“धृतराष्ट्र” की भूमिका में हैं पूर्व मध्य रेलवे के “महाभ्रष्ट” एवं “मति भ्रष्ट” महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह!

“धृतराष्ट्र” की भूमिका में हैं पूर्व मध्य रेलवे के “महाभ्रष्ट” एवं “मति भ्रष्ट” महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह!

पटना: इन दिनों भारत में निर्देशक आदित्य धर की फिल्म “धुरंधर”बडी चर्चा में हैं, फिल्म “धुरंधर” के पार्ट 02 में एक दृश्य है, जिसमें दिखाया गया है कि पाकिस्तान में गिरती कानून व्यवस्था को लेकर वहां के हुक्मरानों की एक बैठक होती है और उस बैठक में निर्णय होता है कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए क्यूं न कुछ अलग किया जाए और निर्णय होता है कि मेडिकल कॉलेज के चार बलुचिस्तान छात्रों को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल बताकर हत्या कर दी जाए और लोगों का पाकिस्तान में गिरती कानून व्यवस्था से ध्यान भटकाया जाए! ठीक वही काम हुआ है भारतीय रेलवे के “अभूतपूर्व” ज़ोन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर में जो लूट का चारागाह और लूटरे अधिकारियों का ऐशगाह बन चुका है।

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एक कहावत है, “कमजोर की लुगाई सबकी भौजाई”,जिस तरह से फिल्म धुरंधर में ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बलुचिस्तान के मेडिकल छात्रों को चुना गया ठीक उसी तरह से अपने कार्यकाल में सात सात सीबीआई रेड से परेशान पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने लेखा विभाग का चयन किया और एकमुश्त वर्ग 03 के 110 कर्मियों का स्थानांतरण कर अपने आप को हीरो बनाने का प्रयास किया और कुछेक स्वयंभू मठाधीश समझने वाले रेलवे के पत्रकारों ने पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह को इस स्थानांतरण आदेश के लिए “हीरो”बनाने का असफल प्रयास किया जबकि हकीकत कुछ और ही है क्योंकि किसी भी निर्णय पर पहुंचने के लिए इतिहास और विरासत को स्मरण करना आवश्यक होता है ।

जब पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने अपना पदभार संभाला तो पहला सीबीआई रेड निर्माण संगठन के महेंद्रू घाट, पटना कार्यालय में पड़ा जहां इनके खासमखास “दुलरुआ” उप वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी अनुराग गौरव 15 लाख रुपए की कमिशन की राशि लेने में जेल चले गए, आपके लिए यह जानना जरूरी है कि अनुराग गौरव पूर्व में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में छत्रसाल सिंह के मंडल रेल प्रबंधक के कार्यकाल में वरीय मंडल वित्त प्रबंधक के पद पर आसीन थे और रेल सूत्रों से यह भी जानकारी मिली कि सीबीआई रेड से पहले पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने निर्माण संगठन के उप वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी से मोबाइल पर लंबी वार्ता की थी।

जब मार्च 2025 में पूर्व मध्य रेलवे के दीनदयाल उपाध्याय मंडल कार्यालय में सीएलआई की विभागीय पदोन्नति परीक्षा में घोर अनियमितता के आरोप में दो अधिकारी, एवं 17 लोकों पायलट समेत 26 लोगों को गिरफ्तार कर सीबीआई ने लखनऊ जेल भेज दिया तो पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने एकमुश्त 121 अधिकारियों का स्थानांतरण कर अपने आपको हीरो बनाने का असफल प्रयास किया क्योंकि इनकी मंशा कुछ और थी,इनका एक ही मिशन था कैसे मिले ज्यादा से ज्यादा कमिशन और इस कमिशन के चक्कर में इन्होंने पूर्व मध्य रेलवे की व्यवस्था को तहस नहस करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी,जिन 121 अधिकारियों का असमय ही स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था, उनमें बहुत सारे ऐसे थे जो अपना दो साल का कार्यकाल भी पुरा नही किया था और बहुत सारे ऐसे अधिकारी थे जो ढाई साल का कार्यकाल भी पुरा नही किए थे, इनके कुत्सित मानसिकता का दर्शन प्रमाण के रूप में तब आया जब धनबाद मंडल से इन्होंने ढाई साल पुरा करने करने वाले अधिकारियों की सूची मांगी।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि चक्रधरपुर मंडल में मंडल रेल प्रबंधक के कार्यकाल में इनके विशेष “खासमखास दुलरुआ”वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक राजेश कुमार जो पूर्व मध्य रेलवे में महाप्रबंधक के “दुलरूआ” और “कलूआ” के रूप में विख्यात है, अप्रैल 2025 में अपने महाभ्रष्ट सहयोगी वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक सतर्कता पी के सिन्हा जो महाप्रबंधक के इशारे पर नाचने एवं गाने के लिए मशहूर है, के सहयोग से राजेश कुमार को लालची अधिकारी के सूची से बाहर निकलवाया और धनबाद मंडल का वरीय मंडल परिचालन प्रबंधक बनाने के नाम पर खुब जी-हजूरी करवाईं लेकिन जब पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक प्रभात कुमार ने धनबाद मंडल में एक लालची एवं दुर्धटना विशेषज्ञ अधिकारी की पदस्थापना आदेश जारी करने से इंकार कर दिया तो इन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक महोदय का स्थानांतरण मध्य रेलवे करवा दिया लेकिन कालांतर में जब इनके मंशा का पर्दाफाश हो गया तो इन्होंने अपने खासमखास दुलरुआ राजेश कुमार को कहीं का नहीं छोड़ा, क्योंकि धनबाद मंडल में वरीय मंडल परिचालन प्रबंधक के पद पर किसी और योग्य एवं सुयोग्य अधिकारी की पदस्थापना हों गई।

जब मार्च 2025 में पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह द्वारा 121 अधिकारियों का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था,उसी समय रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या IRTS cadre/2025/1 New Delhi dated 12.03.2025 के माध्यम से एमओबीडी द्वारा एक आदेश जारी किया गया था जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक एवं प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक के साथ साथ मंडल परिचालन प्रबंधक एवं मंडल वाणिज्य प्रबंधक के सचिवों का भी,जिनका कार्यकाल 03 वर्ष पुरा हों चुका है,पद संवेदनशील श्रेणी में आता है और उनका स्थानांतरण 30 अप्रैल 2025 तक सुनिश्चित किया जाए, क्या पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि रेलवे बोर्ड के उपरोक्त आदेश का अनुपालन सुनिश्चित हुआ!

कदापि नहीं क्योंकि इनकी मंशा ही कुछ और है।

जिस तरह से इन्होंने लेखा विभाग को देखा, कार्मिक विभाग विभाग में वर्षों से एक ही जगह पदस्थापित कल्याण निरीक्षकों को क्यूं नहीं देखा जो बिल्कुल दुर्योधन की भूमिका में कर्मचारियों का चीरहरण दिन रात कर रहे हैं, थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि पूर्व मध्य रेलवे के पांचों मंडलों में पदस्थापित कल्याण निरीक्षकों की जानकारी इन्हें नहीं हो तो मुख्यालय एवं निर्माण संगठन में पदस्थापित कल्याण निरीक्षकों की जानकारी तो इन्हें अपने “संजय” से लेनी ही चाहिए।

भले ही इनका “संजय” इन्हें वास्तविक हकीकत का दर्शन कराने में अक्षम हो, railwellwishers.com अपने कर्तव्यों का पालन अवश्य ही करेगा कहानी के अगले भाग में…

सफ़र जारी है..

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