ECR: पीएफए नीरज वर्मा “नटवरलाल” की भूमिका में! पूर्व मध्य रेलवे का लेखा अंधेर नगरी से अंधेरगर्दी की ओर !

ECR: पीएफए नीरज वर्मा “नटवरलाल” की भूमिका में! पूर्व मध्य रेलवे का लेखा अंधेर नगरी से अंधेरगर्दी की ओर !

पटना: पूर्व मध्य रेलवे के लेखा विभाग में इन दिनों कर्मचारियों के बीच गहरा असंतोष और अविश्वास व्याप्त होने की बात सामने आ रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि स्थानांतरण नीति का उपयोग अब केवल प्रशासनिक आवश्यकता के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है! उनका कहना है कि इससे विभाग का कार्य वातावरण प्रभावित हुआ है और अनेक कर्मचारियों में भय तथा निराशा का माहौल है!

कर्मचारियों के आरोपों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में जातिवादी महाभ्रष्ट चौपट राजा के राजदार सिपहसलार राजीव रंजन की महत्वपूर्ण भूमिका है । चर्चा के अनुसार सामान्य प्रशासन शाखा के एक SAG अधिकारी तथा एक JAG अधिकारी ने भी इस जालसाजी के क्रियान्वयन में प्रमुख भूमिका निभाई। कुछ कर्मचारी इन दोनों अधिकारियों को “चंगू” और “मंगू” कहकर संबोधित करते हैं।

कार्यालय आदेश संख्या NG-17 दिनांक 10 मार्च 2026 के माध्यम से निर्माण संगठन, पटना से कुल 16 वरीय अनुभाग अधिकारियों का विभिन्न मंडलों में स्थानांतरण किया गया था। कर्मचारियों के अनुसार यह निर्णय सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि लंबे प्रयास और महाप्रबंधक स्तर के हस्तक्षेप के बाद लागू हो सका था । इन 16 अधिकारियों में से तीन अधिकारियों से संबंधित बिल भुगतान मामलों में CBI द्वारा पूछताछ की गई थी तथा संबंधित मामले न्यायालय में लंबित हैं।

कर्मचारियों का यह भी कहना है कि शेष अनुभाग अधिकारियों में से कुछ कई वर्षों से निर्माण संगठन, पटना में पदस्थापित थे और विभाग में उनका अच्छा खासा प्रभाव माना जाता था। वहां के पूरे तंत्र पर इनका नियंत्रण था । इनके ख़िलाफ़ जाने वालों को भुगतना पड़ता था।

कर्मचारियों के अनुसार, सबसे बड़ा आश्चर्य तब हुआ जब इस स्थानांतरण आदेश के लगभग 100 दिनों के भीतर ही उन्हीं अधिकारियों में से 9 अधिकारियों को विभिन्न मंडलों से वापस हाजीपुर मुख्यालय बुला लिया गया।

दिनांक 01 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय आदेश NG-45 के अनुसार अधिकांश स्थानांतरण Medical Ground के आधार पर किए गए। कर्मचारियों का कहना है कि इनमें से चार अधिकारी उन्हीं लोगों में शामिल हैं जिनके बारे में विभाग में लंबे समय से प्रभावशाली होने की चर्चा रही है और चौपट राजा की जाति से संबंध रखते हैं ।

कर्मचारियों का आरोप है कि मेडिकल ग्राउंड जैसी मानवीय व्यवस्था का उपयोग कथित रूप से कुछ चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को मनचाही जगह पर पदस्थापित करने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यही सुविधा सभी पात्र कर्मचारियों को समान रूप से उपलब्ध होती, तो इस प्रकार के प्रश्न उत्पन्न नहीं होते।

कर्मचारियों के अनुसार, वास्तविक चिकित्सकीय कठिनाइयों वाले अनेक कर्मचारी वर्षों से अपने मामलों के समाधान की प्रतीक्षा करते रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में निर्णय अत्यंत शीघ्रता से हो जाते हैं। इस कारण विभाग में असमानता की भावना पैदा होने की बात कही जा रही है।

कई कर्मचारियों का आरोप है कि 01 जुलाई 2026 का कार्यालय आदेश सामान्य कार्यालय आदेशों की तरह व्यापक रूप से प्रसारित नहीं किया गया। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आदेश व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों से भेजे गए तथा शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही एहतियात बरतने की सख्त हिदायत भी दी गई थी ताकि किसी को किसी तरह भनक ना लगे । यदि यह एक नियमित प्रशासनिक आदेश है तो सामान्य प्रक्रिया से प्रसारित करने के बजाय सीमित स्तर पर जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी ?

विभागीय कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि सामान्य प्रशासन शाखा के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ कर्मचारी इनको “चंगू” और “मंगू” कहकर संबोधित करते हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि इन अधिकारियों ने वरिष्ठ स्तर से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप मेडिकल ग्राउंड पर आधारित स्थानांतरणों को शीघ्रता से लागू कराया। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है, तो इन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए । ये दोनों वरीय अधिकारी सुपर पीएफए राजीव रंजन के गुलाम हैं उसके इशारे पर नाचते हैं ।

कर्मचारियों का कहना है कि इस आदेश पर Dy. FA & CAO (G), ECR/HJP के हस्ताक्षर हैं। विभाग के भीतर यह भी चर्चा है कि क्या इस प्रकार के स्थानांतरण आदेशों पर इस स्तर के अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर करना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या यह एक अपवाद था ?

यदि यह सामान्य प्रक्रिया है, तो प्रशासन को इसे स्पष्ट करना चाहिए। यदि यह अपवाद था, तो उसके कारण भी सार्वजनिक होने चाहिए।

कर्मचारियों का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी रेलवे बोर्ड तक पहुँच चुकी है। स्थानीय स्तर पर न्याय की कोई उम्मीद नहीं है ।
सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के पीएफए नीरज वर्मा जो अपने कारनामों से “नटवरलाल” को भी पीछे छोड़ चुके हैं, फिर रेलवे बोर्ड में बैठे शक्तिमान किस शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं?

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