पटना: एक कहावत आप सभी ने भी सुना होगा
माल खाया Monkey,
मार खाये Donkey,
ठीक यही हाल हुआ है पूर्व मध्य रेलवे के दीनदयाल उपाध्याय मंडल में, जहां कार्यालय में कार्यरत 09 ट्रैकमैन से ₹ 17,92,125 की वसूली का फरमान लेखापरीक्षा महानिदेशक, पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू मंडल के स्थानीय इकाई द्वारा जारी किया गया है।
लेखापरीक्षा महानिदेशक, के स्थानीय इकाई डीडीयू द्वारा आदेश जारी इसलिए किया गया है क्योंकि DOPT के पत्र संख्या A-27018/02/2022-Estt.(AL)02.09.2022 के अनुसार केन्द्र सरकार के उन कर्मचारियों को रिस्क एलाउंस दिया जाता है जो खतरनाक कामों में लगे हैं या जिनका काम समय के साथ उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।
इसके अलावा, रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या 87/2017,PC -Vll No.33 दिनांक 10 अगस्त 2017 के अनुसार भारतीय रेलवे के ट्रैक मेंटेरर्स- l ,ll,lll और lV के लिए “रिस्क और हार्डशिप एलाउंस ” का प्रावधान किया गया है।यह प्रावधान हार्डशिप मैट्रिक्स के सेल R3H2 के अनुसार है।(लेवल 8 और उससे नीचे के लिए 2700/- रूपए और लेवल -9 और उससे उपर के लिए 3400/- रूपए) जो कि 01 जुलाई 2017 से लागू हुआ।
साथ ही, रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या E (P&A)1- 2017 /SP-1 /AD-1 दिनांक 13.04.2021 (RBE No.30/2021) के अनुसार रिस्क एलाउंस केवल ड्यूटी के वास्तविक समय के लिए ही दिया जाता है और छूट्टी के दौरान इसका भुगतान नहीं किया जाता है।
Sr. DPO/DDU कार्यालय में रखे गए रिकार्ड की जांच के दौरान,यह पाया गया कि कुछ लाइन कर्मचारी SSE/P.WAY/DDU South और North के अधीन तैनात हैं, लेकिन वे अलग अलग कार्यालयों में और अलग अलग स्थिर (Stationary) के तहत काम कर रहे हैं, और “रिस्क एलाउंस” का लाभ उठा रहे हैं।
उपरोक्त तथ्यों को देखने से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि ट्रैकमैन कार्यालय में काम कर रहे थे और उन्हें हार्ड शिप एलाउंस का भुगतान किया गया है जो बिल्कुल ग़लत है लेकिन इस मामले में कई सवाल उठते है।
सबसे पहला सवाल यह उठता है कि लेखापरीक्षा महानिदेशक के डीडीयू के स्थानीय इकाई को इस बात का पता 59 महीने मतलब लगभग 05 साल बाद पता कैसे और क्यूं चला? कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्हें मामले की जानकारी पहले से ही थी लेकिन भेंट मिलने पर मामला सेट हो जाता है और जब इस बार मामला सेट नहीं हुआ तो उन्होंने कर्मचारियों को अपसेट कर दिया!
दूसरा सवाल शासन एवं प्रशासन से यह उठता है कि जब ट्रैकमैन स्टेशनरी कार्य में भिन्न भिन्न कार्यालयों में कार्यरत थे और इस बात की जानकारी SSE/P.Way/South एवं North को अवश्य ही रही होगी तो फिर उन 09 कर्मियों को हार्ड शिप एलाउंस किस आधार पर दिया गया?
सवाल गंभीर है!क्योंकि कुछ देकर छीन लिया जाना बड़ा ही दुखदाई होता है!
सबसे बड़ी बात जो गौरतलब है वो यह है कि जो 09 ट्रैकमैन भिन्न भिन्न कार्यालयों में स्टेशनरी कार्य में संलिप्त थे ऐसा अपनी मर्जी से तो नहीं गए होंगे इसके लिए वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) से अनुमति मिली होगी, ऐसा भी हो सकता है कि इसके लिए वरीय प्रशाखा अभियंता ने मनमाफिक क़ीमत भी ली होगी या यह शर्त रहा होगा कि जो भी हार्ड शिप एलाउंस मिलेगा, भुगतान कर देना है!
और सबसे बड़ा सवाल तो यह उठता है कि आखिर ऐसी क्या स्थिति हो गई कि कार्यालयों में ट्रैकमैन से स्टेशनरी कार्य लिया जा रहा है।
Railwellwishers का स्पष्ट मत है कि इस मामले में पीड़ित 09 ट्रैकमैन के साथ अत्याचार हुआ है क्योंकि अब प्रतिमाह उनके वेतन से कार्मिक विभाग द्वारा निर्धारित एक रकम की कटौती होती रहेगी और तब तक होती रहेगी जब तक प्राप्त किए गए हार्ड शिप एलाउंस की भरपाई न हो जाए और अब जब तक वो स्टेशनरी कार्य में संलिप्त रहेंगे हार्ड शिप एलाउंस मिलेगा भी नहीं!
सबसे बड़ी बात मज़ा लिया वरीय प्रशाखा अभियंता (रेल पथ) ने और सजा किसे मिला रेलवे के सबसे निरीह कर्मचारी ट्रैकमैन को।
खैर इस मामले में ट्रैकमैन के साथ न्याय की व्यवस्था के लिए Railwellwishers अपना प्रयास निरंतर जारी रखेगा।
इसी संकल्प के साथ सफर जारी है..
अगले अंक में दानापुर मंडल में ट्रैकमैन के साथ हो रहे अत्याचार का दर्शन…





