RPF का कारनामा…”सम्मान” को भी बना दिया “कारोबार”! व्यवस्था हुई शर्मसार

RPF का कारनामा…”सम्मान” को भी बना दिया “कारोबार”! व्यवस्था हुई शर्मसार

पटना: पिछले दिनों 09 जनवरी 2026 को 70वें राष्ट्रीय स्तरीय रेलवे पुरस्कार समारोह 2025 में 100 अधिकारियों एवं कर्मचारियों एवं विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ज़ोन को 26 शील्ड प्रदान किए गए।इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव जी ने वर्ष 2026 के 52 सप्ताह में 52 सुधार के संकल्प की बात कही, लेकिन अभी तक रेल मंत्री महोदय ने अपने कितने संकल्पों एवं किन संकल्पों को पूरा किया है उनके लिए आत्मचिंतन का विषय है क्योंकि उन्हें बहुत ही बेमन से पश्चिम रेलवे को मिलने वाले मानव संसाधन का उत्कृष्टता पुरस्कार का निर्णय बदलना पड़ा और बदलना इसलिए पड़ा क्योंकि रेलवे की पत्रकारिता में विशिष्ट स्थान रखने वाले वरिष्ठ संपादक महोदय ने पश्चिम रेलवे के “कलंकित” कार्मिक विभाग के काले कारनामे को रेल पटल पर रखकर व्यवस्था को दर्पण दिखाने का काम किया और अंततः निर्णय बदलना पड़ा!

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इसी रेल पुरस्कार समारोह में सुरक्षा शील्ड पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर को मिला और पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर को मिला यह पुरस्कार रेलकर्मियों के बीच चर्चा का विषय है लोगों को कहना है कि यदि पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के आरपीएफ विभाग को सुरक्षा शील्ड मिला है तब सोचने वाली यह है कि पुरस्कार मिलने का पैमाना क्या है? क्योंकि किसी को दिया गया पुरस्कार उसकी उपलब्धियों को मान्यता देना है और पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के आरपीएफ विभाग की क्या उपलब्धियां हैं सर्वविदित है!

सबको स्मरण होगा कि 17 अगस्त 2025 को ट्रेन संख्या 12334 विभुति एक्सप्रेस में एक यात्री से आरपीएफ अनुरक्षण दल के दो सिपाहियों ने ₹ 1.50 लाख की छिनतई की थी और जब यात्री ने रेल मदद 139 पर घटना की शिकायत संख्या 2025081712117 दर्ज कराई तो जीआरपी दानापुर हरकत में आया और कार्रवाई की शुरुआत की लेकिन आरपीएफ विभाग ने अपनी गर्दन फंसती देखकर दानापुर के पोस्ट निरीक्षक एवं सीआईबी के निरीक्षक को मामले को रफा-दफा करने का जिम्मा सौंपा, और इन दोनों ने अपने आका की इच्छा को पूरा भी किया लेकिन जीआरपी के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज ने इन दोनों के कारनामों की पोल खोल दी,जब मामले को रफा-दफा कर दिया गया तो railwellwishers.com ने मामले को रेल पटल पर सफलतापूर्वक रखा और भारतीय रेल के उच्चाधिकारियों को आरपीएफ की इस लूट से अवगत कराया।

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जब मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा तो गया के रेल डीएसपी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति ने मामले की जांच की और अंततः यात्री द्वारा जीआरपी बक्सर थाना में कांड संख्या 204/25/US/309(6)BNS के तहत दो सिपाहियों के उपर रिपोर्ट दर्ज किया गया लेकिन इस मामले को रफा-दफा करने में शामिल दोनों निरीक्षक पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई,यह तो आरपीएफ विभाग के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त की एक उपलब्धि है और इस उपलब्धि के लिए यदि आरपीएफ विभाग को सुरक्षा शील्ड का पुरस्कार मिला है तब तो उन्हें शर्म आनी चाहिए !

पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त के उपलब्धियों की फेहरिस्त लंबी है और फेहरिस्त की लम्बी सूची में सबसे प्रथम स्थान रखते हैं पटना जंक्शन के पोस्ट निरीक्षक , जो आरपीएफ के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित है जिनकी लगातार पांचवीं पोस्टिंग पोस्ट पर ही की गई है और प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त से उनका रिश्ता जगजाहिर है और ग़लत घोषणा कर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करते हैं तो सवाल यह उठता है कि प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त से उनका रिश्ता क्या कहलाता है?

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वैसे रेल महकमे में इस बात की बड़ी चर्चा हैं कि आरपीएफ विभाग ने पटना पोस्ट निरीक्षक की उपलब्धियों को मान्यता देते हुए प्रशस्ति पत्र थमा दिया है!
अब आगे आगे देखिए होता है क्या! लेकिन जो होना है तय है ऐसा भागवत कथा में भी सुनने को मिलता है।

आरपीएफ विभाग द्वारा संरक्षित शराब तस्करों द्वारा दो आरपीएफ जवानों की हत्या और शराब तस्करों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों को मनमाफिक पोस्टों पर पदस्थापना भी आरपीएफ के संस्कारों का दर्शन करने के लिए पर्याप्त है!

यदि इतनी अनियमितता बरती जाने के बाद भी पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ विभाग को सुरक्षा शील्ड से नवाजा गया है तो यह व्यवस्था के लिए शर्मशार करने वाली घटना है और पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर को यह पुरस्कार किनके अनुशंसा पर मिला जांच का विषय है लेकिन यदि पुरस्कार भी कारोबार बन जाए तो किस जांच की उम्मीद की जा सकती है!

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