जिस माफिया ने टीआरएस को बनाया”रखैल”अब भी जारी है उसकाअवैध खेल

जिस माफिया ने टीआरएस को बनाया”रखैल”अब भी जारी है उसकाअवैध खेल

पटना: दानापुर मंडल के राजगीर स्टेशन पर वर्षों से पदस्थापित टीआरएस विभाग के जिस माफिया श्री कौशलेंद्र कुमार के कारनामों से railwellwishers.com ने आपको 26 जुलाई 2024 के अंक “माफिया कौशलेंद्र कुमार का खेल , टीआरएस विभाग को बनाया “रखैल” अवगत कराया था लेकिन सिस्टम के बेचारगी का दर्शन करने के लिए यह पर्याप्त है क्योंकि टीआरएस विभाग के माफिया श्री कौशलेंद्र कुमार अभी भी राजगीर का राज भोग रहे हैं चर्चा तो यही है “कोई बोलतई रे”वैसे तो यह मगध क्षेत्र में बोलचाल का अंदाज है लेकिन राजगीर में पदस्थापित टीआरएस माफिया श्री कौशलेंद्र कुमार पर सटीक बैठता है सटीक इसलिए क्योंकि किसी ने भी इस चुनौती को स्वीकार इसलिए नहीं किया क्योंकि उसने सभी को अपने तरीके से उपकृत एवं उपयोग किया और जब हों गए उपकृत तब कैसे दिखेगा कृत्य।
खैर रेलवे बोर्ड के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एवं अध्यक्ष श्री सतीश कुमार जी ने अपने पत्र D.O.No – 2022/V-1 /ALSL/1/1 dated 11.12.2024 के माध्यम से सभी महाप्रबंधक महोदय से रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या 2008/V-1/CVC/1/4 dated 18.02.2009 के अनुपालन के लिए निर्देशित किया है जो कि स्वागत योग्य है, रेलवे बोर्ड के आदेशों का अनुपालन नहीं होना सिस्टम के डिरेलमेंट को परिलक्षित करता है क्योंकि समस्याओं के निस्तारण के बदले अग्रसारण की नीति ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है और भ्रष्टाचार बढ़े भी तो कैसे नहीं बढ़े जब पूर्व मध्य रेलवे के “पलटीमार” प्रमुख विधुत अभियंता जो अपना ही निर्णय पलटने के लिए विख्यात है, माफिया पर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं और दानापुर मंडल के वरीय मंडल विधुत अभियंता (ओपी) श्री प्रशांत कुमार धृतराष्ट्र का स्मरण करा रहे हैं और विदुर अपने “धृतराष्ट्र के संजय” से टीआरएस का चीरहरण कर रहे हैं तब सवाल यह उठता है कि टीआरएस विभाग के धृतराष्ट्र का “संजय” कौन है?


Railwellwishers को “धृतराष्ट्र के संजय” के बारे में जो जानकारी मिली है वह चौंकाने वाला है, पटना जंक्शन पर पदस्थापित सहायक लोको पायलट मनीष कुमार ही धृतराष्ट्र का संजय है जो पिछले छः महीने से बिना कोई रेल का ड्यूटी किए रेलवे को चुना लगाकर सिस्टम को चुनौती पेश कर रहा है खैर यह तो बात हो गई लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि रेलवे का सतर्कता विभाग क्या कर रहा है और क्यूं नहीं कर रहा है तब ऐसा लगता है कि रेलवे का भ्रष्टाचार और रेलवे का सतर्कता विभाग रिश्ते में दोनों “साढ़ू ” है। साढ़ू इसलिए कि क्योंकि दोनों एक ही ससुर के दामाद है तब फिर क्या कहना!
आपकों देखकर देखता रह गया
क्या कहूं
और कहने को क्या रह गया।
खैर railwellwishers के पास कहने के लिए बहुत

कुछ है, सफ़र जारी हैं…

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