दानापुर: भारतीय रेल के सभी मंडलों में खेल का एक मैदान अवश्य ही है, लेकिन संयोगवश दानापुर मंडल मुख्यालय में खेल का दो दो मैदान है, एक है जगजीवन स्टेडियम और दूसरा है भी एन शर्मा इंस्टीट्यूट ग्राउंड । जिस तरह से भारतीय रेल में पिछले दशक में भ्रष्टाचार ने रफ्तार पकड़ी है तो खेल का मैदान भी इससे अछूता कैसे रहता क्योंकि जब “लूट चले हम” अभियान ने रफ्तार पकड़ी तो जगजीवन स्टेडियम भी इस अभियान का शिकार हो गया!
वर्ष 2017 में जब “दबंग” मानसिकता के धनी रंजन प्रकाश ठाकुर ने मंडल रेल प्रबंधक का पदभार ग्रहण किया तो जगजीवन स्टेडियम का निविदा करवा दिया,सब कुछ सुनियोजित तरीके से किया गया, निविदा में एक ही पार्टी शामिल हुआ और Neokite Sport’s Pvt Ltd, Patna को 10.04.2018 से लेकर 09.04.2023 तक जगजीवन स्टेडियम सौंप दिया गया।
जगजीवन स्टेडियम के निविदा में जो खेल हुआ वो भारतीय रेल की वर्तमान व्यवस्था को परिलक्षित करता है क्योंकि निविदा के लिए जो Earnest money ₹ 5000 का ड्राफ्ट लिया गया वो Divisional Sport’s Associations, Danapur के पक्ष में लिया गया। आपको जानकर और भी हैरानी होगी कि उस समय दानापुर मंडल के खेल अधिकारी एम एम हसन वरीय मंडल वित्त प्रबंधक के पद पर आसीन थे और एक वित्त अधिकारी द्वारा निविदा का Earnest money वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी (FA&CAO) के पक्ष में नहीं लेकर Divisional Sport’s Associations, Danapur के पक्ष में लिया जाना कहां तक न्यायसंगत था,जांच का विषय है।
निविदा के एग्रीमेंट में इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि जगजीवन स्टेडियम के बुकिंग से प्राप्त राशि का 30% Divisional Sport’s Associations Danapur को प्राप्त होगा।जब सभी इस बात से अवगत हैं कि रेलवे का कोई भी आय या राजस्व FA&CAO के खाते में जमा किया जाता है तो फिर जगजीवन स्टेडियम के बुकिंग से प्राप्त राजस्व Divisional Sport’s Associations Danapur के खाते में कैसे??
खैर जब 09.04.2023 को एग्रीमेंट का अवधि समाप्त हो गया तो फिर एक साल के लिए विस्तार दिया गया लेकिन इससे भले ही DSA, Danapur को जो भी राजस्व मिला हो लेकिन इतना तो तय है कि भारतीय रेल को जगजीवन स्टेडियम से एक पैसे का भी राजस्व प्राप्त नहीं हुआ जबकि इसके रखरखाव पर अभियंत्रण विभाग द्वारा ₹ 19,76,981 रूपया खर्च गया।
कहा जा सकता है “माल महाराज का और मिर्जा खेले होली”!
खैर आपकों बताते चलें कि Railwellwishers ने जगजीवन स्टेडियम को निविदा पर Neokite Sport’s Pvt Ltd Patna को दिए जाने पर आरटीआई के माध्यम से जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास करता रहा और आरटीआई द्वारा जानकारी मांगने पर ही जगजीवन स्टेडियम Neokite Sport’s Pvt Ltd के कब्जे से मुक्त हो पाया लेकिन कहते हैं ना यदि एक बार चस्का लग जाए तो आदत छुटती नहीं ठीक वही हुआ है जगजीवन स्टेडियम मामले में।
आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि Neokite Sport’s Pvt Ltd Patna ने अनुबंध के तहत जगजीवन स्टेडियम में क्रिकेट एकेडमी ऑफ पठान के नाम से एक क्रिकेट एकेडमी खोली,चुकी क्रिकेट का खेल अब एक व्यापक व्यापार बन चुका है तो Neokite Sport’s Pvt Ltd Patna ने भी अच्छे तरीके से क्रिकेट एकेडमी ऑफ पठान के नाम पर व्यापार किया और भरपूर लाभ कमाया।जब निविदा की अवधि समाप्त हो गई तो Divisional Sport’s Associations Danapur ने अपने मंडल के कुछ क्रिकेट खिलाड़ियों के देख रेख में एक क्रिकेट एकेडमी की शुरुआत की जो आज भी अनवरत जारी है।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आज़ भी Divisional Sport’s Associations Danapur द्वारा जगजीवन स्टेडियम में एक क्रिकेट एकेडमी का संचालन किया जा रहा है जहां रेलवे के पांच कर्मचारियों द्वारा इस एकेडमी का संचालन किया जा रहा है।
अब आप ही बताइए ऐसा अनोखा और अनुपम मामला भारतीय रेल में कहीं देखने को नहीं मिलेगा जहां रेलवे कर्मचारियों द्वारा क्रिकेट एकेडमी संचालित किया जा रहा हों! क्या यह कहावत “माल महाराज का मिर्ज़ा खेले होली”को चरितार्थ नहीं करता!
वर्तमान में दानापुर मंडल के काबिल और महाज्ञाता वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी श्रीमान अतुल कुमार Divisional Sport’s Associations Danapur के सर्वेसर्वा है और उन्होंने एक ऐसे कर्मचारी को Divisional Sport’s Associations को सचिव बना दिया है जो कि किसी भी खेल का खिलाड़ी नहीं है लेकिन “लूट का खेल” का बड़ा ही शातिर खिलाड़ी हैं और चिकित्सकीय आधार पर विकोटिकृत है!
आपको जानकर और भी आश्चर्य और हैरानी होगी कि Divisional Sport’s Associations Danapur को प्रति वर्ष लगभग ₹ 25 लाख मिलता है तो फिर खेल के नाम पर मिल रहा ₹25 लाख रुपया और किकेट एकेडमी से प्राप्त आय कहां व्यय हो रहा है??
अपनी ईमानदारी के लिए विख्यात और भारतीय रेल के प्रति सच्ची निष्ठा रखने वाले वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी श्रीमान अतुल कुमार जिनके कारनामों से सत्य हरिश्चन्द्र भी शरमा जाए क्या यह बताने का प्रयास करेंगे कि Divisional Sport’s Associations Danapur द्वारा क्रिकेट एकेडमी संचालित करने से भारतीय रेल को कितने राजस्व की प्राप्ति होती है??
सवाल गंभीर इसलिए हैं क्योंकि किकेट एकेडमी भारतीय रेल के कर्मचारियों द्वारा चलाया जा रहा है।
बात गंभीर ही नहीं विशेष है और कहानी अभी शेष है।
विशेष अगले अंक में…
सफ़र जारी है….





