हाजीपुर। निर्णय लेना किसी चीज के बारे में अपना मन बनाना है, निर्णय के साथ कार्य करना दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना है जो एक स्वाभाविक चरित्र विशेषता हो सकती हैं। लेकिन पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता श्री आर के चौधरी ने अपने निर्णय को बार-बार बदलकर रेल महकमा में “पलटीमार” की उपाधि पा ली हैं और उपाधि मिलें भी तो क्यूं नहीं मिले।
यदि एक बार अपने निर्णय को पलटना पड़े तो समझा जा सकता हैं कि निर्णय लेने में कोई चूक रह गई हो लेकिन यदि निर्णय को तीन तीन बार पलटना पड़े तो निर्णय लेने वाले के मंशा पर शंका होना स्वाभाविक है और यह मंशा पर शंका नहीं, मंशा की हकीकत है।

श्री संजीव कुमार sr.DEE /OP/DHN के पद पर धनबाद मंडल में पदस्थापित हैं, पूर्व में दानापुर से धनबाद मंडल में इनका स्थानांतरण आदेश संख्या GAZ/221/2021 दिनांक 08.12.2021 को हुआ था। इनके तबादला का पहला आदेश धनबाद मंडल में ही Sr DEE/TRD/DHN के पद पर होता हैं लेकिन आदेश रद्द हो जाता है और Sr DEE/OP/DHN के पद पर आसीन रहते हैं।
पुनः इनका स्थानांतरण आदेश नेताजी सुभाष चन्द्र बोस नगर (गोमो) के लिए होता हैं और पुनः यह आदेश भी रद्द हो जाता है।
27.05.2024 को इनका स्थानांतरण आदेश Sr DSO/DNR के लिए आदेश संख्या GAZ/136/2024 जारी होता हैं और पुनः आदेश संख्या GAZ/162/2024 दिनांक 02.07.2024 ,Sr DEE/OP/DHN के लिए जारी होता हैं।
जब एक ही अधिकारी जिसका तीन तीन तबादला आदेश रद्द हो जाए तो तबादला का निर्णय लेने वाले अधिकारी को रेल महकमा “पलटीमार” न कहें तो क्या कहें !

एक बार तो निर्णय बदलना समझ में आता है लेकिन प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता श्री आर के चौधरी द्वारा तीन तीन बार निर्णय बदलना धनबाद मंडल के “अपरिमित धन” के प्रभाव को परिलक्षित करता है।सच क्या है निर्णय लेने वाले और निर्णय को बदलने के लिए मजबूर करने वाले ही बता सकते हैं!
लेकिन महाप्रबंधक, पूर्व मध्य रेलवे, रेलवे बोर्ड के आदेशों की अनदेखी से अपने आप को कैसे बचा सकते हैं, इसका निर्णय तो महाप्रबंधक महोदय को ही करना है क्योंकि रेल महकमा में इस बात की चर्चा जोरों पर हैं…
हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैंया ने लूटा
अब सैंया कौन है और कैसे लूटा और किसको लूटा कहने की बात तो नहीं है।





