पटना: जब अकूत धन संग्रह करने के लिए मन में मीरा जैसी दीवानगी हो और कोई रोके नहीं टोके नहीं, जैसी स्थिति हो तो परिस्थिति वैसी ही बनती है जैसा पूर्व मध्य रेलवे के पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल में हुआ है। 4 फरवरी 2025 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल में आयोजित होने वाली चीफ लोकों इंस्पेक्टर की पदोन्नति परीक्षा में हो रही धांधली एवं वसूली को सीबीआई लखनऊ की टीम ने रेलवे के दो अधिकारियों समेत 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर परीक्षा माफियाओं की मंशा को नाकाम तो कर ही दिया है। विभागीय पदोन्नति परीक्षा में हो रही धांधली को भी बेपर्दा कर दिया है।
कहते है न कि जब पाप का घड़ा भर जाता है तो फूटता जरूर है लेकिन परीक्षा माफियाओं के संरक्षण में पाप का घड़ा फूट तो नहीं रहा था लेकिन ओवरफ्लो कर रहा था।और ओवरफ्लो होने के कारण जो बदबू फैली तो रेलवे बोर्ड ने अपनी नाक बचाने खातिर विभागीय पदोन्नति परीक्षा लेने की जिम्मेदारी मंडल एवं ज़ोनल मुख्यालय से हटाकर रेलवे भर्ती बोर्ड को सौंपने का निर्णय लिया तो कर्मियों में खुशी की लहर दौड़ गई। खुशी होने का मुख्य कारण यह है कि अभी तक का इतिहास है और कर्मी अवगत हैं कि यदि पदोन्नति पाना है तो बिना धन खर्च किए संभव नहीं है।
पूर्व में एलडीसीई 30% परीक्षा ज़ोनल मुख्यालय स्तर पर ही होता था और धांधली की शिकायतों को देखते हुए परीक्षा लेने की जिम्मेदारी नेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन रेलवे, बड़ौदा को सौपी गई थी। लेकिन नेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन रेलवे बड़ौदा ने 2024 में धांधली का ऐसा नायाब और अनोखा तरीका अपनाया कि रेलवे बोर्ड को परीक्षा रद्द करना पड़ा और पुनः परीक्षा आयोजित करनी पड़ी लेकिन परीक्षा में धांधली करने वालों पर क्या कार्रवाई हुई आज़ भी अंधेरे में ही हैं।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल में चीफ़ लोकों इंस्पेक्टर की पदोन्नति परीक्षा में हुई धांधली के सूत्रधार और सीबीआई द्वारा गिरफ्तार श्री सुरजीत सिंह पूर्व में दानापुर मंडल में ही वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी रहे हैं। दानापुर मंडल में अपने कार्यकाल में इन्होंने एसबीएफ में भी करोड़ों की चपत लगाई थी। मामला सतर्कता विभाग भी गया था लेकिन वरिष्ठ उप महाप्रबंधक सतर्कता कार्मिक कैडर के ही थे और तब उन्होंने अपना कैडर प्रेम दर्शाया था और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सीबीआई द्वारा गिरफ्तार और 18 मार्च तक जेल भेजें गए श्री सुरजीत सिंह ने दानापुर में पूर्व मध्य रेलवे सीनियर सेकेंडरी स्कूल के लिए खरीदें गए बेंच एवं डेस्क में भी घोटाला किया था जो कि जांच का विषय है क्योंकि ज्यादा कमिशन के चक्कर में इन्होंने विपत्र में वर्णित साइज़ से छोटे साइज़ की आपूर्ति की परमिशन देकर लूटने की मनोवृत्ति का दर्शन कराया था।
खैर पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल में सीबीआई द्वारा दो अधिकारियों समेत 26 आरोपियों को जेल भेजकर विभागीय पदोन्नति परीक्षा में रेलवे की सुरक्षा एवं संरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले का पर्दाफाश तो कर दिया लेकिन दानापुर मंडल में सीएलआई परीक्षा में धांधली करने वालों का पर्दाफाश अभी बाकी है। 8 फरवरी 2025 को दानापुर मंडल में चीफ लोकों इंस्पेक्टर की पदोन्नति परीक्षा पूर्व मध्य रेलवे सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खगौल में आयोजित की गई थी। परीक्षा सुबह 10.00 बजे शुरू होना था लेकिन परीक्षा अपने नियत समय से 3.35 घंटे विलम्ब से शुरू हुआ। जब परीक्षा में हो रहे विलम्ब को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया तो बताया गया कि कहीं पावर फेल हो गया है लेकिन जब अभ्यर्थियों ने पावर कंट्रोल से सम्पर्क किया तो बताया गया कि कहीं कोई पावर फेल नहीं हुआ है तब सवाल यह उठता है कि 3.35 घंटे तक वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन श्री प्रशांत कुमार कहां थे और क्या कर रहे थे??
रेल सूत्रों एवं परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि 12-13 अभ्यर्थियों का मामला सेट हो गया था और 90 लाख की वसूली हुई थी। इस अवैध खेल में वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन के साथ साये की तरह रहने वाले एक सीएलआई की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, लेकिन सतर्कता विभाग में शिकायत दर्ज होने पर परीक्षा को पुनः एक बार रद्द कर दिया गया। विदित है कि सीएलआई के चयन के लिए 2022 में ही नोटिफिकेशन जारी किया गया था और 2023 में आयोजित परीक्षा को धांधली की प्रमाणिक शिकायत मिलने पर परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। तीन साल में भी सीएलआई की पदोन्नति परीक्षा का नहीं होना धांधली की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या है?
खैर जो होना था हो गया लेकिन अब सीबीआई की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल की तरह दानापुर मंडल में सीएलआई की परीक्षा में हुई धांधली करने वाले को चिन्हित कर जेल भेजकर अपनी भूमिका से न्याय करें।
सीबीआई ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल में जिस तरह से धांधली करने वालों की पोल खोल दी है दानापुर मंडल में रद्द कर दी परीक्षा में धांधली करने वालों का पर्दाफाश करें ऐसा उम्मीद तो किया ही जा सकता है।
उम्मीदें हैं तो जिंदगी है..






The entire railway should be made a public sector.
Bus ummid par hi sab bacha hai varna bhrashtachar ka deemak pure system mai hai