दानापुर: कहते हैं ना कि एक सड़ी एवं गली हुई मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है ठीक वही हाल है पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में स्थित जगजीवन स्टेडियम का! अभी तक इसी शीर्षक के कहानी के पिछले दो आलेखों में आपने देखा हैं कि दानापुर मंडल के वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी जो मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर के सर्वेसर्वा है और उन्होंने एक ऐसे कर्मचारी को मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर का सचिव नियुक्त किया है जो चिकित्सीय आधार पर अपने मूल पद से विकोटिकृत है और किसी खेल का खिलाड़ी भी नहीं है लेकिन “लूट का खेल”का एक्सपर्ट खिलाड़ी हैं!
ब्रजेश चौबे जो मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर का सचिव है, ने अपने परम पूज्य आका वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी अतुल कुमार के सहमति से एक ऐसे आदमी को मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर द्वारा संचालित क्रिकेट एकेडमी को संचालित करने का जिम्मा सौंपा है जिसने अपने कारनामों से मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर को शर्मशार करने का अपराध किया है लेकिन कहते हैं ना कि निर्लज्जों को लाज नहीं आती ठीक वही हाल है मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर के सर्वेसर्वा अतुल कुमार का जिन्होंने अपने कुकर्मों एवं कारनामों से कार्मिक विभाग की व्यवस्था को तहस नहस करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ी है।
बात कुछ दिनों पहले की ही है, जगजीवन स्टेडियम में एक ऐसी घटना घटित हुई है जो मंडल प्रशासन के लिए शर्मनाक है लेकिन पीड़ित पक्ष ने लोक लज्जा में इसे सार्वजनिक करना उचित नहीं समझा! लेकिन जगजीवन स्टेडियम में चल रहे “लूट का खेल”रेल पटल पर आने के बाबजूद मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर के सर्वेसर्वा एवं सचिव के साथ साथ जगजीवन स्टेडियम को अपनी बपौती समझने वाले दिवाकर तिवारी का जो रूख़ देखने और सुनने में आ रहा है वो चौंकाने वाला ही नहीं व्यवस्था को शर्मशार करने वाली है।
ECR: जगजीवन स्टेडियम में चल रहा “लूट का खेल”!
यह तो सर्वविदित है कि जगजीवन स्टेडियम में प्रातः भ्रमण के लिए बहुत सारे रेलवे कर्मचारी, उनके आश्रित एवं आमजनों का आगमन प्रतिदिन होता है साथ ही साथ शारिरिक परिक्षण देने वाले एक दो अकादमी भी जगजीवन स्टेडियम में संचालित हो रहा है जिससे कि मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर को एक निर्धारित रकम प्रतिमाह प्राप्त होती है क्योंकि प्रातः भ्रमण करने वाले को अपना परिचय पत्र बनवाना पड़ता है और प्रातः भ्रमण करने के लिए एक निर्धारित रकम का भुगतान प्रतिमाह करना पड़ता है।
कुछ दिनों पहले जगजीवन स्टेडियम में मंडल क्रीड़ा संघ के सचिव द्वारा नियुक्त कर्मचारी दिवाकर तिवारी ने एक ऐसे घटिया घटना को अंजाम दिया है कि आपका भी खुन खौल उठे लेकिन इससे मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर के सर्वेसर्वा श्रीमान अतुल कुमार को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें सिर्फ “माल” से मतलब है! जगजीवन स्टेडियम में प्रातः काल भ्रमण करने वालों के लिए परिचय पत्र बनवाना अनिवार्य है और परिचय पत्र बनवाने हेतु निर्धारित शुल्क के साथ आधार कार्ड की प्रतिलिपि के साथ साथ मोबाइल नंबर भी देना अनिवार्य है। जगजीवन स्टेडियम में प्रातः भ्रमण करने वाली बहुत सारी महिलाओं एवं लड़कियों को दिवाकर तिवारी ने अपने जाल में फांसने का प्रयास किया और अकेले में मुलाकात करने की बात कही लेकिन संयोगवश ग़लत नंबर डायल हो गया, हुआ ऐसा कि शारीरिक प्रशिक्षण देने वाले अकादमी के प्रशिक्षक मुन्ना जी के एक प्रशिक्षणार्थी को दिवाकर तिवारी ने अकेले में मुलाकात करने का दबाव बनाया तो लड़की ने अपने परिवारजनों को अपनी व्यथा से अवगत करा दिया और फिर जो हुआ मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर के लिए शर्मशार करने वाली घटना है लेकिन कहते हैं ना कि निर्लज्जों को लाज नहीं आती लेकिन लड़की के परिवारजनों ने दिवाकर तिवारी का शारीरिक उपचार तो किया ही किया उसके मोबाइल को भी चूर चूर कर दिया,इस घटनाक्रम की सत्यता की जांच शारिरिक प्रशिक्षण केन्द्र चलाने वाले मुन्ना जी से की जा सकती है जो “गुरू जी” के नाम से विख्यात है!
खैर जो होना है वो तो होकर रहेगा लेकिन Railwellwishers द्वारा जगजीवन स्टेडियम में चल रहे “लूट का खेल” को रेल पटल पर रखने के बाबजूद जो देखने और सुनने को मिल रहा है वो चौंकाने वाला है क्योंकि मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर के सर्वेसर्वा श्रीमान अतुल कुमार अंहकार और अनैतिक धन ने उनके मन को अनैतिक बना दिया है और खुलेआम व्यवस्था को चुनौती पेश कर रहे हैं कि अभी मुझे दो साल दानापुर मंडल में रहना है और मंडल क्रीड़ा संघ मेरे हिसाब से ही चलेगा!मान लिया जाए कि श्रीमान अतुल कुमार बड़े अधिकारी हैं, पूर्व मध्य रेलवे की प्रशासनिक व्यवस्था लूंज पूंज है कुछ भी हो सकता है लेकिन एक प्राइवेट कर्मचारी दिवाकर तिवारी द्वारा खुलेआम प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देना कि किसकी औकात है कि मुझे जगजीवन स्टेडियम से हटा दें, बड़ा ही गंभीर सवाल है।
मंडल क्रीड़ा संघ दानापुर के सचिव ब्रजेश चौबे के बारे में उसके मूल विभाग के कर्मियों का कहना है कि ब्रजेश चौबे को कोई रोग नहीं है और फर्जीवाड़ा करके चिकित्सीय आधार पर अपने मूल पद से विकोटिकृत हुआ है और जब वो खेल सचिव के लिए फिट है तो उसका पुनः मेडिकल जांच पड़ताल दूसरे ज़ोन के डाक्टर से होना चाहिए, जिससे कि सच बाहर आ सके साथ ही साथ कर्मियों का यह भी कहना है कि भले ही ब्रजेश चौबे किसी रोग से ग्रस्त नहीं है लेकिन लूट के रोग से ग्रस्त अवश्य ही है और व्यवस्था उससे त्रस्त है फिर भी मंडल क्रीड़ा संघ का सचिव नियुक्त हो जाना अतुल कुमार के भ्रष्टाचार को परिलक्षित करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस संवेदनशील मामले में मंडल रेल प्रबंधक महोदय एवं ज़ोनल खेल अधिकारी श्रीमान पी के चक्रवर्ती क्या उचित कार्रवाई करते हैं!
सफ़र जारी है…





