पटना: आपको पहले भी अवगत कराया है कि भारतीय रेल के “अभूतपूर्व ज़ोन” पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के “महाभ्रष्ट” एवं “मति भ्रष्ट” महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो “धृतराष्ट्र” की भूमिका में पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर की प्रशासनिक व्यवस्था को तहस नहस करने के लिए संकल्पित है, पिछले दिनों आपने देखा हैं कि किस तरह से उन्होंने “वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक सम्मेलन” में भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त अधिकारी संतोष कुमार पटनायक (आईआरएएस) को “विशिष्ट अतिथि” बनाकर भारतीय रेल की व्यवस्था को शर्मशार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। यदि नेतृत्व ही भ्रष्टाचार के गंगोत्री में डूबा हुआ हो, तो “लूट चले हम” अभियान के अन्य सहयोगी पीछे कैसे रह सकते हैं!
दानापुर मंडल के “अनियंत्रित अभियंत्रण” विभाग की स्थिति ऐसी हो गई है कि बस आप इतना ही कह सकते हैं कि भगवान भरोसे चल रहा है दानापुर मंडल का “अनियंत्रित अभियंत्रण विभाग”!
भगवान भरोसे इसलिए क्योंकि भगवान भरोसे ही 13 अप्रैल 2026 को आरा एवं जमीरा हाल्ट के बीच ट्रैक पर स्लीपर होने के बाबजूद अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई थी, और इस घटना के घटित होने के आठ घंटा के अंदर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण दानापुर मंडल के वरीय मंडल अभियंता 03 उत्पल कांत का स्थानांतरण आदेश रेलवे बोर्ड ने जारी कर यात्री सुरक्षा के प्रति अपनी सुचिता एवं चिंता का दर्शन कराया था। रेलवे बोर्ड के स्थानांतरण आदेश जारी किए हुए लगभग 40 दिन हो चुके हैं लेकिन स्थानांतरण आदेश का क्रियान्वयन अभी भी स्पेशल ट्रेन की तरह विलंबित और लंबित है! खैर इसका जबाब तो”धृतराष्ट्र “महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ही दे सकते हैं जो हर आपदा को अवसर में बदलने के लिए विख्यात और कुख्यात है।
“अभियंत्रण” विभाग के”अनियंत्रित ” होने का इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है आप स्वयं आत्मचिंतन एवं अवलोकन कर सकते हैं!
दानापुर मंडल द्वारा जारी किया गया स्थानांतरण आदेश संख्या Transfer/Posting Order: DNRD/8647/37085/31656/PO 6722 dated 15.05.2026 अभियंत्रण के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि उपरोक्त वर्णित आदेश में जिस विध्यांचल शर्मा (कनीय अभियंता) का स्थानांतरण बक्सर से आरा किया गया है, पूर्व में आरा में ही पदस्थापित था और लम्बे समय से पदस्थापित था,जिसका स्थानांतरण आदेश संख्या Transfer/posting order:- DNRD/8647/37085/31656/PO 6722 dated 15.06.2025 के माध्यम से आरा से बक्सर प्रशासनिक आधार पर किया गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस कनीय अभियंता विंध्याचल शर्मा का स्थानांतरण आदेश 16.06.2025 को प्रशासनिक आधार पर आरा से बक्सर किया गया था, मात्र 11 महीने के अंतराल पर स्व अनुरोध पर बक्सर से आरा स्थानांतरण आदेश जारी किया जाना किस व्यवस्था का परिचायक है आप खूब सोच और समझ सकते हैं।
जिस अधिकारी का खुद स्थानांतरण आदेश रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किया गया हों और उसके अनुशंसा से यदि किसी का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया हो तो यह किस व्यवस्था एवं संस्कृति का परिचायक है, समझा जा सकता है लेकिन कहते हैं ना कि “निर्लज्जों” को लाज नहीं आती!
ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है कि जिस विध्यांचल शर्मा का स्थानांतरण आदेश मात्र 11 महीने के अंदर बक्सर से आरा के लिए जारी किया गया है,आरा में पदस्थापना के दौरान एक गुड्स ट्रेन का डिरेलमेंट लाईन नम्बर 04 में हुआ था और आरोप पत्र भी जारी हुआ था फिर भी मात्र 11 महीने में पुनः बक्सर से आरा स्थानांतरण आदेश जारी किया जाना व्यवस्था के ध्वस्त होने का ही प्रमाण है लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है, अभियंत्रण के गलियारों में जो चर्चा चल रही है उसके अनुसार स्थानांतरण आदेश का लाभार्थी कनीय अभियंता विंध्याचल शर्मा ने लेन देन का सहारा लिया है, वैसे भी किसी ने सच ही कहा है कि बिना लेन देन के मोहब्बत क्या चीज़ है!
आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि विध्यांचल शर्मा ट्रैकमैन से पदोन्नति पाकर कनीय अभियंता बने हैं और ट्रैकमैन के पद पर आसीन होने के बाबजूद इन्होंने अपना कार्यकाल कार्यालय में ही बिताया है, फिर पदोन्नति पाकर सेक्शनल कनीय अभियंता बन जाना किस व्यवस्था का परिचायक आप खुद आत्मचिंतन कर सकते हैं!
आप सवाल उठा सकते हैं कि लेन देन का आरोप किस आधार पर लगाया गया है तो आप लोग ही सोचिए और बताईए कि जब सकलडीहा में पदस्थापित कनीय अभियंता हरिशंकर सिंह 13.05.2019 से ही है और लगभग सात साल से सकलडीहा में ही पदस्थापित है तो फिर उसके अनुरोध पर क्यूं विचार नहीं किया जा रहा है??
दानापुर मंडल के “अनियंत्रित अभियंत्रण” के कुकर्मों की फेहरिस्त लंबी है और इनके कुकर्मों की एक और कहानी अगले भाग में…
सफ़र जारी है…!





