दानापुर मंडल – टेंडर में खेल, अधिकारियों की अराजकता और गुंडागर्दी के आगे नियम-कानून बेबस !

दानापुर मंडल – टेंडर में खेल, अधिकारियों की अराजकता और गुंडागर्दी के आगे नियम-कानून बेबस !

दानापुर. टेंडर में अपने चहेते कांट्रेक्टर को काम दिलाने में असफल हुए राजकुमार ( काल्पनिक नाम ) के ग़ुलाम और प्रतिबद्ध अधिकारियों की टीम इस टेंडर को डिस्चार्ज करने के लिए डीएसआर डीएसआर का खेल खेल दिया गया है । सुनने में आया है साहब लोग राजकुमार के प्रति इतने कमिटेड हैं कि कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं जब पता लगाया तो यह पता चला कि एक साहब जो इस टेंडर कमेटी के कन्वेनर हैं उनसे पुराना नाता है ।

राजकुमार को उनके सारे राज पता हैं और उसी के नाम पर ब्लैकमेल हो रहे हैं। साहब बिना मटेरियल सप्लाई के बिल पास करने में एक्सपर्ट हैं और अगर बिल राजकुमार का है तो कोई सवाल जवाब नहीं होता फिर चाहे सरकार को जीएसटी के नाम पर सैकड़ों करोड़ का चूना लग जाए । दानापुर मंडल में साहब द्वारा बिना सप्लाई के बिल पास करने का एक मामला विजिलेंस में लंबित है ।

पूर्व मध्य रेल के विजिलेंस की महिमा अपरंपार है इनका सूत्र वाक्य है एक भी दोषी फंसे नहीं और एक भी शरीफ बचे नहीं । ऊपर से स्वजातीय एसडीजीएम का भरपूर सहयोग और समर्थन है तो डरने की कोई बात नहीं है । जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है कि बिना किसी कारण के एक सतही कारण बता कर एक बहुत ही महत्वपूर्ण यात्री सुविधा का कार्य जो सीआरबी के सीधे निर्देश पर हो रहा है उसको लटकाने भटकाने का गन्दा प्रयास किया जा रहा है ।

अधिकारियों की गुंडागर्दी का ये आलम है कि उनको किसी का डर नहीं है सही बात भी जहां अमित साथ हो तो मिटने का कैसा डर ऊपर से राजकुमार की छत्रछाया और माया । वर्तमान टेंडर को डिस्चार्ज करके सिविल इंजीनियरिंग के एक दो आइटम्स को इधर उधर करके फिर वही टेंडर जारी किया जाएगा ताकि राजकुमार इस बार चुके नहीं ।

पूर्व मध्य रेल के प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं है वहां सारे अधिकारी ठीकेदारों की जेब में है रेलवे बोर्ड से अनुरोध है इस टेंडर में शामिल अधिकारियों को बदल कर इस टेंडर की नए सिरे से जांच HQ या किसी और मंडल जहां सीनियर अधिकारी हो से करायी जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके । इस मामले में एक बेवजह मुद्दे पर टेंडर का डिस्चार्ज करना अधिकारियों की गुण्डागर्दी है ऐसे सारे अधिकारियों टेंडर के पावर्स जब्त कर लिए जाएं ।

जीएम के लिखित आदेश में मना करने के बाद टेंडर करने वाली टीम अपने मनमर्जी और मनमानी पर उतारू है । सीआरबी के निर्देश को ढेंगा दिखा रहे है । भले ही आप सीआरबी हो जाएं लेकिन आपके इतिहास को रौंदा ही जाएगा हर बार बताया जाएगा की आपकी सही जगह क्या है ? सीआरबी से सीधा अनुरोध इस टेंडर को तुरंत दूसरे टेंडर कमेटी को भेजा जाए और फिर फैसला हो या फिर SAG कमिटी फैसला करे । वैसे भी ये कम्पोजिट टेंडर है इसमें सिविल इंजीनियरिंग का भी मेम्बर होना चाहिए लेकिन ध्यान रहे वो लोग दानापुर मंडल से ना हो , क्यूंकि वहां एक दूसरे के रिश्तेदार है । भारतीय न्याय में यह सर्वविदित है कि भले १०० गुनहगार बच जाए लेकिन एक बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिए लेकिन यहां उल्टी गंगा बह रही है । टेंडर कमेटी के सारे मेंबर्स को बदल देना चाहिए और नयी टेंडर कमेटी को फैसला करना चाहिए ।

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