पटना: उत्तम भाई चारा – कौन है ये उत्तम पुरुष जिनको रेल व्हील प्लांट,बेला से इतना प्यार है कि वहां से जाना ही नहीं चाहते हैं, रेलवे बोर्ड से स्थानांतरण आदेश निर्गत होने के बाद भी वो वहीं रहने के लिए जुगत जुगाड़ लगा कर सफल हो गए । बहुत दिनों तक सीएओ के सेक्रेटरी रहने के बाद आदत ख़राब हो गई है, साहब को नाफ़रमानी एकदम पसंद नहीं है। अगर कोई भी इनके उत्तम विचार में हां में हां नहीं मिलाता है तो ये विजिलेंस का सहारा लेने लगते हैं, आख़िर बेला में ऐसा क्या होता है कि लोग बाग सालों साल से जुगाड़ लगा कर वहीं रह रहे हैं।
इनलोगों के कारण बेला व्हील प्लांट भ्रष्टाचार की गंगोत्री बनती जा रही है । इनका पूर्व मध्य रेलवे के विजिलेंस वाले bad(e) साहब से क्या संबंध है जिसके कारण इनके आदेश के विरुद्ध रेलवे हित में काम करने वालों को विजिलेंस के जांच के दायरे में ला दिया जाता है । विजिलेंस वाले साहब बहुत दिनों तक बेला में अपनी सेवाएं दे चुके हैं । उनके कारनामे के किस्से बहुत दूर तक फैले हैं किस तरह से स्वजातीय CAO के छत्र छाया में इन्होंने नियम कानून की धज्जियां उड़ाई हैं । इनके बेला के कारनामों के मुद्दे पर आगे लिखा जाएगा।
बेला में खुलकर भ्रष्टाचार हो रहा है और विजिलेंस वाले बाबू सिर्फ अपने स्टोर की चिंता कर रहे हैं स्क्रेप के लूट का खुला खेल हो रहा है । रेलवे बोर्ड ने बेला को अधिकारियों के लिए पनिशमेंट सेंटर का अघोषित दर्जा दिया हुआ है लेकिन एक दो अधिकारी वहां रहने के लिए जुगाड़ लगा रहे,ये हज़म नहीं हो पा रहा है । जिनको भ्रष्टाचार रोकने की ज़िम्मेदारी मिली हुई है वो मिलीभगत कर मजा ले रहे हैं।
आख़िर बेला में ऐसा कौन सा अमृत है जिसका पान उत्तम पुरुष कर रहे हैं और उनका विजिलेंस वाले साहब से क्या भाईचारा है कि इनके ख़िलाफ़ जाने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। ईसीआर विजिलेंस ने बेला को उगाही का केंद्र बना दिया है । व्हील प्लांट बेला को सीधे रेलवे बोर्ड विजिलेंस के हवाले कर देना चाहिए। भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री जो 52 सप्ताह 52 सुधार की बात कह अपना प्रचार करते हैं क्या रेल व्हील प्लांट, बेला में चल रहे “उत्तम भाईचारा” उत्तम भ्रष्टाचार पर विचार कर उत्तम सुधार की बात करेंगे!




