ECR : ऐसा लेखा – आपने नहीं होगा देखा!

ECR : ऐसा लेखा – आपने नहीं होगा देखा!
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  • पूर्व मध्य रेल का लेखा विभाग – जातिगत भेद भाव का दाग़ !!

पटना: अंधेर लेखा नगरी के चौपट राजा की अंधेरगर्दी और मनमर्जी ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है । विभागीय ट्रान्सफर पोस्टिंग में जाति के आधार भेदभाव बदस्तूर जारी है । अभी हाल में हुए कनीय लेखा अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग में एक जाति विशेष के प्रति वैमनस्य का भाव साफ़ साफ़ दिखाई दिया । एक अधिकारी को स्वयं के अनुरोध पर स्पाउस ग्राउंड पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल से धनबाद मंडल ट्रांसफर किया गया इसमें ऊपर से देखने में कोई समस्या नहीं है लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है इन महानुभाव इनके अपने पूरे नौकरी में सिर्फ एक बार मार्च 2025 में धनबाद से अन्य मंडल में भेजा गया सिर्फ सवा साल में ये वापस अपने पुराने जगह पहुँच गए । यहाँ यह बताना जरूरी है कि इनकी पत्नी भी रेलवे में कार्यरत है और उनका दो तीन महीने में रिटायरमेंट है।

यह स्पाउस ग्राउंड का मामला समझ से परे है । खैर लेखा विभाग के सामान्य प्रशासन में जिस तरह से राजीव रंजन की तूती बोलती है और धमक है बाक़ी वरीय अधिकारी सिर्फ़ नाम के है राजीव के अधीन उसका आदेश तामील करने के लिए उस माहौल में सब संभव है । एक अधिकारी पिछले दो ढाई साल से समस्तीपुर में पदस्थापित है और स्पाउस ग्राउंड पर ट्रांसफर की अर्जी लगाकर थक गया है लेकिन शायद एक जाति विशेष से संबंध होने के कारण उसकी सुनवाई नहीं हो पा रही है और उसको प्रताड़ना झेलना पड़ रहा है । सोनपुर के एक अधिकारी की वही व्यथा है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है । चौपट राजा के बिरादरी के सारे अधिकारी अपने मनचाहे जगह पर सेट हैं और मजे ले रहे हैं । एक दो महीने पहले महेद्रू के सीबीआई वाले मामले में इसी जातिवादी वित्त प्रमुख ने एक महीने पहले पोस्टेड हुए अधिकारी को हटा दिया लेकिन उससे पहले उस सेक्शन के बिल भुगतान करने वाले स्वजातीय अधिकारी को वहीं लूटपाट करने के लिए छोड़ दिया । कर्मचारियों का कहना है कि सीबीआई रेड वाले केस में एक बिल के अलावा सारे बिल उसी स्वजातीय कनीय अधिकारी ने पास किए थे लेकिन कार्यवाही के दौरान एक बिल नए अधिकारी ने पास किया था उसका ट्रांसफर कर दिया गया । ये भी पता चला है कि पहले के बिल में ही धांधली हुई थी ।

वित्त प्रमुख की मनमानी और मनमर्जी से लेखा विभाग की फज़ीहत हो रही है । यह विभाग अंधेरगर्दी का नया ठिकाना बन गया है । ट्रांसफर पोस्टिंग में जाति पाती और पैसे का खेल जारी है । डीडीयू मंडल में हुए परीक्षा घोटाले के बाद हुए ट्रांसफर पोस्टिंग में वित्त प्रमुख ने अपने स्वजातीय अधिकारियों को पटना दानापुर में सेट कर दिया और बाकी अधिकारियों को दूर दराज के मंडलों में फेंक दिया । महाचोर चौपट राजा ने अभी तक जितने भी ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर किए है वो सारे स्वजातीय कर्मचारियों के ही हैं । सीवीसी की अनुशंसा पर सेवा से बर्खास्त किए गए अधिकारी को सरकारी खर्चे पर मुख्य अथिति बना रहे और वसूली के पैसे से पाँच सितारा होटल में पार्टी करा रहे हैं । आश्चर्य की बात यह है कि रेलवे बोर्ड को सब पता है फिर भी मूक दर्शक बना हुआ है । अभी हाल में सीबीआई के पूछताछ किए गए तीनो अनुभाग अधिकारियों को मेडिकल ग्राउंड पर वापस उनके मनचाहे जगह हाजीपुर सोनपुर बिठा दिया गया । आश्चर्य की बात है तीनो अनुभाग अधिकारी जिनको सीबीआई ने बुलाया था तीनों को मेडिकल ग्राउंड पर हाजीपुर सोनपुर ट्रांसफर किया गया जहां पिछले स्थान से कमतर मेडिकल सुविधा है ।

अगर मेडिकल कारण था तो पटना क्यों नहीं पोस्ट किया गया । वित्त प्रमुख अपने सिपहसालार राजदार लेखा प्रशासन के सर्वेसर्वा राजीव रंजन के साथ मिलकर ट्रांसफर पोस्टिंग का रैकेट चला रहा है । कहीं कास्ट और कहीं कैश ही ट्रांसफर का आधार बन गया है । राजीव रंजन ने JAG और SAG में अपने दो चंगू मंगू को हस्ताक्षर करने के लिए सामान्य प्रशासन में बिठा दिया है जिससे उसके वसूली और भय का राज और मजबूती से कायम हो गया है । लेखा विभाग अपने पतन की ओर बढ़ रहा है । SAG और JAG अधिकारी एक महाभ्रष्ट जूनियर स्केल अधिकारी के अधीन कार्य कर रहे है इससे ज़्यादा शर्म की कोई बात नहीं हो सकती है । भले ही उससे व्यय अनुभाग की कमान छोड़ दी हो उसने हर जगह अपने आदमी बिठा लिए हैं उसका राजपाट क़ायम रहेगा । यह कहा जा रहा है कि व्यय अनुभाग से उसके द्वारा किए जा रहे वसूली को उसने अपने अधीन काम करने वाले JAG और SAG अधिकारियों के लिए छोड़ दिया है ताकि वे उसके एहसान के तले दबे रहे । वित्त प्रमुख के ऐसे कौन सा राज राजीव रंजन के पास है जिससे वह पूरे लेखा विभाग को अपने इशारे पर नचा रहा है और अपने मर्जी से अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग करा रहा है ! लेखा विभाग को राजीव के प्रभाव से कब मुक्ति मिलेगी? रेलवे बोर्ड पूर्व मध्य रेल के लेखा विभाग को बर्बाद होते हुए क्यों देखना चाहता है ?

क्या भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट पीएफए के कारनामों पर लगाम लगाने का प्रयास करेंगे!

सफ़र जारी है..

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