पटना: जब 05 जुलाई 2024 को रेलवे के लोकों पायलटों ने भिन्न-भिन्न लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी से मुलाकात कर “ज्यादा काम” और “कम आराम” के साथ सुविधाओं में कमी को लेकर अपनी चिंता जताई थी तो लोकों पायलटों की समस्याओं को लेकर मीडिया में खुब चर्चा हुई। अपने विभाग पर हुए हमले से आहत रेलमंत्री ने लोकों पायलटों की समस्याओं के निस्तारण हेतु सितम्बर 2024 में ही एक समिति बनाने की घोषणा की लेकिन समिति बनाने के लिए कोई कारवाई नहीं कर अपनी कार्य कुशलता से अवगत कराया। लोकों पायलटों की समस्याओं एवं समाधान पर रेलवे के आला अधिकारियों का रनिंग रूम निरीक्षण एवं लोकों पायलटों के साथ संवाद का वीडियो वायरल हुआ लेकिन समस्याओं के निस्तारण हेतु कोई कार्रवाई नहीं होना रेल मंत्री के कार्यशैली को परिलक्षित करने के लिए पर्याप्त है।
भारतीय रेलवे के लोकों पायलट जिन पर रेलवे की रफ्तार की जिम्मेदारी है अपने वरीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से आहत है। वर्षों से लोकों पायलटों की नियुक्ति नहीं होने से ड्यूटी कर रहे कर्मयोगियों एवं उनके आश्रितों का जीवन नरक से बद्तर हो गया है। इस समस्या से भारतीय रेलवे का कोई भी मंडल अछूता नहीं है लेकिन पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में रेलवे के कर्मयोगी लोकों पायलटों का जीवन बद से बद्तर होते जा रहा है। और बद्तर होने का कारण दानापुर मंडल के वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन की कार्यशैली है। कार्यशैली ऐसा की रेलमंत्री ही नहीं पुरी व्यवस्था ही शरमा जाए।
वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन की कार्यशैली को देखकर ऐसा परिलक्षित होता है कि उनकी चिकित्सा जांच आवश्यक ही नहीं अति आवश्यक है।
बहुत सारे लोग ऐसा सोच सकते है कि वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन के चिकित्सा जांच की जरूरत क्यों आन पड़ी तो इसके पीछे मुख्य कारण इनकी कार्यशैली है जो कुछ उदाहरणों से कोई भी इनकी चिकित्सा जांच से असहमत नहीं हो सकता।
फतुहा में पदस्थापित एक कर्मयोगी लोकों पायलट गुड्स को सिर्फ इसलिए 35 दिनों तक संस्पेंड कर दिया गया क्योंकि उसने 11 घंटे ड्यूटी करने के बाद अपने लिए रेस्ट की मांग कर दी। संस्पेंड तो किया ही गया उस कर्मयोगी लोकों पायलट को सजा के तौर पर तिलैया स्थानांतरण कर दिया गया।
फतुहा में ही पदस्थापित एक कर्मयोगी लोकों पायलट गुड्स को सिर्फ इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि उसने बिना एल आर वाले रूट में ड्यूटी लगाने पर साथ में सीएलआई की मांग कर दी,अब बात सोचने वाली यह है कि कर्मयोगी लोकों पायलट ने क्या ग़लती कर दी,यदि दुर्भाग्यवश कोई घटना घटित हो जाती तो कौन जिम्मेदार होता? खैर कर्मयोगी लोकों पायलट ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में कोई कोताही नहीं बरती लेकिन उसे भी 35 दिनों तक संस्पेंशन का दंश झेलना पड़ा और संस्पेंशन के इस 35 दिनों में उस लोकों पायलट गुड्स के साथ उसके परिवार एवं बच्चों पर क्या पीड़ा गुज़री होगी चिंता ही नहीं चिंतन का विषय है। मामला विशुद्ध रूप से मानवीय संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ एवं अत्याचार का है। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ उस लोकों पायलट गुड्स का भी स्थानांतरण तिलैया कर दिया गया।
लोकों पायलटों से संवाद के बाद जो जानकारी मिली वह और भी हैरान करने वाला है । उनका कहना था कि यह तो कुछ भी नहीं है अनेकों ऐसे मामले है जिनमें कर्मयोगी लोकों पायलट पर अनाप-शनाप आरोप के आधार पर कारवाई और आर्थिक दोहन हुआ है।
दानापुर मंडल के वरीय मंडल विधुत अभियंता परिचालन ने कर्मचारियों के साथ अत्याचार तो किया ही है रेलवे के राजस्व को चपत लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है, अन्य मंडलों से या अन्तर रेलवे स्थानांतरण पर आने वाले अभ्यर्थियों को पदस्थापना हेतु तीन महीने तक प्रतीक्षा कराना किस अधिनियम के तहत हुआ है, सतर्कता विभाग के लिए जांच का विषय है।
सतर्कता विभाग तो इनके कारनामों की जांच करेगी ही लेकिन पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक महोदय को इनके द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा करने के साथ साथ इनकी चिकित्सा जांच अवश्य ही करानी चाहिए अन्यथा कभी भी कहीं भी कोई घटना दुर्घटना घटित हो सकती है क्योंकि सावधानी हटी दुर्घटना घटी।
इनके काले कारनामों की फेहरिस्त लंबी है और जो शेष है वह विशेष है।
railwellwishers.com कर्मचारियों के हित में महाप्रबंधक पूर्व मध्य रेलवे से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा रखता है।
शेष और विशेष अगले अंक में…




The Railway Minister should hold a meeting with the employees of each division every six months.