पटना: शाय़द ही कोई ऐसा होगा जिसने “धृतराष्ट्र” का नाम नहीं सुना होगा और उसके कारनामों से अवगत नहीं होगा।जिस तरह से “धृतराष्ट्र” ने अपने पुत्र मोह में हस्तिनापुर का विनाश कर दिया था, ठीक उसी तरह से पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह जो “धृतराष्ट्र”की भूमिका में हैं और धन मोह में पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर की व्यवस्था को तहस नहस करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और ऐसा क्यूं हैं वो कभी और क्योंकि वो अगस्त 2026 तक अवकाश प्राप्त करने के पहले पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर की व्यवस्था को तहस नहस करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते,उसी की बानगी का दर्शन आपको कराने जा रहे हैं।
अभी वर्तमान में पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य विधुत अभियंता के “प्रोटोकॉल” के रूप में कार्यरत रणधीर कुमार सिंह का पूर्व मध्य रेलवे में म्यूचुअल आधार पर स्थानांतरण एवं पदोन्नति सवालों के घेरे में ही नहीं, पूर्व मध्य रेलवे के “कुकर्मी”एवं “अकर्मण्य”कार्मिक विभाग के साथ साथ”मुजरा करने वाली” सतर्कता विभाग के काले कारनामों का दर्शन करने के लिए पर्याप्त है।
अभी वर्तमान में पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता के प्रोटोकॉल रणधीर कुमार सिंह पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में पदस्थापित थे और इनका म्यूचुअल आधार पर दानापुर मंडल में स्थानांतरण एवं पदस्थापना 16.07.2007 को सुरेश चंद्रा के साथ हुआ।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दीनदयाल उपाध्याय मंडल में पदस्थापित सुरेश चंद्रा का म्यूचुअल स्थानांतरण 02.02.2007 को पटना जंक्शन पर पदस्थापित एल एन पंडित,पीएफ संख्या 27407287630, पिता स्व जनक पंडित के साथ हुआ था तो फिर सवाल यह उठता है कि एक ही आदमी के साथ दो दो आदमी का म्यूचुअल स्थानांतरण कैसे संभव हुआ?
जब 02.02.2007 को सुरेश चंद्रा दानापुर मंडल से दीनदयाल उपाध्याय मंडल चलें गए और एल एन पंडित जो दीनदयाल उपाध्याय मंडल में पदस्थापित थे, दानापुर मंडल में योगदान दे दिया तो फिर रणधीर कुमार सिंह दानापुर मंडल में सुरेश चंद्रा के स्थान पर कैसे आ गए,यह म्यूचुअल स्थानांतरण कार्मिक विभाग के कुकर्मों का पर्दाफाश करने के लिए पर्याप्त है।
गौर करने वाली बात यह है कि जब 02.02.2007 को एल एन पंडित एवं सुरेश चंद्रा का म्यूचुअल स्थानांतरण संपन्न हो गया तो फिर 16.07.2007 को रणधीर कुमार सिंह का म्यूचुअल स्थानांतरण सुरेश चंद्रा के साथ कैसे हुआ, रणधीर कुमार सिंह को किसका पदभार दिया गया?किसकी वरीयता दी गई? खैर इसका जबाब किसी के पास नहीं है क्योंकि जब Railwellwishers ने आरटीआई के माध्यम से इस मामले की तहकीकात शुरू की गई तो कार्मिक विभाग के कुकर्मी अधिकारी ने दिए गए ज़बाब में बरगलाने की कोशिश की और बताया कि रणधीर कुमार सिंह का म्यूचुअल स्थानांतरण सुभाष चंद्रा के साथ हुआ था और जब पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल से जानकारी मांगी गई तो बताया गया कि सुभाष चंद्रा नाम का कोई भी कर्मचारी पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में पदस्थापित नहीं है, खैर इस मामले में ग़लत ज़बाब देने वाले कार्मिक के कुकर्मी अधिकारी के खिलाफ उचित फ़ोरम पर शिकायत अवश्य ही की जाएगी।
जब यह म्यूचुअल स्थानांतरण का फर्जीवाड़ा हुआ था तो पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के सतर्कता विभाग के संज्ञान में भी आया था लेकिन तत्कालीन सतर्कता अधिकारी ने मामले को दबा कर रफा दफा कर दिया था।
23.05.2025 को देश के एक प्रतिष्ठित अखबार जो सच्ची बात बेधड़क कहने के लिए विख्यात है “दैनिक भास्कर” ने इस मामले को स्टिंग ऑपरेशन के साथ राष्ट्रीय पटल पर रखते हुए मामले को तार तार कर दिया।
लेकिन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के “धृतराष्ट्र”महाप्रबंधक ने कोई भी न्यायोचित कारवाई करने के बदले इसे अपने लिए अवसर में तब्दील कर दिया और सतर्कता विभाग के बारे में क्या कहना, कोई अपना थुक चाटना चाहता है क्या? क्योंकि
Railwellwishers ने सारे प्रमाण पत्रों के साथ सतर्कता विभाग एवं मुख्य सतर्कता आयुक्त से लिखित शिकायत की थी लेकिन सतर्कता विभाग कोई न्यायोचित कारवाई कर दें ऐसा कैसे संभव है?
लेकिन एक बात सोचने वाली यह है जब ऐसा “नटवरलाल का बाप”प्रमुख मुख्य विधुत अभियंता का “प्रोटोकॉल” हों तो विद्युत विभाग का क्या हाल होगा और विधुत विभाग का क्या हाल है किसी से छिपा है क्या!





