पटना: 90 के दशक में रेलवे स्टेशनों के ए एच व्हीलर्स के दुकानों पर वेद प्रकाश शर्मा द्वारा लिखित एक चर्चित थ्रिलर उपन्यास “वर्दी वाला गुंडा” बड़ा ही चर्चित हुआ था। बदलते समय में ए एच व्हीलर्स बुक स्टाल मल्टी पर्पस स्टोर में तब्दील हो गया और पूर्व मध्य रेलवे का आरपीएफ विभाग “वर्दी वाला गुंडा” की भूमिका में।
भले ही आरपीएफ विभाग का मूल मंत्र है “कर्म ही पूजा है”,लेकिन इनका खेल अजूबा है।
पिछले दिनों 22 फरवरी 2026 को ट्रेन संख्या 13287, जो छत्तीसगढ़ के दुर्ग से चलकर बिहार के आरा जंक्शन तक चलती हैं, के प्रथम श्रेणी कोच संख्या एच 01 में एक नव दम्पति बिलासपुर में शादी कर पटना लौट रहे थे ,खुशरूपुर स्टेशन पर कुछ लफंगे सवार हुए और जबरदस्ती प्रथम श्रेणी के कोच संख्या एच 01 के कूप को खुलवाने हेतु अथक प्रयास किया,नव दम्पति द्वारा अपने साथ चल रहे अपने परिवार जनों को जो ट्रेन के दूसरे डब्बों में सफर कर रहे थे, को मोबाइल फोन से सूचित किया गया तो फतुहा स्टेशन पहुंचते ही परिवारजन पहुंचे.
जोरदार हंगामा हुआ, ट्रेन एक घंटे से ज्यादा तक फतुहा स्टेशन पर खड़ी रही लेकिन लफंगे आरपीएफ एवं जीआरपी के पकड़ में नहीं आया,आता भी कैसे जब सब कुछ उसके आका के संरक्षण में ही हो रहा हो।
विश्वसनीय सूत्रों से जो जानकारी मिली वो चौंकाने वाली है क्योंकि जो लफंगे प्रथम श्रेणी के कोच संख्या एच 01 में खुशरूपुर स्टेशन पर सवार हुए थे,वो कोई आम नही, आरपीएफ एवं जीआरपी का अवै्ध ठीकेदार शंकर यादव था जो कि अवैध वेंडरों से वसूली का काम करता है, नव दम्पति को लूटने के उद्देश्य से ही प्रथम श्रेणी के कूप को खुलवाने का अथक प्रयास किया था।

इस मामले में आरपीएफ एवं जीआरपी की भूमिका वहीं रही जिसके लिए दोनों विख्यात एवं कुख्यात है।
वैसे यह पहली घटना नहीं है,20 दिसम्बर 2025 की घटना भी आरपीएफ विभाग के लिए एक कलंक ही था जब आरपीएफ का संरक्षण प्राप्त शराब तस्करों ने ट्रेन संख्या 12488 सीमांचल एक्सप्रेस को आरा- कुल्हड़िया के मध्य रोककर शराब की खेप उतारी और आरपीएफ के एस्कार्ट पार्टी द्वारा प्रतिकार करने पर पत्थरबाजी कर यात्रियों को दहशतगर्द करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
यदि आरपीएफ विभाग के कारनामों की चर्चा की जाए तो रोज़ एक कहानी बन जाएगी लेकिन पटना जंक्शन की एक घटना का जिक्र ज़रूरी है। पटना जंक्शन पर आईआरसीटीसी द्वारा संचालित खान पान सेवा से जुड़े दुकानदारों ने जब अवैध वेंडरों की बढ़ती ज्यादती से वाणिज्य विभाग के सक्षम अधिकारियों को अवगत कराया तो वाणिज्य विभाग ने जुलाई 2025 में अवैध वेंडरों को पकड़ने का अभियान चलाया, लगभग दर्जनों अवैध वेंडरों को पकड़ा गया और उनसे बिना टिकट का दंड वसूला गया तो आरपीएफ ने ऐसा आंख दिखाया कि वाणिज्य विभाग का अभियान फुस्स हो गया।
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आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पटना जंक्शन के दस प्लेटफार्म पर लगभग 750 वेंडरों का अवैध कब्जा है,हर प्लेटफॉर्म पर 25 की संख्या में वेंडर है और तीन शिफ्ट में अपने कारनामों को अंजाम देकर अपने आका को धनकुबेर बना चुके हैं।
दानापुर रेलवे स्टेशन की स्थिति तो ऐसी हो गई है कि प्लेटफार्म संख्या 01 एवं 01ए पर आने वाले गाड़ियों के एसी कोच तक ऑटो रिक्शा चालक पहुंच जाते हैं,तब आप सोच सकते है कि स्थिति कितनी भयावह है।आप यह भी कह सकते हैं कि यात्रियों की सुरक्षा रामभरोसे ही है , लेकिन फिर भी यदि पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ विभाग को सुरक्षा शील्ड मिल जाए तो क्या कहा जा सकता है! लेकिन इतना तो तय है कि पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ विभाग को सुरक्षा शील्ड दिलाने में जिन्होंने भी अपनी भूमिका से अन्याय किया है,यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसा अन्य आय के लिए किया गया है जो कि शर्मशार करने वाला है।
आने वाले दिनों में यदि ऐसे ही हालात रहे तो स्टेशनों पर यह उद्घोष भी सुनने को मिल सकता है कि “यात्री गण अपनी सुरक्षा स्वयं करें, आरपीएफ अपने अधिकारियों एवं कमाऊ पूत”अवैध वेंडरों”की सुरक्षा में तैनात हैं।
आरपीएफ की एक और कहानी अगले अंक में..
सफ़र जारी है…





