पिछले 11 वर्षों में भारतीय रेलवे में अभूतपूर्व ढांचागत परिवर्तन हुए:अश्विनी वैष्णव

पिछले 11 वर्षों में भारतीय रेलवे में अभूतपूर्व ढांचागत परिवर्तन हुए:अश्विनी वैष्णव

दिल्ली। गति शक्ति विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह आज वडोदरा में आयोजित किया गया। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह इस समारोह में वर्चुअल माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अपने बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में अभूतपूर्व परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, जो देश के आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत नींव रख रहा है।
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को 21वीं सदी के भारत के लिए गेम चेंजर बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इसमें युवाओं के लिए अपार अवसर हैं और यह विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

लॉजिस्टिक्स के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि देश में लॉजिस्टिक्स सेवाएं जितनी मजबूत होंगी, हमारी सीमाएं भी उतनी ही मजबूत रहेंगी। जब हम देश के एक हिस्से में निर्मित रक्षा उत्पाद या सैनिकों के लिए खाद्य आपूर्ति समय पर सीमा तक पहुंचाते हैं, तो हमारे सीमा रक्षकों का मनोबल और मजबूत हो जाता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री और गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले 11 वर्षों में भारतीय रेलवे में हुए परिवर्तनकारी बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में रेल नेटवर्क का 5,300 किलोमीटर तक विस्तार किया गया है और सुरंग निर्माण कुल 368 किलोमीटर तक पहुंच गया है।

इतिहास में ढाई सदियों की अवधि को छोड़कर भारत हमेशा से दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है। उन्होंने गति शक्ति विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से हर क्षेत्र पर केंद्रित मानव संसाधन का निर्माण करके भारत को एक बार फिर शीर्ष अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर दिया।गति शक्ति विश्वविद्यालय ने लगभग 40 विभिन्न औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने भविष्य में मरीन इंजीनियरिंग पर केंद्रित शोध पत्र तैयार करने और समुद्री उद्योगों के साथ समझौता ज्ञापन करने का भी सुझाव दिया।

श्री अश्विनी वैष्णव ने स्नातक छात्रों को भारत की विकास यात्रा में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया और इस क्षेत्र में नवाचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने गति शक्ति विश्वविद्यालय को “विकास का इंजन” बताया और छात्रों से 2047 तक विकसित भारत के विजन का समर्थन करने का आग्रह किया।

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