अब कटरा से श्रीनगर की यात्रा वंदे भारत ट्रेन से मात्र 3 घंटे में होगी

अब कटरा से श्रीनगर की यात्रा वंदे भारत ट्रेन से मात्र 3 घंटे में होगी

संभावना है इसी अप्रैल’25 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ,वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखा कर,देशवासियों को देंगे सौगात

38 सुरंगों के जरिए होगी रोमांचकारी और यादगार यात्रा

ट्रेन के चालू होने से जम्मू श्री नगर के बीच यात्रा का समय कम होगा,पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा

श्रीनगर। धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर में पहली वंदे भारत ट्रेन होगी, जो यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव देगी. यह ट्रेन कश्मीर से कन्याकुमारी तक, देश के अन्य हिस्सों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी. ट्रेन चालू होने से जम्मू और श्रीनगर के बीच सुरक्षित यात्रा का समय कम होगा, जिससे पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.
संभावना है कि इस मार्ग पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 अप्रैल को हरी झंडी दिखा कर रवाना कर सकते हैं।

यूएसबीआरएल परियोजना के पश्चात अब कई सालों का इंतजार खत्म हो जाएगा। जम्मू से श्रीनगर के बीच वंदे भारत चलने से कई घंटों की समय बचत होगी। कटरा से श्रीनगर कि यात्रा अब केवल 3 घण्टे में होगी। अभी सड़क से यात्रा में 6 से 7 घंटे लगते है। फिलहाल वंदेभारत को कटरा से श्रीनगर के बीच चलाने की योजना बनायी गयी है। अभी वैली में श्रीनगर से लेकर संगलदान तक ट्रेनों का आवागमन होता है। अब , संगलदान से कटरा तक रेललाइन चालू होने के बाद इन ट्रेनों को कटरा तक चलाया जा सकता है।
यूएसबीआरएल परियोजना : वर्ष 2009 में काजीगुंड-बारामूला सेक्शन शुरू हो गया था। वर्ष 2013 में 18 किलोमीटर बनिहाल-काजीगुंड सेक्शन, वर्ष 2014 में 25 किलोमीटर ऊधमपुर-कटरा, वर्ष 2023 में बनिहाल से संगलदान और अब संगलदान से कटरा के बीच शुरू होने वाली है। दुनिया का सबसे ऊंचा रेल आर्च ब्रिज- चिनाब ब्रिज इस परियोजना का हिस्सा है। टनल, पुल और वैली से अब रेल सफर और आनंदमय होगा।

श्रीनगर और बारामुला को जोड़ने वाली कटरा से श्रीनगर के बीच 119 किलोमीटर रेल मार्ग में ऊंची ऊंची पहाड़ों,हजारों फीट गहरी खाइयों के बीच बने सब से महत्वपूर्ण दुनियां का सब से ऊंचा अद्भुत चिनाब ब्रिज और अंजी केबुल ब्रिज का निर्माण किया गया है। जो सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए भारत के इंजीनियरिंग के कामयाबी का इतिहास लिखा जायेगा
इस परियोजना में 119किलोमीटर मार्ग में बने कुल 38 सुरंगों में 96 किलोमीटर की यात्रा इसी बने सुरंगों के जरिए होगी। जो यात्रियों के लिए बेहद यादगार , रोमांचकारी और अद्भुद नजारा पेश करेगी। इस में सब से लंबी यातायात सुरंग टी-49,12.75 किलोमीटर और टी-80,11.2 किलोमीटर की है। इस परियोजना में 931 पुल शामिल है। जिसकी संयुक्त लंबाई 13 किलोमीटर है।
भारतीय रेल सुरक्षा के सभी मानकों पूरा कर लिया है। इसका ट्रायल रन भी हो चुका है।
रेलवे सूत्रों का कहना है,इसके उद्घाटन कार्यक्रम के लिए पूरी तरह से बिलकुल तैयार हैं।
उम्मीद की जा रही है कि वर्षों उम्मीद लगाए लोगों की,धरती के स्वर्ग ,कश्मीर की यादगार यात्रा जल्द ही पूरी होने वाली है।

चिनाब रेल पुल के बारे में विशेष जानकारी कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड के डिप्टी चीफ इंजीनियर आरआर मल्लिक ने देते हुए बताया कि यह पुल 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलनेवाली हवा के दबाव को झेल सकता है. यह क्षेत्र जोन चार (भूकंप) में आता है. लेकिन इस रेल पुल का निर्माण जोन पांच श्रेणी को देखते हुए किया गया है. इस पुल में करीब छह लाख बोल्ट लगाये गये हैं, जो हाई स्ट्रेंथ फिक्शन ग्रिप वाले है. पुल की लागत 1486 करोड़ रुपये है. पुल की कुल लंबाई 1315 मीटर है. पुल में 17 स्पैन लगाये गये है. इस पुल पर 100 किलोमीटर की गति से ट्रेन दौड़ सकती है.
आठ वर्षों में बन कर तैयार हुआ यह पुल, एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा है और दिल्ली की कुतुब मीनार से लगभग तीन गुना ज्यादा ऊंचा है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस पुल के डिजाइन की जीवन अवधि 120वर्ष है।
कटरा-बारामूला खंड पर बक्कल और संगलदान स्टेशनों के बीच बना कंथान हॉल्ट स्टेशन है।

अंजी खड्ड ब्रिज: भारतीय रेलवे पर “पहला केबल-स्टेड ब्रिज” है, जो जम्मू और कश्मीर में कटरा और रियासी को जोड़ता है। यह पुल हिमालय के युवा तह पहाड़ों में स्थित है, जिसमें क्षेत्र में दोष, तह, जोर और भूकंपीय प्रवृत्ति के रूप में अत्यंत जटिल, नाजुक और चुनौतीपूर्ण भूवैज्ञानिक विशेषताएं हैं।
अंजी खड्ड पर मुख्य पुल 473.25 मीटर की कुल लंबाई बाला एक केबुल पर आधारित ब्रिज है,जिसका मुख्य स्पेन 290 मीटर का है।
अंजी खड्ड पुल 82 मीटर से 295 मीटर तक की लंबाई वाले 96 केबलों पर आधारित है। मुख्य पलायन के निर्माण में 20 मीटर हाईब्रीड वैल फाउंडेशन की परिधि के चारों ओर 40 मीटर गहराई के माइक्रोपाइल्स का उपयोग किया गया है।
इस लाइन का डिजाइन 100 किलोमीटर प्रति घंटा क्षमता के अनुरूप तैयार किया गया है,जो ट्रेन संरचना संपर्क के लिए ,कोई बाधा उत्पन्न नहीं करती है।

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