पटना: पूर्व मध्य रेलवे को भारतीय रेलवे का एक “अभूतपूर्व” ज़ोन वैसे ही नहीं कहा जाता क्योंकि यहां उपलब्धियों से ज्यादा काले कारनामों की चर्चा होती है। काले कारनामों की चर्चा करने के पहले काले कारनामे करने वाले “नायक” या “खलनायक”की चर्चा ज़रूरी है।
आज़ की कहानी “आरपीएफ एवं पीडब्लूआई की मिलीभगत से हो रही रेलवे सम्पत्ति की चोरी”के पहले “नायक” या “खलनायक” है, पूर्व मध्य रेलवे, दानापुर के आरपीएफ निरीक्षक पी के वर्णवाल जो पूर्व में दानापुर में ही अपराध अनुसंधान शाखा के निरीक्षक थे और अपराध अनुसंधान शाखा में पदस्थापना के पूर्व पाटलिपुत्र स्टेशन पर पदस्थापित थे,आप यह भी कह सकते हैं कि पिछले 09 साल में इनकी पदस्थापना 05 किलोमीटर क्षेत्र के अन्दर ही हुआ है और जब लम्बे समय से पाटलिपुत्र और दानापुर में ही पदस्थापित है तो इनके मनोदशा को समझा जा सकता है।
आरपीएफ एवं अभियंत्रण विभाग की मिलीभगत से हो रही है रेलवे सम्पत्ति की चोरी!
इस कहानी के दूसरे “नायक” या “खलनायक” है दानापुर के वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) राकेश कुमार जो लगभग दो दशकों से दानापुर में ही पदस्थापित है, इनके भ्रष्टाचार और अत्याचार की सूची लम्बी है, यदि इनके भ्रष्टाचार और अत्याचार पर लिखा जाए तो एक कहानी नहीं उपन्यास बन जाएगा, क्योंकि दानापुर में लम्बे समय से पदस्थापना इन्हें “कृपा” से मिली है, “कृपा” निर्मल बाबा से मिली हो या दिनेश बाबू से!
“कृपा” का इन्होंने भरपूर लाभ उठाया है लेकिन अपने कारनामों से अभियंत्रण विभाग को शर्मशार करने एवं नुकसान पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
पिछले दिनों 18.02.2026 दिन बुधवार के अहले सुबह अब्दुल बारी पुल जो कि कोईलवर पुल के नाम से विख्यात है, रेलवे की सामग्री के साथ दो चोर को पकड़ा गया और रेलवे का क्षेत्राधिकार होने के चलते पकड़े गए चोरों को आरपीएफ दानापुर को सौंप दिया गया।इस खबर को “दैनिक भास्कर” जैसे प्रतिष्ठित अखबार जो कहता है कि “सच्ची बात बेधड़क” , ने अपने खबरों में स्थान दिया। लेकिन दानापुर के आरपीएफ निरीक्षक पी के वर्णवाल एवं दानापुर के वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) राकेश कुमार ने चोरी के मामले को दर्ज नहीं किया और चोरी के इस मामले को रफा-दफा करने में ही अपनी भलाई समझी।
आरपीएफ एवं अभियंत्रण विभाग की पकड़ी गई चोरी! सतर्कता विभाग के आदेश पर एफआईआर दर्ज।
ऐसा नहीं है कि इस तरह का यह पहला मामला है, पिछले वर्ष जुलाई 2025 में भी आरपीएफ एवं वरीय प्रशाखा अभियंता (कार्य) काॅलोनी, दानापुर द्वारा मिलीभगत से स्क्रैप की चोरी दिनदहाड़े हों रही थी, और जब किसी व्यक्ति द्वारा सतर्कता विभाग को चल रही दिनदहाड़े हो रही चोरी की जानकारी दी गई तो सतर्कता विभाग को भी मैनेज कर लिया गया और सब कुछ नियमानुसार बताया गया लेकिन जब तथ्यों एवं प्रमाणों के साथ चोरी के इस मामले को Railwellwishers ने रेल पटल पर सफलतापूर्वक रखा तो आनन-फानन में सतर्कता विभाग के आदेश पर आरपीएफ दानापुर ने एफआईआर दर्ज की लेकिन एफआईआर दर्ज कराई गई निर्दोष ट्रैक्टर मालिक एवं चालक पर, क्योंकि इस मामले में सबसे कमजोर कड़ी वहीं थे।
इस मामले के दोनों “नायक” या “खलनायक” का इतिहास दागदार रहा है।वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) राकेश कुमार ने पूर्व में कोईलवर स्टोर से हुई चोरी में एक निर्दोष एवं भोले भाले चौकीदार को फंसा दिया जो अधिकृत रूप से छुट्टी पर गया था और ड्यूटी पर तैनात चौकीदार किसी साहब के यहां चौकीदारी कर रहा था, सबसे दुखद तो यह है कि आज़ उस निर्दोष चौकीदार से हर महीने वेतन से कटौती हो रही है और पदोन्नति के बाबजूद चौकीदार के रूप में कार्य करने को विवश।

आरपीएफ निरीक्षक पी के वर्णवाल के कारनामों पर भी कहानी के बदले उपन्यास लिखा जा सकता है, क्योंकि bad(e) साहब ने इनके उपहार के बदले में अपने प्यार और दुलार में इन्हें दानापुर का पदभार दिया है और इन्होंने अपने कारनामों से bad(e) साहब को निराश भी नहीं किया है।जब 17 अगस्त 2025 को विभूति एक्सप्रेस में आरपीएफ मार्ग अनुरक्षण दल द्वारा एक यात्री से ₹1.50 लाख की छिनतई हुई थी और पीड़ित यात्री ने छिनतई करने वाले दोनों सिपाहियों को पहचान लिया था,तब भी अपने bad(e) साहब को खुश करने के लिए इन्होंने जीआरपी दानापुर में रात्रि के 11 बजे से लेकर अगले दिन 11 बजे तक तब तक जीआरपी में डटे रहे जब तक मामले का निपटारा नहीं कर दिया।
भले ही दोनों का दामन दागदार रहा है लेकिन नामदार तो दोनों ही है। सच्ची बात बेधड़क कहने वाले दैनिक भास्कर ने तो अपना काम कर दिया है और आरपीएफ निरीक्षक पी के वर्णवाल एवं वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) ने वही किया है जिसके लिए वो “नामदार” है।
इस मामले में जब दानापुर के वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त उदय सिंह पवार से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि देखते हैं,अब देखने वाली बात यह है वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त इस मामले को कब देखते हैं?
लेकिन वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) एवं आरपीएफ निरीक्षक के कारनामों पर Railwellwishers की नजर बनी रहेगी।
सफ़र जारी है…





