पटना: भारत सरकार के “सर्व शिक्षा अभियान”में गति लाने हेतु एक स्लोगन बड़ा ही चर्चित हुआ था और आज भी चर्चित है “स्कूल चले हम”। भारतीय रेल के “अभूतपूर्व ज़ोन”पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर में जब महाप्रबंधक के पद पर छत्रसाल सिंह आसीन हुए तो उन्होंने अपनी “मस्त – परस्ती” में एक विशेष अभियान की शुरुआत की और अभियान का नाम दिया “लूट चले हम”, जो आज़ भी अनवरत जारी है और यह यह उनके कारनामों से प्रमाणित भी होता है, क्योंकि यहां रेलवे बोर्ड के किसी भी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है और यह किसकी जिम्मेदारी है, संभवतः बताने की जरूरत नहीं।
“लूट चले हम” अभियान की सफलता के लिए उन्होंने क्या क्या किया है आपके लिए जानना जरूरी है,जिसका संक्षिप्त क्रमवार विवरण इस प्रकार है!

(1) रेलवे बोर्ड ने 01.01.2026 को दानापुर मंडल के वरीय मंडल सामग्री प्रबंधक सुजीत कुमार का स्थानांतरण आदेश दक्षिण रेलवे के लिए जारी किया, लेकिन आज़ भी दानापुर मंडल के वरीय मंडल सामग्री प्रबंधक सुजीत कुमार दानापुर मंडल में ही पदस्थापित है और “लूट चले हम” अभियान को अंजाम देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है और लगातार दिल्ली की यात्रा कर रहे हैं कि किसी भी तरह से पूर्व मध्य रेलवे में ही रह जाए, लेकिन रेलवे बोर्ड द्वारा दक्षिण रेलवे स्थानांतरण क्यूं किया गया यह भी जानना जरूरी है, संक्षेप में इतना ही काफी है कि स्टोर विभाग में यह महामानव अनियमितताओं के सरदार है और पिछले वर्ष जुलाई 2025 में अवैध रूप से स्क्रैप की सप्लाई में इनकी संलिप्तता पाई गई थी, लेकिन सतर्कता विभाग की निकम्मेपन से अपने आप को बचाने में सफल हो गए थे, खैर आज़ भी दानापुर मंडल में ही विराजमान हैं तो क्या “धृतराष्ट्र”को चरितार्थ करने वाले महाप्रबंधक अंजान है!
(2) रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश संख्या E(O)lll-2026/TR/13 New Delhi dated 24.02.2026 के माध्यम से निर्माण संगठन में पदस्थापित संतोष कुमार SG/IRSE/ East Central Railway को धनबाद मंडल का अमित कुमार के जगह अपर मंडल रेल प्रबंधक नियुक्त करने का आदेश निर्गत किया था,लेकिन आज़ भी संतोष कुमार निर्माण संगठन में ही पदस्थापित है,अमित कुमार धनबाद मंडल से विरमित किए जा चुके हैं तब बात तो सोचने वाली है कि आखिर क्या कारण है कि संतोष कुमार को धनबाद मंडल में अपर मंडल रेल प्रबंधक के पद पर योगदान देने हेतु विरमित नहीं किया जा रहा है? क्या धनबाद मंडल में अपर मंडल रेल प्रबंधक (इन्फ्रा) का पद रिक्त रहने से वहां काम प्रभावित नहीं हो रहा है,मान लिया जाए कि “धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह को दिखाई नहीं पड़ता है तो सोचने वाली बात है कि आखिर धृतराष्ट्र महाप्रबंधक के “संजय”क्या कर रहे हैं, क्या उन्हें सिर्फ गांधी छाप का दर्शन उपरांत ही संज्ञान आता है!
(3) आपको स्मरण होगा कि 13 अप्रैल को दानापुर मंडल के जमीरा हाल्ट एवं कुल्हाड़िया स्टेशन के मध्य डाउन लाइन किमी 585 के पास नई दिल्ली से चलकर राजेन्द्र नगर स्टेशन आने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 22362 ईश्वरीय कृपा से दुर्घटनाग्रस्त होने से बची थी क्योंकि रेलवे ट्रैक पर स्लीपर था और लोकों पायलट की सुझबुझ और ईश्वरीय कृपा से एक बड़ी दुर्घटना होने से टल गई अन्यथा बहुत सारे यात्रियों का असमय ही तेरहवीं हो जाता! खैर रेलवे बोर्ड ने इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए दानापुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता 03 उत्पल कांत का स्थानांतरण आदेश BLW बनारस के लिए 13.04.2026 को ही जारी कर दिया लेकिन आज भी दानापुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता 03 उत्पल कांत को दानापुर मंडल से BLW के लिए विरमित नहीं किया गया है, क्या पूर्व मध्य रेलवे के “धृतराष्ट्र” महाप्रबंधक को किसी और घटना के घटित होने का इंतजार है! वैसे दानापुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता 03 उत्पल कांत ने अभियंत्रण विभाग की व्यवस्था को तहस नहस करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है फिर भी प्रशासन द्वारा संज्ञान नहीं लिया जाना प्रशासन की मंशा को परिलक्षित करता है।
(4) रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश संख्या E(O)lll-2025/TR/584 New Delhi dated 16.04.2026 के माध्यम से पूर्व मध्य रेलवे के उप मुख्य कार्मिक अधिकारी (राजपत्रित) जय प्रकाश सिंह को पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर से पूर्व रेलवे का स्थानांतरण आदेश जारी किया था और इसलिए किया था कि क्योंकि इन्होंने कैट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के बजाय 13 सहायक अभियंता को Reversal का show cause नोटिस जारी कर कार्मिक विभाग के कुकर्मों का पर्दाफाश किया था, लेकिन आज़ भी कार्मिक के उस “कुकर्मी”अधिकारी को पूर्व रेलवे के लिए विरमित नहीं किया जाना “धृतराष्ट्र”महाप्रबंधक के चाल चरित्र और चेहरा को परिलक्षित करता है, आखिर कार्मिक के कुकर्मी के साथ उनका रिश्ता क्या कहलाता है!
(5) पूर्व मध्य रेलवे का आदेश संख्या GAZ/107/2026 जो कि 28.04.2026 को जारी किया गया है,का अवलोकन करने पर यह ज्ञात होता है कि उपरोक्त वर्णित आदेश में प्रथम स्थान पर अंकित संत कुमार प्रजापति जो “शिक्षा अवकाश” के बाद 01.04.2026 को मुख्यालय में रिपोर्ट किया है तो फिर 27 दिन तक पदस्थापना के लिए इंतजार करना क्या ध्वस्त व्यवस्था का परिचायक नहीं है,27 दिनों तक पदस्थापना के लिए प्रतीक्षा क्या रेलवे राजस्व को चपत नहीं लगाया गया है।
पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो धृतराष्ट्र की भूमिका में अपनी मस्त परस्ती में पूर्व मध्य रेलवे की प्रशासनिक व्यवस्था को तहस नहस करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है, से क्या उम्मीद की जा सकती है!
जिस तरह से 13 अप्रैल को अमृत भारत एक्सप्रेस ईश्वरीय कृपा से दुर्घटनाग्रस्त होने से बची है, ईश्वरीय कृपा से ही पूर्व मध्य रेलवे को बचाया जा सकता है।
पूर्व मध्य रेलवे को ईश्वरीय कृपा मिलती रहे, इसी कामना के साथ
सफ़र जारी है..





