दानापुर: इसी शीर्षक के पिछले आलेख में आपने पढ़ा है कि किस तरह से पूर्व मध्य रेलवे का जगजीवन स्टेडियम जो खेल के लिए है जहां रेल के अधिकारियों ने “लूट का खेल” खेलकर व्यवस्था को शर्मशार ही नहीं किया है बल्कि भारतीय रेलवे को करोड़ों के राजस्व की भी चपत लगाई है जो कि आज़ भी बिना किसी निर्लज्जता के जारी है।
जगजीवन स्टेडियम के देख रेख एवं खेलकूद की गतिविधियों को संचालित करने का जिम्मा Divisional Sport’s Associations, Danapur (मंडल क्रीड़ा संध, दानापुर) के पास है। वर्तमान में दानापुर मंडल के वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी अतुल कुमार मंडल क्रीड़ा संघ के सर्वेसर्वा है और इन्होंने एक ऐसे कर्मचारी को मंडल क्रीड़ा संध का सचिव नियुक्त कर अपनी काबिलियत का दर्शन कराया है जो कि खुद चिकित्सीय आधार पर अपने मूल पद से विकोटिकृत है।
ECR: जगजीवन स्टेडियम में चल रहा “लूट का खेल”!
बात तो सोचने और समझने वाली है कि एक ऐसा कर्मचारी जो चिकित्सीय आधार पर अपने मूल पद से विकोटिकृत है और सबसे बड़ी बात किसी खेल का खिलाड़ी भी नहीं है और वो व्यक्ति यदि मंडल क्रीड़ा संध दानापुर का सचिव नियुक्त किया जाए तो क्या कहा जा सकता है! लेकिन रेल के गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि क्योंकि वो “लूट का खेल” का एक्सपर्ट खिलाड़ी हैं इसलिए उसे “सचिव”नियुक्त किया गया है।
जब “लूट का एक्सपर्ट खिलाड़ी” ब्रजेश चौबे मंडल क्रीड़ा संध का सचिव बन ही गया तो उसने भी “लूट का एक्सपर्ट खिलाड़ी”होने का प्रमाण भी दिया है और जगजीवन स्टेडियम में मंडल क्रीड़ा संध दानापुर के तत्वावधान में चल रही क्रिकेट एकेडमी की व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है।जब से ब्रजेश चौबे ने सचिव का दायित्व संभाला है,सभी सहायक सचिव को निष्क्रिय करने का काम किया है और अपने एक स्वजातीय दिवाकर तिवारी जो कि प्राइवेट कर्मचारी हैं को मंडल क्रीड़ा संध का जिम्मा सौंप कर अपनी मंशा का इजहार किया है,अब एक प्राइवेट कर्मचारी मंडल क्रीड़ा संध का वित्तीय लेनदेन संभालें यह कहां तक न्यायसंगत और तर्कसंगत है जबकि चार सहायक सचिव मनोनीत किए गए हैं।
ब्रजेश चौबे का खास दिवाकर तिवारी क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन फी एवं मासिक फी को क्रिकेट एकेडमी के QR code पर भुगतान न लेकर अपने निजी Google pay एवं Phone Pay पर भुगतान ले रहा है। इसके सत्यता की जांच दिवाकर तिवारी के Google pay एवं Phone Pay के पिछले छः महीने की स्टेटमेंट को देखकर किया जा सकता है।
क्रिकेट एकेडमी के के बच्चों को दी जाने वाली कीट जो बाजार में ₹ 5000 के आसपास मिलता है, बच्चों के अभिभावकों से ₹ 11000 वसूली की जाती है तथा बच्चों को ड्रेस जो ₹2000 में आता है, मंडल क्रीड़ा संध के सचिव के मिलीभगत से दिवाकर तिवारी द्वारा ₹ 3500 में बेचा जा रहा है।
पहले से कार्यरत प्राइवेट कर्मचारी जो जगजीवन स्टेडियम की देखभाल एवं किकेट एकेडमी की व्यवस्था को देख रहें थे, उनसे वेतन बढ़ोतरी के नाम पर भारी कमीशन की मांग की गई जिसके कारण सभी पुराने अनुभवी कर्मचारी काम छोड़कर चले गए।
ये तो हुई जगजीवन स्टेडियम में चल रहे “लूट का खेल”की बात, मंडल क्रीड़ा संध दानापुर के महान सचिव ने भी एन शर्मा इंस्टीट्यूट ग्राउंड में भी अपने लूट की मनोदशा का दर्शन कराने में कोई देर नहीं की है।भी एन शर्मा इंस्टीट्यूट ग्राउंड में भी इनके द्वारा रेल कर्मचारी एवं उनके आश्रितों से ₹ 500 प्रति माह लिया जा रहा है जिससे रेलकर्मियों एवं उनके आश्रितों को खेलकूद एवं स्वास्थ्य लाभ से वंचित किया जा रहा है।
यह तो सभी जानते है कि वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी जो मंडल क्रीड़ा संध के सर्वेसर्वा है ने अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु ही एक बीमार कर्मचारी को मंडल क्रीड़ा संध का सचिव नियुक्त किया है लेकिन अब देखने वाली बात यह होगी कि ज़ोनल खेल अधिकारी श्रीमान पी के चक्रवर्ती जो अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर है और गंगोत्री जैसा जिनका चरित्र है मंडल क्रीड़ा संध दानापुर के कचड़ा को कैसे साफ करते हैं या माफ करते हैं!
इंतजार रहेगा..
सफ़र जारी है..





