पटना: विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 06.06.2026 को रेलवे सुरक्षा बल, पटना पोस्ट का कई महीनों से प्रभार संभाल रहे निरीक्षक मृणाल कुमार के विरुद्ध अवैध वेंडिंग, अनधिकृत दुकानदारी एवं रेलवे परिक्षेत्र में व्याप्त अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई की गई है। सूत्रों का दावा है कि इस मामले में वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त, दानापुर द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने का आदेश जारी किया गया है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त स्वयं पटना में उपस्थित रहकर रेलवे परिसर में संचालित अवैध वेंडरों एवं दुकानदारों के विरुद्ध व्यापक स्तर पर धर-पकड़ एवं गिरफ्तारी अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि निरीक्षक मृणाल कुमार की मूल पदस्थापना मंडल स्टोर, दानापुर में है। पटना पोस्ट के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक के स्थानांतरण के पश्चात उन्हें अस्थायी रूप से पटना पोस्ट का प्रभार सौंपा गया था। उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे परिसर में अवैध वेंडिंग, अतिक्रमण तथा अनधिकृत व्यवसायों की निरंतर शिकायतें सामने आती रही हैं।
हालांकि इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी उठता है कि यदि रेलवे परिसर में इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो क्या इसकी जिम्मेदारी केवल पटना पोस्ट के प्रभारी निरीक्षक तक ही सीमित मानी जानी चाहिए?
रेलवे सुरक्षा बल की कार्यप्रणाली से परिचित लोगों का मानना है कि रेलवे परिक्षेत्र में अवैध वेंडिंग, अतिक्रमण तथा अन्य अनधिकृत गतिविधियों की रोकथाम की जिम्मेदारी केवल संबंधित पोस्ट की ही नहीं, बल्कि सीआईबी (Crime Intelligence Branch) की भी होती है। सीआईबी का प्रमुख दायित्व खुफिया सूचनाओं का संकलन, सीसीटीवी कैमरा का निरीक्षण और अवैध गतिविधियों की पहचान तथा समय रहते उच्च अधिकारियों को सतर्क करना है।
सूत्रों के अनुसार, दानापुर मंडल में सीआईबी का दायित्व संभाल रहे निरीक्षक राजकुमार के क्षेत्राधिकार में भी पटना रेलवे स्टेशन और उससे संबंधित रेलवे परिसर आता है। ऐसी स्थिति में यदि लंबे समय से अवैध वेंडिंग एवं अतिक्रमण की गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि इन गतिविधियों की जानकारी सीआईबी को क्यों नहीं हुई, अथवा यदि हुई तो उस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कई जानकारों का मानना है कि यदि अवैध वेंडिंग और अतिक्रमण के आरोपों को आधार बनाकर पटना पोस्ट के प्रभारी निरीक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है, तो निष्पक्षता की दृष्टि से सीआईबी की भूमिका एवं उसकी जवाबदेही की भी समान रूप से जांच होनी चाहिए। आखिरकार, रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में खुफिया निगरानी और क्षेत्रीय नियंत्रण एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं। यदि एक पक्ष विफल रहा है तो दूसरे पक्ष की भूमिका की भी समीक्षा आवश्यक है।
सूत्र यह भी चर्चा कर रहे हैं कि निरीक्षक राजकुमार इस प्रकरण के सामने आने के बाद सार्वजनिक रूप से सक्रिय दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद कर्मचारियों के बीच यह धारणा अवश्य बन रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तभी संभव होगी जब पटना पोस्ट के साथ-साथ सीआईबी दानापुर की भूमिका, कार्यप्रणाली, सूचना संकलन तंत्र निरीक्षक राजकुमार का पटना मे रहना तथा उत्तरदायित्व का भी समान मानकों पर पटना स्टेशन पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरा का परीक्षण किया जाए।
रेलवे सुरक्षा बल के उच्च अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अवैध वेंडिंग, अतिक्रमण और अनधिकृत व्यवसायों के उन्मूलन हेतु कठोर निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। किंतु यदि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का प्रभाव दिखाई नहीं देता, तो यह केवल किसी एक अधिकारी की विफलता नहीं बल्कि पूरे निगरानी एवं जवाबदेही तंत्र की कमजोरी का संकेत माना जाएगा। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि मामले की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच कर यह निर्धारित किया जाए कि जिम्मेदारी किस-किस स्तर पर बनती है तथा दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।





