ECR: प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक की अंधेरगर्दी! एसीएम प्रदीप सिंह “सुपर पावर” की भूमिका में! भ्रष्टाचार एवं व्यभिचार की पराकाष्ठा!

ECR: प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक की अंधेरगर्दी! एसीएम प्रदीप सिंह “सुपर पावर” की भूमिका में! भ्रष्टाचार एवं व्यभिचार की पराकाष्ठा!

पटना: जहां का राजा चौपट होता है, वहां के प्रजा को कष्ट उठाना ही पड़ता है और इसी को चरितार्थ कर रहे हैं पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो अपने निहितार्थ में “धृतराष्ट्र” को चरितार्थ कर रहे हैं। जब राजा ही चौपट हो तो प्यादे कैसे होंगे सोचा जा सकता है लेकिन ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है क्योंकि पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान अमिताभ प्रभाकर ने अपने कारनामों से “बापू के बंदर” की भूमिका को प्रमाणित किया है।

भारतीय रेलवे का वाणिज्य विभाग जिस पर आय की महती जिम्मेदारी है,आय के साथ”अन्य आय”के लिए “अन्याय”एक पहचान बन चुकी है। आप अवगत हो चुके हैं कि “अन्य आय” के रेलवे बोर्ड के नियमों को दरकिनार कर अपनी मनमानी का प्रदर्शन किया जा रहा है।

दानापुर मंडल का एसीएम प्रदीप सिंह “सुपर पावर” की भूमिका में!

पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल का सहायक वाणिज्य प्रबंधक (ACM) प्रदीप कुमार सिंह के पास टिकट चेकिंग एवं कैटरिंग का दोहरा प्रभार है और दोहरा प्रभार इसलिए ही है क्योंकि प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान अमिताभ प्रभाकर का जिगरी यार दिलदार सलाहकार और सेवादार हैं और इसने अपने निहितार्थ को चरितार्थ करने के वास्ते एक ऐसे वाणिज्य लिपिक सोनु कुमार जो अपने नियुक्ति काल से ही मंडल मुख्यालय में विराजमान हैं और वाणिज्य कर्मियों के नजरों में वाणिज्य विभाग का राजकुमार है,को मंडल मुख्य टिकट निरीक्षक का पदभार सौंप कर अपनी विकोटीकृत मानसिकता का दर्शन कराया है ।

सहायक वाणिज्य प्रबंधक (ACM) प्रदीप कुमार सिंह “अन्य आय” के लिए “अन्याय” का पर्याय बन चुके हैं और आपको जानकर हैरानी होगी कि दानापुर, पटना जंक्शन, राजेन्द्र नगर, और पाटलिपुत्र स्टेशन से खुलने वाली वैसी ट्रेनें जिसमें पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध है,सभी ट्रेनों के पैंट्री कार संचालकों से प्रतिदिन अप एवं डाउन के हिसाब से ₹2000 रूपए की वसूली की जा रही है, और तो और पटना जंक्शन, दानापुर, राजेन्द्र नगर, एवं पाटलिपुत्र स्टेशन पर स्थित IRCTC द्वारा संचालित काउंटरों से प्रतिमाह ₹ 1000 रूपए की वसूली की जा रही है और इस कुकृत्य को अंजाम दे रहे हैं कैटरिंग इंस्पेक्टर श्रीमान श्रीनिवास जो सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान प्रदीप कुमार सिंह के खासमखास राज़दार है।आप सोच सकते हैं कि यह वसूली क्यों हो रही है तो यह जान लीजिए यह वसूली आपके जेब से ही हों रही है क्योंकि अंकित मूल्य से ज्यादा वसूली और पैंट्री कार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं में कमी की शिकायतों का निपटारा इनके जिम्मे ही है ।

