पटना : यदि शासन एवं प्रशासन के नीति एवं नियत में खोट हो और उद्देश्य कमाना सिर्फ नोट हो तो ऐसी व्यवस्था में शासन एवं प्रशासन से चोट लगना स्वाभाविक है और इस व्यवस्था के शिकार हो रहे हैं पूर्व मध्य रेलवे के “अनियंत्रित” अभियंत्रण विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी! यह तो सभी जानते हैं कि किसी भी व्यवस्था के कुशल संचालन के लिए शासन के आदेशों का अनुपालन आवश्यक होता है लेकिन पूर्व मध्य रेलवे में शासन एवं प्रशासन के आदेशों का अनुपालन से कोई दूर दूर का वास्ता नहीं है।
इस कहानी के पीछे “अनियंत्रित अभियंत्रण” के किसी भी अधिकारी एवं कर्मचारी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है लेकिन जो हकीकत है वो तो पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक के संज्ञान में आना ही चाहिए।
पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में अभियंत्रण विभाग द्वारा आदेश संख्या E/ENGG/ARRANGEMENT/TRANSFER/SSE/JE 963 जो कि 11.12.2024 को जारी किया गया, आज़ भी उपरोक्त वर्णित आदेश का शत् प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं हुआ है और क्यूं नहीं हुआ है यह तो “अनियंत्रित अभियंत्रण” विभाग के वरीय अधिकारी ही बता पाएंगे, लेकिन Railwellwishers के पास जो जानकारी मिली है वो चौंकाने वाली है क्योंकि इस आदेश के माध्यम से जिस वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) दानापुर का स्थानांतरण ट्रैक डीपो दानापुर में किया गया है वो लगभग दो दशकों से दानापुर में ही पदस्थापित है और कर्मचारियों के लिए आतंक का पर्याय तो है ही, रेलवे को भी चपत लगाने में पीछे नहीं है,ऐसी पुख्ता जानकारी मिली है कि इसने स्टोर में लाखों की हेराफेरी की हुई है और कोई भी बिना स्टोर भेरिफिकेशन के चार्ज लेने को तैयार नहीं है,कई वरीय पदाधिकारी के बाबजूद एक कनीय अभियंता को दानापुर का इंचार्ज बनाने का आदेश जारी किया गया था लेकिन कनीय अभियंता ने स्टोर की यथास्थिति को देखते हुए इंचार्ज बनने से इंकार कर दिया और आज भी स्थिति जस का तस है।

“अनियंत्रित अभियंत्रण” का यह कोई पहला मामला नहीं है।
“अनियंत्रित अभियंत्रण” द्वारा जारी आदेश संख्या E/ENGG/ARRANGEMENT//TRANSFER/SSE/JE 25/325 जो कि 22.05.2025 को जारी किया गया था,का भी शत् प्रतिशत अनुपालन आज़ भी सुनिश्चित नहीं हुआ है जो कि व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है लेकिन जब नियत में ही खोट हो और उद्देश्य मात्र कमाना नोट हो तो क्या किया जा सकता है!
उपरोक्त वर्णित आदेश में क्रम संख्या 04 पर वर्णित सुरेन्द्र कुमार एवं क्रम संख्या 05 पर वर्णित कमलेश कुमार अपने पूर्व स्थान पर ही पदस्थापित है तो सोचा और समझा जा सकता है कि लगभग एक वर्ष होने को है और स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन नहीं होना अभियंत्रण विभाग के अनियंत्रित होने का प्रमाण नहीं है तो और क्या है!

“अनियंत्रित अभियंत्रण”विभाग का एक और आदेश स्थापना कार्यालय आदेश संख्या 239/2025 जो कि 02.09.2025 को जारी किया गया था,का शत् प्रतिशत क्रियान्वयन आज तक सुनिश्चित नहीं हुआ है। Railwellwishers ने जब बक्सर में पदस्थापित वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) के कुकर्मों एवं कारनामों का पर्दाफाश किया था तो वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) प्रमोद कुमार का स्थानांतरण मंडल मुख्यालय दानापुर मंडल में वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ ) प्लानिंग के पद पर कर दिया गया था लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी प्रमोद कुमार बक्सर में पदस्थापित है जबकि चंदन कुमार ने अपना पदभार संभाल लिया है लेकिन प्रमोद कुमार ने कुत्सित मानसिकता का परिचय देते हुए अभी तक स्टोर का चार्ज चन्दन कुमार को नहीं सौंपा है तो सोचा और समझा जा सकता है कि दाल में काला ही नहीं पुरा दाल काला है।
“अनियंत्रित अभियंत्रण” विभाग में स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित होना कोई आश्चर्यजनक की बात नहीं है क्योंकि यह सिस्टम बन चुका है।
“अनियंत्रित अभियंत्रण” विभाग में कुछ ऐसे भी दबंग है जिनका स्थानांतरण लगभग दो दशकों से हुआ ही नहीं है जो अभियंत्रण विभाग में महा जंगल राज़ को परिलक्षित करता है। लगभग दो दशकों से तारकेश्वर यादव वरीय प्रशाखा अभियंता (कार्य) नवादा में ही पदस्थापित है और लूट का पर्याय बन चुके हैं, लंबी अवधि तक एक ही जगह पदस्थापित रहने का रिकार्ड सिर्फ तारकेश्वर यादव ने ही नहीं बनाया है, दानापुर मंडल मुख्यालय के अभियंत्रण विभाग के नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित संजय कुमार भी लगभग दो दशकों से दानापुर मंडल मुख्यालय में ही है।

तो सवाल यह उठता है कि दानापुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता (समन्वय) क्या कर रहे हैं! खुलेआम चर्चा है कि दानापुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता (समन्वय) प्रवीण कुमार आलोक ने समन्वय का पद पाने के लिए अच्छा खासा व्यय किया है और किया गया व्यय अपव्यय में तब्दील न हो इसलिए अन्य आय के लिए अन्याय करने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं, दानापुर मंडल में इनकी पदस्थापना भी सवालों के घेरे में है क्योंकि पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद मंडल से इनके सेक्शन में बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए इनका स्थानांतरण पश्चिम मध्य रेलवे में कर दिया गया था।

सवाल यह भी उठता है कि तकनीकी रूप से सुदृढ़ प्रमुख मुख्य अभियंता क्या कर रहे हैं तो लोग भी जानते हैं कि प्रमुख मुख्य अभियंता की भूमिका भी वही है जो भीष्म पितामह की थी, चाहते हुए भी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकते हैं क्योंकि अभियंत्रण पर अपरोक्ष रूप से शासन पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह के “संजय” का है जो कि अभियंत्रण कैडर के ही हैं और जब अभियंत्रण विभाग को अपरोक्ष रूप से “धृतराष्ट्र के संजय” चला रहे हों तो स्थिति क्या होगी उसका दर्शन दानापुर मंडल में देखा जा सकता है।
अभियंत्रण विभाग का अनियंत्रित होना चिंता ही नहीं चिंतण का विषय है क्योंकि मामला यात्रियों की सुरक्षा एवं रेल की संरक्षा से जुड़ा है। “अनियंत्रित अभियंत्रण” की एक और कहानी समस्तीपुर मंडल की जो कि मस्ती पुर मंडल के नाम से विख्यात है।
सफ़र जारी है…





