने 02.01.2026 को अपना पदभार संभाल लिया लेकिन आज तक बक्सर के पीडब्लूआई चन्दन कुमार को स्टोर का चार्ज नहीं दिया गया है क्योंकि यहां भी स्टोर में भारी हेराफेरी है !
प्रमुख मुख्य अभियंता के भारी दबाव में इसे बक्सर से दानापुर के लिए 30.04.2026 को विरमित तो कर दिया गया है, लेकिन उसने दानापुर मंडल मुख्यालय में रिपोर्ट नहीं किया है और जुगाड़ टेक्नोलॉजी में व्यस्त हैं, तो सोचा और समझा जा सकता है कि दानापुर मंडल के अभियंत्रण विभाग की व्यवस्था ध्वस्त हैं या नहीं!

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि जब दानापुर के वरीय प्रशाखा अभियंता रेल पथ के अधीन कार्यरत 137 ट्रैकमैन लाईन पर ड्यूटी नहीं कर रहे हैं तो उन्हें हार्ड रिस्क एलाउंस भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है??
आप सोच कर देखिए यदि एक ट्रैकमैन को प्रतिमाह ₹ 3375 मिलता है तो 137 ट्रैकमैन को ₹4,62,375 प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है,मतलब सालाना ₹ 55,48,500 का चपत रेलवे राजस्व को लगाया जा रहा है।

अब आप ही बताइए इसके लिए कौन जिम्मेदार है?? कम से कम Railwellwishers तो इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं, हां Railwellwishers इस मामले का पर्दाफाश और सच को बाहर लाने के लिए जिम्मेदार जरूर है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि 52 सप्ताह में 52 सुधार की बात कहकर अपना प्रचार करने वाले रेलमंत्री इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं?
कारवाई की उम्मीद के साथ सफर जारी है…
फिर मिलते हैं एक नई कहानी के साथ।