वैसे यह भी जानकारी मिली है सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान प्रदीप कुमार सिंह के राज़दार श्रीमान श्रीनिवास का स्थानांतरण आदेश जारी हो गया है लेकिन कहते हैं ना कि “दिल है कि मानता नहीं” प्रदीप सिंह के लिए वसूली में मस्त हैं और स्थानांतरित पद पर योगदान देने को तैयार नहीं है।
सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान प्रदीप कुमार सिंह के कारनामों की फेहरिस्त लंबी है और उनके कारनामों के लिए कहानी की श्रृंखला बन जाएगी लेकिन सोचने वाली बात यह है कि आखिर क्या कारण है कि इन्होंने एक वाणिज्य लिपिक सोनु कुमार को मंडल मुख्य टिकट निरीक्षक का पदभार सौंप दिया, मुख्य कारण यह है कि अन्य आय के लिए मनमानी की जा सकें!

“लाल गाड़ी” से हो रहा “लाल पानी” का परिचालन!

वर्ष 2025 में टिकट चेकिंग अभियान को गतिमान बनाने के लिए लाल गाड़ी का परिचालन शुरू किया गया, लेकिन यथास्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि टिकट चेकिंग अभियान को गतिमान बनाने के लिए लाल गाड़ी का परिचालन “लाल पानी” के नशें में लिया गया क्योंकि यदि हिसाब किताब लगाया जाए तो यह परिलक्षित होता है कि “लाल गाड़ी” का परिचालन भारतीय रेल के लिए घाटे का सौदा है।

आपका सवाल हो सकता है कि जब लाल गाड़ी का परिचालन घाटे का सौदा है तब फिर लाल गाड़ी का परिचालन क्यों किया गया तो आप जानकर आश्चर्य चकित हो जाएंगे क्योंकि लाल गाड़ी का परिचालन “लाल पानी” के लिए किया गया!

यह तो बताने की जरूरत नहीं है कि बिहार में “लाल पानी” प्रतिबंधित है और आज़ के दिन में “लाल पानी”का कारोबार सबसे फायदेमंद कारोबार है और “लाल पानी”के कारोबार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए ही वाणिज्य के राजकुमार सोनु कुमार को मंडल मुख्य टिकट निरीक्षक का पदभार सौंपा गया, आपको जानकर हैरानी होगी कि “लाल गाड़ी” जब भी दिलदारनगर जाती है तब कुछ ऐसे लोगों को ड्यूटी में लगाया जाता है जो अपने बैग में शराब की बोतलें ला सकें और दुर्भाग्य की बात है कि इसमें आरपीएफ विभाग की भी मिलीभगत है, यदि पिछले कुछ महीनों के आंकड़े निकालें जाए तो दुघ का दुघ और पानी का पानी हो जाएगा और आप देखेंगे कि दिलदारनगर के लिए उन्हीं की ड्यूटी लगाई जाती है जो कि सोनु कुमार “राजकुमार” के विश्वस्त और खासमखास है,सभी दानापुर सिकंदराबाद एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 12792 से गाड़ी को चेक करते जाते हैं और दिलदारनगर में टिकट चेकिंग का फोटो शूट कर शराब की खरीदारी कर लाल गाड़ी में लोड कर 12791 से वापस आ जाते हैं तो आप सोचेंगे कि शराब का होता क्या है तो यकीन मानिए वाणिज्य विभाग के राजकुमार शराब का कारोबार भी करते हैं और सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान प्रदीप कुमार सिंह के साथ प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान अमिताभ प्रभाकर को भी लाल पानी की सुविधा “होम डिलीवरी” के माध्यम से करते हैं।

दानापुर का “अधिकारी क्लब” “अन्य आय” का अवैध जरिया!

