पटना: इस विषय से संबंधित एक रिपोर्ट दिनांक 09 अप्रैल को प्रकाशित हुई थी और यह पोस्ट कपटी कार्मिक तक पहुंच भी गई और उनको मिर्ची लग गई और जानकारी मिली है कि “कुकर्मी” कार्मिक के मुखिया प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी सुरेश चंद्र श्रीवास्तव प्रतिशोध की मुद्रा में आ गए हैं और यह पता करने लग गए हैं कि किसके द्वारा यह मामला Railwellwishers तक पहुंचाई गई है।
आप सभी ने सुना होगा कि भारतीय जीवन बीमा निगम का एक नारा है “जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी”और भारतीय जीवन बीमा निगम के इस चर्चित नारे को पूर्व मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग ने भी आत्मसात कर लिया है।यह भी पता चला है कि कार्मिक विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी सुरेश चंद्र श्रीवास्तव से मिलने गए उन अधिकारियों में से एक को प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी ने देख लेने की धमकी भी दी है और कहा है कि इस सिस्टम से बैर मत लो, नहीं तो अंजाम बुरा ही होगा और अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो।
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अब सोचने और देखने वाली बात यह है कि जिस प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी को कर्मियों एवं अधिकारियों के साथ न्याय की व्यवस्था करनी हैं, अपने साथ न्याय की व्यवस्था की मांग करने वाले को धमकी देकर अपने संस्कार का परिचय दें रहें हैं, खैर संयोगवश इस गरमागरम बहस की रिकार्डिंग Railwellwishers के पास उपलब्ध है और उचित समय पर इसे सार्वजनिक भी किया जाएगा।

यह भी सूचना मिली है कि कार्मिक विभाग के तुगलकी फरमान से आहत एवं प्रभावित ग्रुप-बी अधिकारियों का समूह 08 अप्रैल को पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह को अवगत कराने तथा अपनी वेदना से अवगत कराने हेतु महाप्रबंधक से मुलाकात करने गए थे परन्तु महाप्रबंधक उनसे नहीं मिले और अपने अधीनस्थ अधिकारियों से मिलने को कहकर मिलने से पल्ला झाड़ लिया, वैसे विश्वनीय सूत्रों का कहना है कि पूर्व मध्य रेलवे के महाभ्रष्ट एवं मति भ्रष्ट महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह उन्हीं से मिलते-जुलते हैं जिनसे इन्हें कुछ मिलना होता है।
हार दार कर कार्मिक विभाग के तुगलकी फरमान से आहत ग्रुप-बी अधिकारियों का समूह अपने कैडर नियंत्रण अधिकारी प्रमुख मुख्य अभियंता (PCE) से मुलाकात कर अपनी बात कही और प्रमुख मुख्य अभियंता (PCE) महोदय को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि छह वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके 11 सहायक अभियंता को Revert करने का एकतरफा निर्णय बिना उनके संज्ञान में लिए लिया गया है और मामले की जांच पड़ताल करने का आश्वासन दिया।
यह भी जानकारी मिली है कि प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO) ने CAT के आदेश में गलत प्रकिया से चयनित एक अधिकारी का खुलेआम पक्ष लेते दिखाईं दिए क्योंकि वह अधिकारी प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी का स्वजातीय है!

क्रोध एवं उत्तेजना में प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO) सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने यहां तक कह दिया कि जब CAT का निर्णय उन दो अधिकारियों के विरूद्ध आया था तो बाकी के 11 अधिकारियों ने उनका साथ क्यूं नहीं दिया और उन दोनों को CAT में अपना केस लड़ने के लिए चंदा क्यूं नहीं दिया!
प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO) के इस कथन से बाकी 11 अधिकारियों का माथा घुम गया और सबको यह समझ में आ गया कि CAT के आदेश के आदेश के अनुसार ग़लत प्रकिया से चयनित अधिकारियों को Revert नहीं कर पैनेल के सारे अधिकारियों को Revert कराने के पीछे उनकी मंशा क्या है! वे अपने स्वजातीय अधिकारी को बचाने के लिए ही मामले को और भी पेंचीदा बना रहे हैं।
साथ ही साथ यह भी घोर आश्चर्य का विषय है कि 13 AEN को Revert करने का निर्णय कैडर कन्ट्रोलिंग अधिकारी के संज्ञान में लाए बिना लिया गया।
पैनल के सभी अधिकारियों को Revert करना, प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी ( PCPO) की ग़लत मंशा को और भी बलवती करता है।
प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO)की इस पक्षपाती रवैया और विभाग के उदासीन रवैया को देखते हुए प्रभावित ग्रुप-बी अधिकारियों ने मामले को पेंचीदा बनाने वाले पक्षपाती अधिकारियों को दुरुस्त करने के लिए कमर कस लिया है।

प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO)की धमकी और आगे इस रस्साकसी की कहानी अगले अंको भी जारी रहेगी..
लेकिन Railwellwishers अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेगा और पूर्व मध्य रेलवे के कुकर्मी कार्मिक विभाग के तुगलकी फरमान से आहत ग्रुप-बी अधिकारियों को न्याय मिलने तक अपने कर्तव्यों का पालन करता रहेगा।
इसी संकल्प के साथ सफर जारी है…





