- बक्सर में इंजन की बेपटरी से खुली सिस्टम की पोल, घटना स्थल पर हुआ था बेल्डिंग का काम
- वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) प्रमोद कुमार के साथ हादसों का रहा चोली-दामन का साथ
दानापुर: बिहार में एक कहावत है “लाजे भाभो बोले न और स्वादे भैसूर छोड़े न”, ठीक वही हाल हो गया है पूर्व मध्य रेलवे, दानापुर मंडल के “अनियंत्रित” अभियंत्रण विभाग का जहां सभी “भैंसूर”बन मजा ले रहे हैं और सिस्टम सजा भुगत रहा है। दिनांक 16.08.2025 को संध्या 17.45 बजे बक्सर के पोयांटस संख्या 53 एबी के पास गुड्स लाइन से मेन लाइन पर आने समय इंजन बेपटरी हो गया , इंजन तो बेपटरी हो गया कोई जान माल की क्षति नहीं हुई लेकिन डाउन लाइन ब्लाॅक हो गया और डाउन लाइन की गाड़ियों को काॅमन लूप लाइन से चलाया गया।
जो होना था हो गया लेकिन क्यूं हुआ यह जांच का विषय है। रेल सूत्रों से जो सटीक जानकारी मिली है वह चिंताजनक है क्योंकि जहां इंजन बेपटरी हुआ है वहां पर वेल्डिंग का काम हुआ था लेकिन वेल्डिंग करने के बाद ग्राइडिंग नहीं किया गया, इतनी बड़ी चूक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है ..??
लापरवाही से वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) का पुराना नाता
किसी भी निर्णय पर पहुंचने के पहले इतिहास और विरासत को स्मरण करना जरूरी होता है और जब आप बक्सर के वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) प्रमोद कुमार के इतिहास और विरासत को स्मरण करेंगे तो सिर्फ दुर्घटना ही दुर्घटना नजर आएगा । इनके कार्यकाल में यह सातंवी दुर्घटना घटित हुई है जो इनके योग्यता का दर्शन करने के लिए काफी है। मई के प्रथम सप्ताह में भी बक्सर वरुणा मेन लाइन में भी डिस्ट्रेसिग के दौरान लगभग आधा दर्जन संवेदक के मजदूर घायल हो गए थे जिसमें से तीन का पैर काटना पड़ा था तो आप घटना की भयावहता का अंदाजा लगा सकते हैं।
04 नवंबर 2024 को भी डुमरांव में डिस्ट्रेसिंग के दौरान दो ट्रैकमैन बुरी तरह घायल हो गए थे, एक का पैर टूट गया था और दूसरे के पैर में पांच छः जगह फ्रैक्चर हो गया था जिसे बेहतर चिकित्सा हेतु पटना के Appolo Spectre Hospital में भर्ती कराया गया था। इस घटना के छः माह पूर्व भी बक्सर युनिट संख्या 03 के शिवशंकर यादव का पैर डिस्ट्रेसिंग के दौरान टूट गया था , वैसे साथ काम करने वाले कर्मियों का कहना है कि बक्सर का वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) प्रमोद कुमार बिना ब्लाॅक के काम करने का आदी हैं और काम के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी इनकी फितरत है और ऐसा क्यूं हैं यह उच्च स्तरीय जांच का विषय है।
रघुनाथपुर हादसे के समय भी आरा में पदस्थापित थे महाशय
लगभग दो साल पहले जो रधुनाथपुर ट्रेन दुर्धटना हुआ था उस समय आरा के वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) प्रमोद कुमार ही थे। तब बात सोचने वाली है कि इतने बड़े दुर्घटना के बाबजूद मेन लाइन में पदस्थापना आखिर कारण क्या है! जानकारी मिली है कि बक्सर के वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) प्रमोद कुमार के भाई प्रशासनिक अधिकारी हैं और अपने भाई के प्रशासनिक रसूख के चलते ही किसी भी कार्रवाई से बच निकलते हैं और मनमाफिक पदस्थापना पा जाते हैं।
ठीक है मान लिया जाए कि भाई बड़े प्रशासनिक अधिकारी हैं लेकिन यदि कोई बड़ी घटना घटित हो जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा यह सोचना प्रशासन का काम है और प्रमोद कुमार के इतिहास और विरासत को देखते हुए इनकी पदस्थापना किसी ऐसे जगह होनी चाहिए जहां दुर्घटना घटित होने की संभावना नगण्य हो।
किसी को राहत, किसी पर दबाव, ट्रैकमैनों के दुरुपयोग पर बढ़ रहा असंतोष
रेल सूत्रों से पुष्ट जानकारी मिली है कि बक्सर के लगभग 40 ट्रैकमैन को इन्होंने ₹ 12000 महीने की दर से बेच रखा है और कर्मियों के कमी से भी दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है और इनके साथ काम करने वाले ट्रैकमैन को हमेशा भय बना रहता है। कर्मियों के भय एवं यात्रियों की सुरक्षा एवं संरक्षा का ध्यान रखते हुए प्रशासन की उचित कार्रवाई से ही समस्या का निराकरण हो सकता है और निराकरण कब तक होता है देखने वाली बात है।