दानापुर मंडल के वाणिज्य विभाग में विसंगतियों का अंबार है क्योंकि यहां “सुपर सीनियर डीसीएम” की भरमार है क्योंकि यहां के सीनियर डीसीएम साहब बेहद ही शरीफ़ और ईमानदार है लेकिन नेतृत्व के आगे विवश और लाचार है और इसी का फायदा सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्रीमान प्रदीप कुमार सिंह एंड गैंग उठा रहा है।

अधिकारी क्लब की बुकिंग रेलवे कर्मचारी, अवकाश प्राप्त कर्मचारी, अधिकारी अपने बेटा बेटी की शादी के लिए करते हैं,सभी के लिए अलग-अलग दर निर्धारित है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अधिकारी क्लब के बुकिंग से प्राप्त राशि रेलवे के राजस्व का हिस्सा नहीं है क्योंकि जो राशि अधिकारी क्लब के बुकिंग से प्राप्त होता है वो अधिकारी क्लब के खाते में जमा किया जाता है जबकि कायदे से अधिकारी क्लब के बुकिंग से प्राप्त राशि FA& CAO के खाते में जमा होना चाहिए लेकिन अपने फायदे के लिए कायदे कानून को दरकिनार कर भ्रष्टाचार की गाथा लिखी जा रही है और सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि लंबे समय से मंडल मुख्यालय में पदस्थापित श्रीमान अश्विनी कुमार जो मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक के पद पर विराजमान हैं और अपने आप को समझ बैठे शक्तिमान है, ने अधिकारी क्लब के बुकिंग के लिए एक एजेंट को नियुक्त कर अपना कारोबार कर रहे हैं और इसका परिणाम यह होता है कि बहुत सारे रेलवे कर्मचारी चाहते हुए भी अधिकारी क्लब की बुकिंग नहीं कर पाते है!

रोटेशन नीति का नहीं हो रहा है अनुपालन!

दानापुर मंडल के वाणिज्य विभाग में रोटेशन नीति का अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो रहा है और इसका परिणाम यह होता है कि जो लंबे समय से एक ही जगह विराजमान हैं, शक्तिमान बन बैठा है।

वाणिज्य विभाग द्वारा एक स्थानांतरण आदेश 110/2026 जो कि 30.06.2026 को जारी किया गया है, उपरोक्त आदेश में क्रम संख्या 13 पर वर्णित श्रीमान राकेश कुमार CRS E.Q CELL जो सितम्बर 2018 से ही पदस्थापित है और उनका स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर CRS/HQ/DNR के पद पर किया गया है,इसका क्या औचित्य है?? स्पष्ट है कि रोटेशन नीति का अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो रहा है,यह तो सिर्फ एक बानगी है, विस्तृत रिपोर्ट आगे के अंकों में!

सतर्कता विभाग मुजरा करने वाली की भूमिका में!

अब आप सोचेंगे कि जब इतनी विसंगतियां हैं तो पूर्व मध्य रेलवे का सतर्कता विभाग क्या कर रहा है तो संक्षेप में इतना ही जान लीजिए कि सतर्कता विभाग इन विसंगतियों का संरक्षण दाता है और अपना निर्धारित हिस्सा पाता है।उप मुख्य सतर्कता अधिकारी (यातायात) श्रीमान सुबोध कुमार मुजरा करने वाली की तरह नोट लेकर कुछ भी करने को तैयार बैठा है तभी तो वाणिज्य विभाग में विसंगतियों का अंबार है!

कहानी विशेष है और जो शेष है अगले अंक में..
सफ़र जारी है..

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  1. Rishabh singh

    वाह! क्या धारदार रिपोर्टिंग है।आपने तो अंकल सरकारी फाइलों के पीछे चल रहे ‘मधुशाला और तानाशाही’ के खेल को बिल्कुल सही शब्दों में पिरोया है। ट्रांसफर ऑर्डर के बाद भी ‘दिल है कि मानता नहीं’ वाले अफसरों और रेलवे को अपनी जागीर समझने वाले ‘शक्तिमानों’ पर यह लेख एक करारा तमाचा है। जब रक्षक ही ‘लाल गाड़ी’ को तस्करी का जरिया बना लें, तो जनता सिर्फ टैक्स देने के लिए ही बचती है। सिस्टम के इस काले सच को इतनी खूबसूरती से उजागर करने के लिए लेखक का बहुत-बहुत आभार

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