दानापुर: भारतीय रेलवे के कार्मिक विभाग की आर्थिक नीतियों ने रेलकर्मियों के स्थिति को कारूणिक बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। भारतीय रेल में PAY &USE टाॅयलेट की व्यवस्था 2002 में शुरू हुई थी और कार्मिक विभाग ने भारतीय रेल के इस पाॅलिसी को आत्मसात करने में कोई विलम्ब नहीं किया । भारतीय जीवन बीमा निगम का एक स्लोगन “जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी” कार्मिक विभाग की दशा और दिशा को परिलक्षित करता है।
पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में RBE No 155/2022 के कार्यान्वयन में आ रही बाधाएं अब एक गंभीर नीतिगत संकट का रूप ले चुकी है । प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर इस स्थिति का चरणबद्ध विश्लेषण निम्नलिखित हैं:
(1) नीतिगत आधार और प्रारंभिक विफलता (2022)
नियम: रेलवे बोर्ड के पत्र RBE No 155/2022 दिनांक 17.11.2022 के तहत लेवल – 7 से लेवल- 8 और लेवल- 9 में पदोन्नयन (अपग्रेडेशन) के लिए लेवल-1 एवं लेवल-2 के पदों का मैचिंग सरेंडर (पदों का समर्पण) अनिवार्य था।
प्रशासनिक चूक: दानापुर मंडल में वाणिज्य विभाग के लेवल – 01 पदों को सरेंडर तो किया गया, लेकिन उनका उपयोग कर्मचारियों के अपग्रेडेशन लाभ के लिए करने के बजाय अन्य प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप,जब लाभ देने का समय आया तो कार्मिक विभाग ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि “लेवल- 1 एवं लेवल – 2 के पद अभ्यर्पण हेतु उपलब्ध नहीं है।
(2) रेलवे बोर्ड का कड़ा रूख (2023 – 2025)
स्पष्टीकरण: रेलवे बोर्ड ने अपने पत्र संख्या PC – VII /2023/ RSP/2 में स्पष्ट कर दिया कि नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
बोर्ड ने दोहराया कि बिना बचत ( Matching Saving) के अपग्रेडेशन की अनुमति नहीं है।
किसी कैडर में केवल “एक पद” के अपग्रेडेशन के लिए नियमों को राउंड ऑफ नहीं किया जा सकता।
परिणाम: मंडल और मुख्यालय (हाजीपुर) के बीच पत्रों का आदान-प्रदान होता रहा, लेकिन कर्मचारियों को वास्तविक लाभ से वंचित रखा गया।
(3) वर्ष 2026: ‘सरप्लस’ और ‘रिडिप्लाॅयमेंट’ का नया संकट
वर्तमान स्थिति: 13 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के अनुसार, वाणिज्य विभाग के कई कर्मचारियों (जैसे जनरल एसिस्टेंट/मार्कर और सील पोर्टर) को सरप्लस स्टाफ घोषित कर दिया गया है।
विस्मयकारी तथ्य: जिन कर्मचारियों को पदोन्नति मिलनी चाहिए थी, उन्हें अब वैकल्पिक पदों पर रिडिप्लाॅयमेंट (पुनर्नियोजन) के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट हेतु बुलाया जा रहा है।
यह मामला केवल प्रशासनिक देरी का नहीं बल्कि “Policy Mismanagement” का है। जहां एक ओर विभाग पदों की कमी का हवाला देकर अपग्रेडेशन रोक रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं विभागों में कर्मचारियों को सरप्लस घोषित कर हटाया जा रहा है।यह स्थिति दानापुर मंडल में प्रशासनिक जवाबदेही और कर्मचारी कल्याण की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस समस्या का समाधान करेगा कौन? एक दुखद पहलू यह भी है कि रेलवे बोर्ड के पत्र संख्या RBE No 155/2022 का अनुपालन पूर्व मध्य रेलवे के मुख्यालय एवं सोनपुर, समस्तीपुर, धनबाद एवं दीनदयाल उपाध्याय मंडल में हो चुका है और कर्मचारियों को अपग्रेडेशन का लाभ मिल चुका है।
इस समस्या के निदान एवं कर्मचारी कल्याण से पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक को तो कोई मतलब है नहीं,अब देखने वाली बात यह होगी कि भारतीय रेल के टेक्नोक्रेट एवं ब्यूरोक्रेट रेलमंत्री क्या पहल करते हैं क्योंकि देर से मिला हुआ न्याय भी अन्याय के समान होता है।
उम्मीदें हैं तो जिंदगी है..
सफ़र जारी है..





