दानापुर मंडल विद्युत विभाग में चल रहा है “माफिया राज”, बिना काम के हुआ भुगतान! (भाग 02)

दानापुर मंडल विद्युत विभाग में चल रहा है “माफिया राज”, बिना काम के हुआ भुगतान! (भाग 02)

दानापुर: पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल का विद्युत विभाग “माफिया”के चरणों में शरणागत है और ऐसा शरणागत है कि माफिया के आदेशों का अनुपालन करने में रेलवे बोर्ड के आदेशों का अनुपालन भी सुनिश्चित नहीं हो रहा है लेकिन “माफिया” के आदेशों का अनुपालन “Just Do it” करने में कोई कोताही नहीं। दानापुर मंडल के विद्युत विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी “नाच मेरी बुलबुल की पैसा मिलेगा” के तर्ज पर नाच रहे हैं।

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आपने कहानी के पहले भाग में देखा है कि Bhagat Engineering works,Munger को निविदा आवंटित करने हेतु निविदा की शर्तों में ही एक विशेष शर्त जोड़ दिया गया था जिससे की निविदा में कोई और प्रतिभागी शामिल हो ही नहीं सके और ऐसा ही हुआ भी। बिना काम के भुगतान भी हो गया लेकिन जब Rail well-wishers ने रेल पटल पर इस मामले को उजागर किया तो अगले ही दिन रात के अंधेरे में दानापुर पावर हाउस में एक ट्रांसफार्मर की अनलोडिंग हुई और तो और सतर्कता विभाग को भी अपने साख का ख्याल आया तो निविदा से संबंधित फाइल को ले जाया गया।

खैर उस मामले में जो होना है और जो होना चाहिए वो शासन एवं प्रशासन का विषय है लेकिन यह पहला मामला नहीं है जिसमें बिना काम के भुगतान किया गया है। बिना काम के भुगतान विद्युत विभाग की पहचान बन चुकी है और इसका अनेकों प्रमाण उपलब्ध है जो आप “दानापुर मंडल विद्युत विभाग में चल रहा है “माफिया राज”, बिना काम के भुगतान! ,की श्रृंखला में देखेंगे।

बिना काम के भुगतान की दूसरी कड़ी में आप पाटलिपुत्र रेल परिसर दीधा में विद्युत विभाग के कारनामों का दर्शन से शासन एवं प्रशासन के अनुशासन का आकलन कर सकते हैं।

पाटलिपुत्र रेल परिसर,दीधा में विद्युतीय कार्य एवं सुधार हेतु निविदा संख्या EL -50 – DNR – OPEN -39 -2024-2025 जारी किया गया और हमेशा की तरह Bhagat Engineering works Munger को ₹13 करोड़, 55 लाख,52 हजार,254 रूपए का निविदा 20.01.2025 को आवंटित किया गया।
निविदा के उपरांत भेरियेशन के माध्यम से ₹ 6 करोड़ 10 लाख,26 हजार 560 रुपए की बढ़ौतरी की गई वैसे आप जान लिजिए कि विद्युत विभाग के हर निविदा में भेरियेशन अवश्य संभावी है क्योंकि” माफिया राज” हावी और प्रभावी है।

खैर भेरियेशन के बाद निविदा का कुल रकम बढ़कर ₹ 19 करोड़ 65 लाख,78 हजार 814 रुपए हो गया। 20.07.2025 तक Bhagat Engineering works Munger को सात बिल के माध्यम से ₹18 करोड़, 17 लाख, 94 हजार 248 रूपए का भुगतान कर दिया गया ।

ठीक है निविदा हुआ भेरियेशन हुआ भुगतान भी हुआ लेकिन भुगतान किस लिए हुआ जानना आवश्यक है। इस निविदा में हजारों की संख्या में लाईट फिटिंग, स्ट्रीट लाईट, फिटिंग एवं केबुल का सप्लाई किया गया है। कोई भी समान की खरीद स्टोर विभाग का काम है।इस निविदा में 24000 मीटर केबुल लिया गया है जो नियम विरुद्ध है।

इसी निविदा में 500 केभीए का चार ट्रांसफार्मर सप्लाई किया जाना है परन्तु पाटलिपुत्र रेल परिसर में पहले से ही 500 केभीए का पांच ट्रांसफार्मर लगा हुआ है और कार्य कर रहा है। पाटलिपुत्र रेल परिसर का विद्युत लोड 350 केभीए है, इसके बाबजूद 500 केभीए का चार ट्रांसफार्मर सप्लाई किया जाना है, अर्थात कुल मिलाकर 09 ट्रांसफार्मर अर्थात 4500 केभीए लोड हो जाता है जबकि इस परिसर का लोड 350 केभीए है।

आखिर क्या है मामला?

मामला में गड़बड़झाला तो है ही, बिहार विद्युत नियामक आयोग के आदेशों का भी स्पष्ट उल्लंघन है क्योंकि जितना केभीए लोड का अनुमति प्राप्त हैं उससे 50 प्रतिशत ज्यादा क्षमता तक का ट्रांसफार्मर लगा सकते हैं लेकिन यहां तो 500 केभीए का 09 ट्रांसफार्मर, बिहार विद्युत नियामक आयोग को भी इस तरह के मामले में संज्ञान लेना चाहिए लेकिन इतना तो स्पष्ट परिलक्षित होता है कि पूर्व मध्य रेलवे के विद्युत विभाग में आजादी का अमृत महोत्सव लूट खसोट का अमृत महोत्सव बन गया है।

भले ही यह लूट खसोट भारतीय रेल के लिए आपदा है और इसकी भरपाई आमजनों के टैक्स से होती है लेकिन रेलवे के सतर्कता विभाग के लिए एक अवसर के रूप में तब्दील हो जाता है क्योंकि रेलवे के सतर्कता विभाग की क्या स्थिति है बताने की जरूरत नहीं क्योंकि बताने लायक नहीं है।
विद्युत विभाग द्वारा जारी अभियान बिना काम के भुगतान की एक और कहानी अगले भाग में..
तमसो मा ज्योतिर्गमय!

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3 Comments

  1. Rajesh Kumar

    Any work which starts with “Improvement of power supply….” and “strengthening of power supply….” meaning work is for Bhagat Engg Munger and it is trademark of Bhagat Engg works. And there will be no ground work and full payment with 50 percent variation..In variation the tubelight will be supplied and that too 4 to 6 times of market rate. In Sonpur division also any work starting with above prefix has the same fate. No work full payment including 50 percent variation.

  2. Rajesh Kumar

    The same Sr. Dee g then posted at Sonpur has done numerous works starting with same prefix. And you know the result. Full payment with 50 percent variation. But work no where.

  3. Abdul rehman

    If you see the LOA of the Digha work, you will find many items which is either not required or quantity taken as very huge. This complete work is merely wastage of money and filling the pockets of contract and officers. As the Digha colony is neither new not very old. It is a full fledged society and such expenditure is totally impractical and full of corruption. There should be a thorough check and culprit should be published.

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