पटना: पुरानी कहावत है –
करे कोई , भरे कोई या भोगे कोई !
इसी तर्ज़ पर एक और कहावत है,
खेत खाये गदहा, मार खाये जुलहा!
ऊपर के कहावतों को एक नए तर्ज़ पर पेश किया जा रहा है।
माल खाया Monkey,
मार खाये Donkey.
पढ़ने में कुछ हास्यास्पद लग सकता है,
परन्तु जैसे जैसे आप कहानी पढ़ेंगे, आप Monkey और Donkey को इस कथानक के पात्रों के चरित्र के अनुकुल ही पायेंगे!
तो Monkey है – पूर्व मध्य रेल का कार्मिक विभाग और Donkey – फील्ड में कार्यरत कर्मचारी/ अधिकारी!
हुआ यूँ कि वर्ष 2019 में Gr.B Aen (30% Quota) के चयन हेतु जिसमें सामन्य वर्ग का 08, ST वर्ग के 04 और ST वर्ग 02 के सहित कुल 14 पदों का नोटिफिकेशन जारी हुआ, जिसकी प्रक्रिया 30.12.2019 तक पूरी कर ली गयी।
सभी नव नियुक्त अधिकारियों ने पदभार ग्रहण कर 6 वर्ष की सेवा भी पूरी कर ली, तथा एक वेतन उन्नयन का लाभ भी प्राप्त कर लिया ।अब एकाएक पूर्व मध्य रेल के कार्मिक विभाग ने इसी महीने एक Show Cause नोटिस जारी कर दिया जिसमें एक CAT के निर्णय का उल्लेख करते हुए सभी अधिकारियों से पूछा गया कि CAT के निर्णय के अनुपालन हेतु आप सबों को प्रोन्नति के पूर्व के पद पर क्यूं नहीं वापस किया जाये।
इसी विषय की सार्थकता को दिखाने के लिए उपरोक्त नए मुहावरे का जन्म हुआ है! जब मामले की जांच-पड़ताल की गई तो एक नया महा घोटाला सतह पर आ गया और प्याज के छिलके की तरह नया नया तथ्य परत दर परत निकलकर आ रहा है। जिस समय अंतिम परिणाम आया उस समय तो उपर ही उपर सब ठीक लग रहा था पर वास्तव में सब ठीक नहीं था।
इस सलेक्शन में कार्मिक के द्वारा महाखेला किया गया था जिसमें नोटिफिकेशन में वर्णित एक निश्चित अनुपात (1:5) से ज़्यादा (1:7) में अभ्यर्थियों को मुख्य लिखित परीक्षा के लिए बुलाया गया था और यही बड़ा खेला था। इसी विस्तारित अनुपात में से आये हुए दो अभ्यर्थियों का अन्तिम चयन का मार्ग प्रशस्त किया गया।
यदि नोटिफिकेशन में वर्णित 1:5 अनुपात के अनुसार ही प्रारंभिक परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों में से ही मुख्य परीक्षा के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों को बुलाया जाता तो विस्तारित अनुपात के कारण अतिक्रमण कर आये हुए अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सम्मिलित ही नहीं हो पाते तो फिर अंतिम रूप से चयन का प्रश्न ही नहीं उठता।

कार्मिक विभाग के इस कुकर्म से प्रभावित दो कर्मचारी जो मुख्य परीक्षा उपरांत मौखिक परीक्षा में भी सम्मिलित हुए थे, अंतिम चयन नहीं होने से इस विस्तारित अनुपात वाली विसंगति को कार्मिक विभाग के संज्ञान में लाया तो कार्मिक के कुकर्म का पता चला।
आदतन कार्मिक ने कोई कारवाई नहीं की। वैसे भी अपने गु– को कौन खाता है सो इस गु.. को ढकने का प्रयास किया पर मामला CAT में चला गया । कुकर्मी कार्मिक ने CAT में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर CAT को बरगलाने की पूरी कोशिश की पर CAT ने दूध का दूध और पानी का पानी कर गलत ढंग से चयनित अधिकारी का नाम का उल्लेख कर दिया और दिनांक 10.09.2025 के अपने आदेश में रेलवे द्वारा प्रकाशित पैनेल को ख़ारिज कर दिया एवं तीन महीने के भीतर नया पैनेल बनाने का आदेश दिया।
अपनी गंदगी साफ़ करने के बजाय वे महीनों तक मामले पर कुंडली मार कर बैठे रहे और अंत में CAT के आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए High Court चले गये, High Court ने आवेदन तो मंजूर कर लिया पर CAT के आदेश के क्रियान्वयन पर कोई रोक नहीं लगाई। जब कार्मिक ने CAT के आदेश के अनुसार पुराने पैनेल को रद्द कर सुधारात्मक कारवाई नहीं की तो प्रभावित कर्मचारी फिर CAT गये और अवमानना का केस कर दिया।
इस अवमानना की कारवाई से कार्मिक के कुकर्मियों का पैंट गीला हो गया और फिर इन कुटिल लोगों ने एक नयी चाल चल दी। गलत ढंग से चयनित अधिकारियों को हटाने की जगह उस पूरे पैनेल के अधिकारियों को CAT का आदेश सुना उन्हें 6 वर्ष पूर्व दिये पदोन्नती को छीन वापस पदोन्नती पूर्व के पद पर भेजने की मंशा प्रकट कर दी, और अधिकारिक पत्र जारी कर उनसे पूछा गया है कि क्यूं नहीं उनकी पदोन्नती रद्द की जाये ?
