ECR : “कार्मिक” विभाग का तुगलकी फरमान! कर्मियों का अनावश्यक उत्पीड़न!

ECR : “कार्मिक” विभाग का तुगलकी फरमान! कर्मियों का अनावश्यक उत्पीड़न!

सोनपुर: भले ही कार्मिक विभाग का मूल उद्देश्य कर्मियों का कल्याण करना है लेकिन जब मूल उद्देश्य को भूल “लूट चले हम” अभियान अनवरत जारी हो तो पूर्व मध्य रेलवे का सोनपुर मंडल इसमें पीछे कैसे रह सकता है! सोनपुर मंडल में कार्मिक विभाग द्वारा कर्मचारियों के पारिवारिक अभिलेखों के सत्यापन के नाम पर ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। कई मामलों में वर्षों पूर्व विभाग द्वारा स्वीकार एवं अभिलेखित किए जा चुके विवरणों पर पुनः आपत्तियां लगाई जा रही हैं तथा विवाह प्रमाण-पत्र, आश्रित प्रमाण-पत्र एवं अन्य दस्तावेज दोबारा मांगे जा रहे हैं।

कई ऐसे कर्मचारी हैं जिनके पिता की मृत्यु उनकी नियुक्ति से पूर्व ही हो चुकी थी तथा जिनका विवाह नौकरी प्राप्त करने से पहले अथवा नौकरी मिलने के कुछ वर्षों बाद हुआ। नियुक्ति के समय उनके द्वारा प्रस्तुत घोषणापत्र, उपलब्ध प्रमाण-पत्रों तथा विभागीय सत्यापन के आधार पर उनके परिवार के सदस्यों एवं आश्रितों के नाम सेवा अभिलेखों में दर्ज किए गए थे। वर्षों तक इन्हीं अभिलेखों के आधार पर विभागीय कार्य संपादित होते रहे, फिर भी आज उन्हीं अभिलेखों को संदेह की दृष्टि से देखकर पुनः दस्तावेजों की मांग की जा रही है।
यह भी आश्चर्यजनक है कि आधार कार्ड की प्रति अपलोड होने के बावजूद केवल तकनीकी एवं तर्कहीन कारणों से आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। दस्तावेज की सत्यता महत्वपूर्ण होनी चाहिए, न कि यह कि वह एक पृष्ठ में है अथवा दो पृष्ठ में।

साथ ही एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि क्या कार्मिक विभाग के सभी अधिकारी, विशेषकर वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी, सहायक कार्मिक अधिकारी एवं संबंधित कार्मिक कर्मचारी, अपने स्वयं के विवाह प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं? सर्वविदित है कि पूर्व के वर्षों में विवाह पंजीकरण की व्यवस्था आज की तरह व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी। अधिकांश विवाह सामाजिक एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होते थे तथा विवाह प्रमाण-पत्र बनवाने की परंपरा सामान्य नहीं थी। ऐसी स्थिति में दशकों पुराने मामलों में विवाह प्रमाण-पत्र की मांग करना न तो व्यवहारिक है और न ही न्यायसंगत।

जब नियुक्ति के समय पुलिस सत्यापन, दस्तावेज सत्यापन तथा अन्य आवश्यक जांच प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद कर्मचारी की सेवा पुष्टि की जाती है, तब वर्षों बाद उन्हीं अभिलेखों एवं विवरणों पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित प्रतीत नहीं होता। यदि विभाग को किसी प्रमाण-पत्र की सत्यता पर संदेह है तो उसे संबंधित सरकारी पोर्टलों अथवा सक्षम प्राधिकारियों के माध्यम से स्वयं सत्यापन की व्यवस्था करनी चाहिए। कर्मचारियों को बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु बाध्य करना अनावश्यक मानसिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक बोझ उत्पन्न करता है।
Railwellwishers का सोनपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक महोदय से विनम्र अनुरोध है कि वर्षों पूर्व विभाग द्वारा स्वीकृत एवं अभिलेखित पारिवारिक विवरणों पर बिना किसी ठोस कारण के पुनः आपत्ति लगाने की प्रक्रिया तत्काल बंद की जाए, अनावश्यक रूप से विवाह प्रमाण-पत्र एवं अन्य दस्तावेजों की पुनः मांग समाप्त की जाए तथा इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर कर्मचारियों को राहत प्रदान की जाए।

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