हाजीपुर: भारतीय रेलवे का बल, रेलवे सुरक्षा बल, जिसका मूलमंत्र है “यशो लभस्व” कर्म ही पूजा है लेकिन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महानिरीक्षक – सह – प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त श्री अमरेश कुमार द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश संख्या 21/2025 से परिलक्षित होता है कि इनका खेल अजूबा है और स्थानांतरण आदेश जारी करने में भाई भतीजावाद, जातिवाद और लक्ष्मी वाद का पुरा ख्याल रखा गया है। रेलवे सुरक्षा बल के स्थानांतरण नीति को ताक पर रखकर करोड़ों की डील हुई है और इसमें आरपीएफ विभाग के वैसे निरीक्षकों की संलिप्तता है जो पैसे के बल पर लगातार मनमाफिक पोस्ट पर तैनाती पाते रहे हैं।
पाटलिपुत्र स्टेशन के चर्चित निरीक्षक शंकर अजय पटेल पटना जंक्शन पोस्ट पर तैनाती पाने में सफल रहे हैं, विदित है कि फतुहा पोस्ट से आरपीएफ पोस्ट दानापुर और दानापुर से पाटलिपुत्र और पाटलिपुत्र पोस्ट से पटना जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर एक ऐसे निरीक्षक की स्थापना जिन्होंने अपने कारनामों से विभाग को शर्मसार किया है वैसे निरीक्षक की पदस्थापना पटना जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर करना भाई भतीजावाद और जातिवाद का दर्शन नहीं तो और क्या है? ऐसा लगता है आरपीएफ के आईजी साहब ने अपना भाई साहब खोज निकाला है!

दानापुर सीआइबी में पदस्थापित प्रदीप कुमार वर्णवाल अपने जुगाड टेक्नोलॉजी एवं राजनैतिक कृपा से दानापुर पोस्ट पर तैनाती पाने में कामयाब हो कर्मयोगी कर्मियों को चुनौती पेश किया है।
जिस अजय कुमार सिंह पर चोपन में पदस्थापना काल में कोयला चोरी में संलिप्तता के कारण धनबाद मंडल के कमांडेंट तारिक अहमद को असमय ही तबादला का दंश झेलना पड़ा, हजारीबाग से पतरातु पोस्ट पाने में कामयाब रहे हैं, वहीं गया के आरपीएफ निरीक्षक अजय प्रकाश जिन पर गया जीआरपी में महिला आरक्षी के साथ दुराचार का केस दर्ज है और यात्रियों से रूपए लूटने का आरोप है वैसे निरीक्षक को धनबाद आरपीएफ पोस्ट पर तैनाती सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त है।





News bahut badiya hai sir ji ECR Railway mein sab kuch sambhav hai
अवैध वेंडरों को गाड़ियों तथा स्टेशनों से मुक्त किया जाय, पटना जं पार्किंग व्यवस्था को सही,करने की जरूरत है, यात्रियों का सामान, मोबाइल वगैरह चोरी की घटना को रोकना पहला प्राथमिकता होनी चाहिए।