इन कुकर्मियों को इतनी भी समझ नहीं कि जिन दो कर्मचारियों को गलत लाभ देकर पदोन्नती दी गई थी उनको Show cause नोटिस देने की जगह पूरे पैनेल के लोगों को इसने नोटिस दे दी? इसमें इनलोगों की मंशा क्या है ? जब CAT ने गलत ढंग से चयनित कर्मचारियों का नाम स्पष्ट उल्लेख कर दिया है तो नोटिस केवल उन्हें ही देना चाहिए , न कि पूरे पैनेल के लोगों को!
अरे, कहना क्या चाहते हो? क्या पूरा सलेक्शन ही गलत था! यदि गलत था, तो इसकी जवाबदेही तय करो। उस समय के PCPO, DY. CPO एवं अन्य की भूमिका की जांच करो कि नोटिफिकेशन में निहित नियमों के विरुद्ध जाकर किस भ्रष्ट अधिकारी के अनुमोदन से 1: 5 की जगह 1:7 के अनुपात में मुख्य परीक्षा हेतु ज्यादा उम्मीदवारों को अवसर दिया, क्या इसमें कोई गलत मंशा नहीं दिखती है?
और, उनपर कारवाई करने की हिम्मत भी नहीं होगी क्योंकि उस समय के Dy CPO अब CPO या PCPO भी हो गये होंगे और तत्कालीन PCPO अब रेलवे बोर्ड में बैठे होंगे, तो अपने PAPA के ऊपर कारवाई कैसे करोगे? क्योंकि आपकी भी कुंडली उनके पास होगी और आप नाप दिए जाओगे।
एक शेर है–‘
जहरीली है हवा,
यह तोहमत हवा पर हावी हो गई।
गुनाह मुजरिम का,
बेगुनाह पर ही भारी हो गई ।
किसने काटा दरख्तों को,
किसने घोला जहर मुझमें,
पूछा जो सवाल हवा ने,
सवाल बेमानी हो गई ।
तोहमत पूरब का,पश्चिम पर,
कहानी हो गई ।
मुजरिम ही नालिश करे,
और ज़ालिम जब फैसला,
बेगुनाह क्या कहे,
कैसे कहे,
है बेजुबान ओ अबला ।
इन्साफ की उम्मीद अब रेलवे के तंत्र से नहीं है क्योंकि सब एक ही चट्टे- बट्टे के हैं। मामला CVC का बनता है, जिसमें पूर्व के कार्मिक अधिकारियों के भूमिका की जांच की जानी चाहिए एवं वर्तमान में भी गलत कारवाई करने वाले अधिकारीयों के भी विस्तृत जाँच हो। Railwellwishers मुख्य सतर्कता आयुक्त से मांग करता हैं कि Show cause Notice वाले तुगलकी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगायी जाए।
सबसे गंभीर सवाल तो माननीय रेल मंत्री से बनता है जो 52 सप्ताह में 52 सुधार करने की बकचोदी करते हैं क्या कार्मिक विभाग की दशा दिशा और दुर्दशा को सुधारने के लिए कोई सार्थक प्रयास करेंगे या सिर्फ बापू के तीन बंदरों की तरह अपनी भूमिका का निर्वहन कर अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति करते रहेंगे!





